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नवजात की मौत: हॉस्पिटल में घरवालों ने किया हंगामा, बोले- सांस थमने के बाद बिल के लिए रचा नाटक

Fri, 15 Dec 2023 02:29 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 15 Dec 2023 02:29 PM IST
सार

परिवार के लोगों का आरोप है कि नवजात की मौत के बाद दो लाख रुपये का बिल जमा कराने के लिए डॉक्टर ने गुमराह किया। नवजात की हालत में सुधार होने की कहते रहे और फिर मौत की सूचना दी। 
 

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doctor misled him to deposit a bill of Rs 2 lakh After death of newborn
हॉस्पिटल में घरवालों ने किया हंगामा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ट्रांस यमुना कॉलोनी फेज-1 स्थित एएस चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई। एनआईसीयू में वह 11 दिन से भर्ती था। शुक्रवार सुबह बच्चे की मौत की जानकारी देने पर परिजन भड़क गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के नाम पर गुमराह करके दो लाख रुपये वसूलने का आरोप लगाकर हंगामा किया। अस्पताल कर्मियों के हाथापाई करने पर लोगों ने सर्विस रोड पर जाम लगा दिया। दो घंटे तक हंगामा चला। पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिजन को शांत कराया। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में मरीज भर्ती करने पर रोक लगा दी।
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बरहन के नगला दयालु निवासी किशनपाल प्राइवेट नौकरी करते हैं। बताया कि 2 दिसंबर को आंवलखेड़ा सीएचसी में पत्नी चांदनी ने बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद नवजात की तबीयत खराब हुई तो उसे ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित एएस अस्पताल में भर्ती कराया। 50 हजार रुपये जमा कराने के बाद एनआईसीयू में इलाज शुरू हुआ। लगातार दवाएं आदि बाहर से मंगवाते रहे। दूसरे अस्पताल भी नहीं ले जाने दिए। 12 की रात अस्पताल स्टाफ ने 1.71 लाख रुपये का बिल थमाया। उन्होंने सुबह तक की मोहलत मांगी, 20 हजार रुपये जमा करवा लिए गए। बच्चे को एक भी बार नहीं देखने दिया। मौत के बाद भी उसे वेंटिलेटर पर रखे रहे। शुक्रवार की सुबह मौत की जानकारी दी।
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मौत की जानकारी देने पर परिजन व ग्रामीणों हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल के स्टाफ से धक्कामुक्की हुई। महिलाओं ने सर्विस रोड पर जाम लगा दिया। गलत इलाज से मौत का आरोप लगाया। पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल बंद कराया और मरीज भर्ती पर रोक लगा दी।
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बिना डाक्टर के एनआईसीयू में हो रहा था इलाज
स्वास्थ्य विभाग की टीम को एएस चिल्ड्रेन हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर बदहाल मिला। यहां एनआईसीयू (नवजात सघन चिकित्सा कक्ष) में बिना चिकित्सक के इलाज चल रहा था। टीम ने पांच नवजातों को शिफ्ट कर मरीज भर्ती पर रोक लगा दी। मरीजों के इलाज के रिकाॅर्ड और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज जब्त की गई। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि नवजात की मौत की जांच के लिए एसीएमओ डॉ. पीयूष जैन और डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति की टीम पहुंची। शुरुआती जांच में लापरवाही मिली है। एनआईसीयू में चिकित्सक नहीं मिले, नवजातों का इलाज चल रहा था। नियमानुसार यहां 24 घंटे चिकित्सक की मौजूदगी जरूरी है। पैरामेडिकल स्टाफ भी चिकित्सकीय डिग्री नहीं दिखा सके। अस्पताल संचालक डॉ. विजय यादव को नोटिस देकर एनओसी, लाइसेंस समेत अन्य रिकाॅर्ड तलब किए हैं। जांच पूरी कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

सरकारी एंबुलेंस से कमीशनखोरी की भी जांच
सीएमओ ने बताया कि सहपऊ निवासी अतुल कुमार ने 108 एंबुलेंस सेवा स्टाफ एसएन इमरजेंसी से नवजात को लेकर एएस चिल्ड्रन हॉस्पिटल में कमीशन के लिए भर्ती कराने की शिकायत की थी। पीड़ित ने यहां शिशु की मौत का भी आरोप लगाया था। अस्पताल का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी बनाई है। अस्पताल के संचालक डॉ. विजय यादव के एटा के जलेसर में एक और अस्पताल संचालन की भी शिकायत है। वहां के सीएमओ से रिपोर्ट मांग रहे हैं।
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