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डीएनए : परीक्षण सात दिन में, इंतजार साल भर का
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 29 May 2016 01:44 AM IST
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डीएनए टेस्ट
- फोटो : Amar Ujala
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प्रदेश की इकलौती लखनऊ लैब में 2500 नमूनों की जांच लंबित
चंद्रमोहन शर्मा
अपराध की उलझी गुत्थियां सुलझाने में प्रदेश की पुलिस डीएनए टेस्ट का सहारा तो ले रही है लेकिन इसका कुछ फायदा नहीं हो पा रहा। वजह है 20 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सिर्फ एक ही लैब में इस टेस्ट की सुविधा होना। आलम यह है कि लखनऊ फोरेंसिक साइंस लैब में 2500 से अधिक नमूनों का परीक्षण लंबित है। अगर यहां कोई केस आज भेजा जाए, तो रिपोर्ट मिलने कम से कम एक साल का समय लगेगा। नमूनो के इस बोझ को देखते हुए शासन ने आगरा और वाराणसी लैब में भी डीएनए यूनिट को मंजूरी दे दी है। इन्हें इसी वर्ष शुरू किए जाने की योजना है। लखनऊ लैब में डीएनए परीक्षण शुरू हुए लगभग दो वर्ष ही हुए हैं। इससे पहले पुलिस चण्डीगढ़ और हैदराबाद में डीएनए टेस्ट कराती थी। लेकिन पुलिस की लैब में यह सुविधा शुरू हो जाने के बाद सभी जिलों से सेंपल यहीं भेजा जाना मजबूरी हो गया है। यहां एक तो वैज्ञानिक कम हैं। दूसरा केस ज्यादा आ रहे हैं। नतीजा नमूनों का अंबार लग गया है। आगरा से भेजे गए तीन केस को छह से आठ महीने हो चुके लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है। इनमें से एक मामला शहर के पाश इलाके खंदारी में मां-बेटी की हत्या का है।
इंसाफ में हो रही देरी
पूरे प्रदेश से डीएनए परीक्षण के लिए सबसे ज्यादा सैंपल रेप केस में भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट में देरी के चलते इंसाफ में देरी हो रही है। दूसरे नंबर पर मामले अज्ञात शवों की सही शनाख्त के लिए भेजे गए हैं। इसके अलावा हत्या में मौके पर अपराधी के बाल या रक्त मिलने के मामले में सेंपल भेजे गए हैं।
सात दिन में हो जाती है जांच
- आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डा. एके मित्तल का कहना है कि ब्लड सेंपल से डीएनए परीक्षण में सात दिन लगते हैं। अगर सेंपल बाल का है, तो इसमें हेयर रूट ली जाती है। इसमें कुछ अधिक समय लगता है। हड्डी के सेंपल में बोन मैरो (अस्थि मज्जा) से परीक्षण होता है। इसमें तीन सप्ताह लग जाते हैं।
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- लखनऊ लैब में 2500 केस लंबित हैं, इसके चलते परीक्षण रिपोर्ट देने में देरी हो रही है। इसी के मद्देनजर आगरा और वाराणसी लैब में जल्द ही डीएनए परीक्षण यूनिट खोले जाने की तैयारी की जा रही है - डा. श्याम बिहारी उपाध्याय ( निदेशक, लखनऊ एफएसएल)
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चंद्रमोहन शर्मा
अपराध की उलझी गुत्थियां सुलझाने में प्रदेश की पुलिस डीएनए टेस्ट का सहारा तो ले रही है लेकिन इसका कुछ फायदा नहीं हो पा रहा। वजह है 20 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सिर्फ एक ही लैब में इस टेस्ट की सुविधा होना। आलम यह है कि लखनऊ फोरेंसिक साइंस लैब में 2500 से अधिक नमूनों का परीक्षण लंबित है। अगर यहां कोई केस आज भेजा जाए, तो रिपोर्ट मिलने कम से कम एक साल का समय लगेगा। नमूनो के इस बोझ को देखते हुए शासन ने आगरा और वाराणसी लैब में भी डीएनए यूनिट को मंजूरी दे दी है। इन्हें इसी वर्ष शुरू किए जाने की योजना है। लखनऊ लैब में डीएनए परीक्षण शुरू हुए लगभग दो वर्ष ही हुए हैं। इससे पहले पुलिस चण्डीगढ़ और हैदराबाद में डीएनए टेस्ट कराती थी। लेकिन पुलिस की लैब में यह सुविधा शुरू हो जाने के बाद सभी जिलों से सेंपल यहीं भेजा जाना मजबूरी हो गया है। यहां एक तो वैज्ञानिक कम हैं। दूसरा केस ज्यादा आ रहे हैं। नतीजा नमूनों का अंबार लग गया है। आगरा से भेजे गए तीन केस को छह से आठ महीने हो चुके लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है। इनमें से एक मामला शहर के पाश इलाके खंदारी में मां-बेटी की हत्या का है।
इंसाफ में हो रही देरी
पूरे प्रदेश से डीएनए परीक्षण के लिए सबसे ज्यादा सैंपल रेप केस में भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट में देरी के चलते इंसाफ में देरी हो रही है। दूसरे नंबर पर मामले अज्ञात शवों की सही शनाख्त के लिए भेजे गए हैं। इसके अलावा हत्या में मौके पर अपराधी के बाल या रक्त मिलने के मामले में सेंपल भेजे गए हैं।
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सात दिन में हो जाती है जांच
- आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डा. एके मित्तल का कहना है कि ब्लड सेंपल से डीएनए परीक्षण में सात दिन लगते हैं। अगर सेंपल बाल का है, तो इसमें हेयर रूट ली जाती है। इसमें कुछ अधिक समय लगता है। हड्डी के सेंपल में बोन मैरो (अस्थि मज्जा) से परीक्षण होता है। इसमें तीन सप्ताह लग जाते हैं।
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- लखनऊ लैब में 2500 केस लंबित हैं, इसके चलते परीक्षण रिपोर्ट देने में देरी हो रही है। इसी के मद्देनजर आगरा और वाराणसी लैब में जल्द ही डीएनए परीक्षण यूनिट खोले जाने की तैयारी की जा रही है - डा. श्याम बिहारी उपाध्याय ( निदेशक, लखनऊ एफएसएल)