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मानसिक रोग चिकित्सकों की सलाह- महंगे उपहार नहीं, बच्चों को दें बेशुमार प्यार
Sun, 22 Sep 2019 09:29 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 22 Sep 2019 09:29 PM IST
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इंडियन एसोसिएशन ऑफ बायोलॉजिकल साइकियाट्री के राष्ट्रीय अधिवेशन में चिकित्सकों ने युवाओं में ड्रग, डिजिटल एडिक्शन, गुस्सा, तनाव और अन्य मानसिक बीमारियों पर चिंता जताई। अंतिम दिन मानसिक बीमारियों से बचाव पर चर्चा करते हुए डॉक्टरों ने बच्चों को प्यार का डोज देने की जरूरत बताई। स्कूलों में मेंटल हेल्थ प्रोग्राम की भी सिफारिश की।
आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित होटल में रविवार को मानसिक बीमारियों से बचाव पर आयोजित संगोष्ठी में इंडियन साइकियाट्री सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजीत भिदे ने कहा कि शराब-धूम्रपान, अश्लील सामग्री, डिजिटल एडिक्शन की लत भविष्य में और विकराल हो सकती है। बच्चों को संस्कार, नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाए। इसमें शिक्षक और अभिभावकों की ज्यादा जिम्मेदारी है।
मुंबई के डॉ. अनुकांत मित्तल ने कहा कि बच्चों के महंगे शौक पूरा कर अभिभावक जिम्मेदारी खत्म समझकर बड़ी भूल करते हैं। बच्चों को जरूरत और मांग का अंतर समझाएं। महंगे उपहार के बजाये खूब दुलार दें।
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आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित होटल में रविवार को मानसिक बीमारियों से बचाव पर आयोजित संगोष्ठी में इंडियन साइकियाट्री सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजीत भिदे ने कहा कि शराब-धूम्रपान, अश्लील सामग्री, डिजिटल एडिक्शन की लत भविष्य में और विकराल हो सकती है। बच्चों को संस्कार, नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाए। इसमें शिक्षक और अभिभावकों की ज्यादा जिम्मेदारी है।
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मुंबई के डॉ. अनुकांत मित्तल ने कहा कि बच्चों के महंगे शौक पूरा कर अभिभावक जिम्मेदारी खत्म समझकर बड़ी भूल करते हैं। बच्चों को जरूरत और मांग का अंतर समझाएं। महंगे उपहार के बजाये खूब दुलार दें।
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'गलत-सही का जानकारी दें'
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने कहा कि बच्चे फिल्म, सीरियल पर जो देखते हैं उनको सच मानकर वही दोहराते हैं। ऐसे में उन्हें गलत-सही की जानकारी दी जाए तो भविष्य में मानसिक विकार होने का खतरा काफी कम हो सकता है।
डॉ. एस. नागेंदरन ने कहा कि मानसिक रोगी नियमित दवाएं नहीं लेते। ऐसे में मरीज-तीमारदार की काउंसलिंग कर बताया जाए कि दवाएं न लेने से मर्ज किस कदर गंभीर हो सकती है।
संयोजक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि मेंटल हेल्थ प्रोग्राम का प्रस्ताव बनाया गया है, इसे सोसाइटी की मेंटल हेल्थ प्रोग्राम कमेटी से पास होने के बाद सरकार को भेजा जाएगा। इससे पहले सार्क साइकियाट्री फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. एमएस वीके राजू ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया।
डॉ. एस. नागेंदरन ने कहा कि मानसिक रोगी नियमित दवाएं नहीं लेते। ऐसे में मरीज-तीमारदार की काउंसलिंग कर बताया जाए कि दवाएं न लेने से मर्ज किस कदर गंभीर हो सकती है।
संयोजक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि मेंटल हेल्थ प्रोग्राम का प्रस्ताव बनाया गया है, इसे सोसाइटी की मेंटल हेल्थ प्रोग्राम कमेटी से पास होने के बाद सरकार को भेजा जाएगा। इससे पहले सार्क साइकियाट्री फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. एमएस वीके राजू ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने अभिभावकों को दिए सुझाव
- अच्छे अंक या फिर उपलब्धि के लिए दूसरों से अपने बच्चों की तुलना कर उसे हतोत्साहित न करें।
- पढ़ाई या फिर खेलकूद में अच्छे परिणाम के लिए बच्चों को प्रेरित करें, उसका मार्गदर्शक भी बनें।
- बच्चों को गले लगाएं, पीठ थपथपाएं, खूब दुलार करें। उसकी दिनचर्या, पढ़ाई-लिखाई पर भी चर्चा करें।
- देखादेखी बच्चा महंगा उपहार मांगे तो उसकी जिद पूरी न करें, बल्कि उसकी जरूरत के बारे में समझाएं।
- फिल्मी दुनिया, टीवी, वीडियो गेम और हकीकत की जिंदगी के फर्क के बारे में बताएं।
- बच्चों के सामने खुद भी मोबाइल पर फेसबुक, यू-ट्यूब ज्यादा न देखें।
- पढ़ाई या फिर खेलकूद में अच्छे परिणाम के लिए बच्चों को प्रेरित करें, उसका मार्गदर्शक भी बनें।
- बच्चों को गले लगाएं, पीठ थपथपाएं, खूब दुलार करें। उसकी दिनचर्या, पढ़ाई-लिखाई पर भी चर्चा करें।
- देखादेखी बच्चा महंगा उपहार मांगे तो उसकी जिद पूरी न करें, बल्कि उसकी जरूरत के बारे में समझाएं।
- फिल्मी दुनिया, टीवी, वीडियो गेम और हकीकत की जिंदगी के फर्क के बारे में बताएं।
- बच्चों के सामने खुद भी मोबाइल पर फेसबुक, यू-ट्यूब ज्यादा न देखें।