आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कॉपियों में अदला-बदली और गड़बड़ियों की समस्या को खत्म करने के लिहाज से अब छात्रों की कॉपियों डिजिटल मूल्यांकन किया जा रहा है। कंप्यूटर से कॉपियों को स्कैन करने के बाद परीक्षक से सीधे भेजी जा रही हैं। जो कि कंप्यूटर से ही चेक की जाएंगी। जिससे मूल्यांकन में भेदभाव और नंबरों की गलतियों की गुंजाइश भी नहीं रहेगी।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि में कॉपियों के मूल्यांकन, अंकों में गड़बड़ी और परीक्षा परिणाम में गलतियों की शिकायत लेकर अक्सर छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय के चक्कर लगाते नजर आते हैं। एनईपी के तहत विगत परीक्षाएं भी ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट पर कराई गईं थीं। जिन्हें जांचने का काम भी डिजिटल रूप में ही किया जाता है। विवि में पहली बार बीसीए, बीबीए, एमसीए, बीएएमएस,बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एक्ग्रीकल्चर के छात्रों की कॉपियाें का डिजिटल मूल्यांकन कराया जा रहा है। इसके लिए खंदारी परिसर के कंप्यूटर साइंस और आईटी कैंपस समेत दो केंद्र बनाए गए हैं। जिनके प्रभारी डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. मनुप्रताप हैं। परीक्षा नियंत्रक ओम प्रकाश ने बताया कि इस पायलट प्रोजक्ट के तहत कॉपियों की अंकों की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। आगामी समय बीए और एमए के छात्रों की कॉपियाें का मूल्यांकन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिजिटल मूल्यांकन का कार्य पिछले सप्ताह से शुरू हो चुका है। 15 दिनों में मूल्यांकन कार्य समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सभी विषयों के परीक्षाफल घोषित कर दिए जाएंगे।