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मौसम की मारः जिला अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या
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मैनपुरी। मौसम में हुए परिवर्तन से बीमारियों का ग्राफ भी बढ़ रहा है। रविवार को जिला अस्पताल पहुंचे दो वृद्ध मरीजों की निमोनिया से पीड़ित होने पर मौत हो गई जबकि नौ अन्य मरीजों को गंभीर हालत में मिनी पीजीआई सैफई रेफर किया गया है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 44 मरीजों को भर्ती कराया जिनमें से 22 सर्दी की बीमारी से पीड़ित थे। छह बच्चों व तीन बुजुर्ग मरीजों को निमोनिया से पीड़ित होने पर गंभीर हालत में मिनी पीजीआई सैफई रेफर किया। गांव नगला पाली निवासी 65 वर्षीय रामदेवी और फर्रुखाबाद के थाना नवाबगंज के गांव सिनोहा निवासी 70 वर्षीय विटोला देवी की निमोनिया से पीड़ित होने पर जिला अस्पताल में मौत हो गई।
- बलगम वाली खांसी आना
- बुखार कंपकपी के साथ पसीना आना
- भूख कम लगना
- सांस लेने में तकलीफ
- कम रक्तचाप
- खांसी में खून आना
- धड़कन की तेजी
-मतली और उल्टी आना
-जरा भी दिक्कत होने पर वैक्सीन लें
-अपने हाथों को नियमित रूप से साफ करें
- पर्याप्त नींद लें
-नियमित रूप से व्यायाम करें
-विटामिन युक्त भोजन ग्रहण करें
बदलते मौसम में बचाव ही एक सबसे बड़ा उपचार है। इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखा जाए। उपचार में देरी मरीज के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
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डॉ. जेजे राम, वरिष्ठ फिजीशियन
जिन दो मरीजों की इमरजेंसी में मौत हुई उनकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। परिजनों ने अस्पताल लाने में देरी की। समय से अस्पताल पहुंचे होते तो उनकी जान बच सकती थी।
डॉ. आरके सिंह, प्रभारी सीएमएस
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 44 मरीजों को भर्ती कराया जिनमें से 22 सर्दी की बीमारी से पीड़ित थे। छह बच्चों व तीन बुजुर्ग मरीजों को निमोनिया से पीड़ित होने पर गंभीर हालत में मिनी पीजीआई सैफई रेफर किया। गांव नगला पाली निवासी 65 वर्षीय रामदेवी और फर्रुखाबाद के थाना नवाबगंज के गांव सिनोहा निवासी 70 वर्षीय विटोला देवी की निमोनिया से पीड़ित होने पर जिला अस्पताल में मौत हो गई।
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- बलगम वाली खांसी आना
- बुखार कंपकपी के साथ पसीना आना
- भूख कम लगना
- सांस लेने में तकलीफ
- कम रक्तचाप
- खांसी में खून आना
- धड़कन की तेजी
-मतली और उल्टी आना
-जरा भी दिक्कत होने पर वैक्सीन लें
-अपने हाथों को नियमित रूप से साफ करें
- पर्याप्त नींद लें
-नियमित रूप से व्यायाम करें
-विटामिन युक्त भोजन ग्रहण करें
बदलते मौसम में बचाव ही एक सबसे बड़ा उपचार है। इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखा जाए। उपचार में देरी मरीज के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
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डॉ. जेजे राम, वरिष्ठ फिजीशियन
जिन दो मरीजों की इमरजेंसी में मौत हुई उनकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। परिजनों ने अस्पताल लाने में देरी की। समय से अस्पताल पहुंचे होते तो उनकी जान बच सकती थी।
डॉ. आरके सिंह, प्रभारी सीएमएस