सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग: टीके से बनेंगी एंटीबॉडी, करेंगी कोरोना वायरस से मुकाबला
आगरा में सोमवार को अमर उजाला के ‘सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग’ कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया। चिकित्सक और काउंसलर ने उन्हें टीके लगवाने का फायदें बताएं।
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कोरोना वायरस का टीका भी नियमित टीकाकरण जैसा ही है। इसके लगने से शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं जो कोरोना वायरस से मुकाबला करती हैं। टीके के कारण ही तीसरी लहर में ओमिक्रॉन का असर प्रभावी नहीं रहा। तो फिर... सुरक्षा कवच में देरी क्यों। अगर किसी ने टीका नहीं लगवाया तो सबसे पहले खुद टीका लगवाए और अपने संपर्क में आए लोगों को भी टीके के लिए प्रेरित करे।
आगरा में सोमवार को अमर उजाला के ‘सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग’ कार्यक्रम के तहत होली पब्लिक स्कूल और होली पब्लिक जूनियर स्कूल में एटा मेडिकल कॉलेज के डॉ. आशीष गौतम और लेडी लॉयल के डॉ. राजेश मिश्रा और काउंसलर रूबी बघेल ने विद्यार्थियों को जागरूक किया। प्रधानाचार्य सोनिका चौहान और गरिमा यादव ने सभी का आभार जताया।
आप सुरक्षित तो सब सुरक्षित
एटा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशीष गौतम ने कहा कि 15 से 18 साल तक के किशोर-किशोरियों का भी टीकाकरण हो रहा है। टीका सिर्फ आपकी ही नहीं अपने परिचितों की सेहत के लिए भी जरूरी है। आप सुरक्षित तो सब सुरक्षित हैं। टीका जरूर करवाएं।
लेडी लॉयल डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि हृदय, कैंसर समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित लोग भी टीकाकरण करा सकते हैं। कई लोगों में इसके बारे में भ्रांतियां हैं। किसी तरह की उलझन होने पर डॉक्टरी परामर्श भी ले सकते हैं। टीका ही बचाव है।
काउंसिलिंग से मान जाते हैं लोग
काउंसलर रूबी बघेल ने कहा कि टीके से बचने के लिए महिलाएं व अन्य लोग तमाम बहाने बनाते हैं। जब उनकी हम काउंसिलिंग करते हैं तो वह टीके के लिए राजी भी हो जाते हैं। अमर उजाला का यह कार्यक्रम बेहद सराहनीय है।
टीके के लिए जागरूक करूंगी
कक्षा 10 के छात्र सूर्यांश माथुर ने कहा कि कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए टीकाकरण किस तरह से सुरक्षा कवच का काम करता है, इसकी डॉक्टरों ने पूरी जानकारी दी। प्रश्न भी पूछे। अपने परिचितों को टीकाकरण के लिए जागरूक करूंगी।
कार्यशालाओं से जागरूक होंगे
12वीं की छात्रा कोमल यादव ने कहा कि अमर उजाला के इस कार्यक्रम से टीकाकरण, कोरोना वायरस समेत अन्य जानकारी मिली। इस तरह की कार्यशालाएं होने से लोग जागरूक होंगे, मैं भी अड़ोस-पड़ोस में टीकाकरण की महत्ता बताऊंगी।
सवाल: टीके के बाद बुखार क्यों आता है?
जवाब: एंटीबॉडी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। जब टीका लगाते हैं तो इससे शरीर का ताप बढ़ जाता है, इससे बुखार आ जाता है। एक-दो दिन में यह ठीक हो जाता है। यह सामान्य है।
सवाल: टीकाकरण के बाद संक्रमित क्यों हुए और मौत क्यों हुईं?
जवाब: टीकाकरण से मर्ज की गंभीरता कम हो जाती है। कई बार लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसकी वजह अन्य बीमारियां हैं। लेकिन तीसरी लहर में कैंसर-टीबी जैसे रोगों से पीड़ित चार-पांच संक्रमितों की ही मौत हुई। टीके कारण लोगों को भर्ती होने की दर भी मामूली रही।
सवाल: कोवाक्सिन और कोविशील्ड में कौन सा टीका सुरक्षित है। देशी-विदेशी टीके में कोई अंतर है?
जवाब: दोनों ही टीके सुरक्षित हैं। उपलब्धता के आधार पर कोई भी लगवा सकते हैं। देशी-विदेशी टीके में कोई अंतर नहीं है।
सवाल: बूस्टर डोज जरूरी है, क्या बार-बार बूस्टर डोज लगवानी पड़ेगी?
जवाब: शरीर में एंटीबॉडी की आपूर्ति के लिए बूस्टर डोज लगवा रहे हैं। दोबारा इसे लगवाने का निर्णय सरकार लेगी।
सवाल: पिछड़े क्षेत्रों में टीकाकरण बढ़ावे के लिए कैसे सहयोग कर सकते हैं?
जवाब: इसकी शुरुआत अपने घर और पड़ोस से कर सकते हैं। अगर कोई ऐसा है, जिसने टीका नहीं लगवाया तो उसके बारे में बता सकते हैं। सब्जी-फल विक्रेता, दूध विक्रेता समेत जिनके संपर्क में आएं, उन्हें टीके का महत्व बता सकते हैं।