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मानक तो दूर कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 05 May 2015 02:20 AM IST
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कहीं सड़क नहीं है तो कहीं सीवर। कहीं पार्क नहीं है तो कहीं स्ट्रीट लाइट, यह हाल है प्राइवेट बिल्डरों द्वारा विकसित तमाम कालोनियां का। कालोनी या मल्टीस्टोरी निर्माण के दौरान तो बिल्डरों ने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन सालों गुजर जाने के बाद भी सड़क, पार्क, स्ट्रीट लाइट नहीं होने से लोग परेशान हैं। छोटे बिल्डरों ने तो मानकों को ताक पर रखकर अनियोजित तरीके से कालोनियां विकसित कर दी हैं।
प्रदेश सरकार लोगों की सहूलियत के लिए छोटे बिल्डरों पर शिकंजा कसना चाहती है। मगर शहर में सक्रिय कुछ बड़े बिल्डरों के साथ-साथ तमाम छोटे बिल्डर सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। प्रोजेक्ट लांच होने से पहले लोगों को तमाम सुविधाओं का प्रलोभन दिए, मगर जब मकान या फ्लैट हैंडओवर हो गया तो बिल्डरों ने पलटकर भी नहीं देखा। शमसाबाद रोड, ग्वालियर रोड, सिकंदरा, शास्त्रीपुरम आदि क्षेत्रों में विकसित कई प्राइवेट कालोनियों में लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई कालोनियों में तो सीवर निकासी तक की उचित व्यवस्था नहीं है। घरों के सामने सीवर उफान मारता है। लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
बता दें, शहर में 125 बिल्डर सक्रिय हैं। इसके अलावा बहुत से लोगों ने तो बिना रजिस्ट्रेशन के ही कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों की तो गिनती ही नहीं। ऐसे लोग बिना मानकों के ही निर्माण कर अपना धंधा चला रहे हैं।
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कैसे पूरा होगा सीएम का सपना
प्रदेश सरकार सस्ते घरों पर जोर दे रही है, ताकि सामान्य वर्ग को छत उपलब्ध हो सके। मगर, प्राइवेट बिल्डर तो छोड़ो आवास विकास परिषद और आगरा विकास प्राधिकरण तक अफोर्डेबिल हाउसिंग को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे, जबकि पिछले साल क्रेडाई के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसी शहर की जमीन से ही अफोर्डेबिल हाउसिंग योजना की घोषणा की थी। इसके बावजूद शहर में न तो बिल्डर और न ही सरकारी विभाग इसको लेकर कोई कदम आगे बढ़ा रहे हैं। बता दें कि सीएम ने प्राइवेट बिल्डरों से भी अफोर्डेबिल हाउसिंग योजना को प्रमोट करने के लिए आह्वान किया था। इसके लिए उन्हें तमाम सहूलियतें भी देने का आश्वासन दिया था।
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प्रदेश सरकार लोगों की सहूलियत के लिए छोटे बिल्डरों पर शिकंजा कसना चाहती है। मगर शहर में सक्रिय कुछ बड़े बिल्डरों के साथ-साथ तमाम छोटे बिल्डर सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। प्रोजेक्ट लांच होने से पहले लोगों को तमाम सुविधाओं का प्रलोभन दिए, मगर जब मकान या फ्लैट हैंडओवर हो गया तो बिल्डरों ने पलटकर भी नहीं देखा। शमसाबाद रोड, ग्वालियर रोड, सिकंदरा, शास्त्रीपुरम आदि क्षेत्रों में विकसित कई प्राइवेट कालोनियों में लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई कालोनियों में तो सीवर निकासी तक की उचित व्यवस्था नहीं है। घरों के सामने सीवर उफान मारता है। लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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बता दें, शहर में 125 बिल्डर सक्रिय हैं। इसके अलावा बहुत से लोगों ने तो बिना रजिस्ट्रेशन के ही कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों की तो गिनती ही नहीं। ऐसे लोग बिना मानकों के ही निर्माण कर अपना धंधा चला रहे हैं।
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प्रदेश सरकार सस्ते घरों पर जोर दे रही है, ताकि सामान्य वर्ग को छत उपलब्ध हो सके। मगर, प्राइवेट बिल्डर तो छोड़ो आवास विकास परिषद और आगरा विकास प्राधिकरण तक अफोर्डेबिल हाउसिंग को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे, जबकि पिछले साल क्रेडाई के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसी शहर की जमीन से ही अफोर्डेबिल हाउसिंग योजना की घोषणा की थी। इसके बावजूद शहर में न तो बिल्डर और न ही सरकारी विभाग इसको लेकर कोई कदम आगे बढ़ा रहे हैं। बता दें कि सीएम ने प्राइवेट बिल्डरों से भी अफोर्डेबिल हाउसिंग योजना को प्रमोट करने के लिए आह्वान किया था। इसके लिए उन्हें तमाम सहूलियतें भी देने का आश्वासन दिया था।