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Agra News: बोलने-निगलने और सांस लेने में तकलीफ, एसएन में बची जान
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आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी विभाग में गिलियन-बैरे सिंड्रोम की बीमारी से जूझ रहे मरीज ठीक हो गए हैं। इनको करीब दो सप्ताह भर्ती रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. नवनीत अग्रवाल ने बताया कि बीते दो सप्ताह पहले 65 साल के बुजुर्ग सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में संचालित ओपीडी में दिखाने आए। इनके हाथ-पैर कमजोर थे, सांस नहीं ले पा रहे थे। बोलने-निगलने में दिक्कत हो रही थी। इनको आईसीयू में भर्ती किया गया। इनको गिलियन-बैरे सिंड्रोम की परेशानी मिली है। ये न्यूरोलॉजिकल विकार है।
उन्हें पांच दिन इंजेक्शन दिए गए। अन्य उपचार भी हुआ। आईसीयू के प्रभारी डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल ने बताया कि मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया, जीवन रक्षक दवाएं भी दीं। सात दिन के बाद मरीज की हालत में सुधार होने पर सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के बनने से अति गंभीर रोगों का भी उपचार और सर्जरी हो रही है।
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न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. नवनीत अग्रवाल ने बताया कि बीते दो सप्ताह पहले 65 साल के बुजुर्ग सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में संचालित ओपीडी में दिखाने आए। इनके हाथ-पैर कमजोर थे, सांस नहीं ले पा रहे थे। बोलने-निगलने में दिक्कत हो रही थी। इनको आईसीयू में भर्ती किया गया। इनको गिलियन-बैरे सिंड्रोम की परेशानी मिली है। ये न्यूरोलॉजिकल विकार है।
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उन्हें पांच दिन इंजेक्शन दिए गए। अन्य उपचार भी हुआ। आईसीयू के प्रभारी डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल ने बताया कि मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया, जीवन रक्षक दवाएं भी दीं। सात दिन के बाद मरीज की हालत में सुधार होने पर सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के बनने से अति गंभीर रोगों का भी उपचार और सर्जरी हो रही है।
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