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एसएन इमरजेंसी में दिखी चिकित्सकों की 'गुंडागर्दी', नवजात नहीं किया भर्ती, तीमारदार पीटा
Tue, 06 Aug 2019 12:37 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 06 Aug 2019 12:37 AM IST
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एसएन मेडिकल कालेज
- फोटो : अमर उजाला
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एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में चिकित्सकों की गुंडागर्दी फिर सामने आई। नवजात को एनआईसीयू की सुविधा न बताकर भर्ती से मना कर दिया। परिजनों ने विरोध किया तो उनको पीट दिया। मोबाइल भी छीन लिया। पुलिस ने मामला शांत कराते हुए मोबाइल वापस कराया। परिजन नवजात को जयपुर ले गए हैं।
मथुरा के बल्देव निवासी बृजेश सिंह की पत्नी देवेंद्री का प्रसव सिकंदरा स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल में दोपहर के करीब 12 बजे हुआ। चिकित्सक ने नवजात के हृदय संबंधी बीमारी बताते हुए एसएन इमरजेंसी के लिए भेज दिया।
दोपहर एक बजे बृजेश अपने शिशु को लेकर इमरजेंसी पहुंचे, तो यहां एनआइसीयू की सुविधा न होने की बात कहते हुए कहीं और ले जाने को कहा। उन्होंने गिड़गिड़ाते हुए हालत खराब होने का हवाला देते हुए कहा कि कहीं और ले जाने की व्यवस्था करते हैं, तब तक भर्ती कर लो।
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मथुरा के बल्देव निवासी बृजेश सिंह की पत्नी देवेंद्री का प्रसव सिकंदरा स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल में दोपहर के करीब 12 बजे हुआ। चिकित्सक ने नवजात के हृदय संबंधी बीमारी बताते हुए एसएन इमरजेंसी के लिए भेज दिया।
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दोपहर एक बजे बृजेश अपने शिशु को लेकर इमरजेंसी पहुंचे, तो यहां एनआइसीयू की सुविधा न होने की बात कहते हुए कहीं और ले जाने को कहा। उन्होंने गिड़गिड़ाते हुए हालत खराब होने का हवाला देते हुए कहा कि कहीं और ले जाने की व्यवस्था करते हैं, तब तक भर्ती कर लो।
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इस पर नवजात को इमरजेंसी के अंदर ले लिया, लेकिन ऑक्सीजन नहीं दी। तीमारदार ने किसी को नंबर लगाने के लिए फोन लगाया तो डॉक्टरों ने उसे छीन लिया। विरोध किया तो उसकी पिटाई कर दी। पुलिस भी बुला ली। पुलिस ने मोबाइल दिलाते हुए मामला शांत कराया।
पीड़ित बृजेश सिंह का कहना है कि नवजात की तबियत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन उसे एनआइसीयू में भर्ती नहीं किया। स्ट्रेचर पर ही लिटा दिया। विरोध किया तो उसको पीटा। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि इमरजेंसी स्टाफ और बाल रोग विभाग से इसकी रिपोर्ट मांगी है।
पीड़ित बृजेश सिंह का कहना है कि नवजात की तबियत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन उसे एनआइसीयू में भर्ती नहीं किया। स्ट्रेचर पर ही लिटा दिया। विरोध किया तो उसको पीटा। प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि इमरजेंसी स्टाफ और बाल रोग विभाग से इसकी रिपोर्ट मांगी है।