10 लीटर पेट्रोल से तीन बार में जलाया था युवक का शव, फिर जलाईं थीं अगरबत्तियां
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आगरा की किरावली तहसील के कर्मचारी धर्मेंद्र तिवारी की अपने घर में हत्या करने के बाद तीनों आरोपी उसके शव के साथ छह दिन तक रहे। दस लीटर पेट्रोल लाकर शव को तीन दिन में थोड़ा-थोड़ा फूंका।
बदबू को रोकने के लिए 700 रुपये की अगरबत्ती जलाडालीं। घर में रखी धूपबत्ती भी लगातार जलती रही। पड़ोसियों को भनक न लगने पाए, इसके लिए सुबह-शाम तेज आवाज में टीवी पर आरती चलाते थे।
अपनी बर्बरता की जानकारी हत्यारोपी ललित किशोर भदौरिया, उसके चचेरे भाई अरुण मेंगोलिया, मां शलिनी ने पुलिस पूछताछ में दी है। पुलिस ने बताया कि अछनेरा निवासी धर्मेंद्र तिवारी का अपहरण ललित और अरुण ने 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए किया था।
दोनों की धर्मेंद्र से पहले से पहचान थी। ललित पहले अछनेरा में ही रहता था। अपहरण की साजिश के तहत 18 अक्तूबर की दोपहर को ललित अरुण केसाथ स्कूटी से किरावली तहसील पहुंच गया। अरुण दूर खड़ा रहा।
धर्मेंद्र से ललित ने कहा, वह बालाजी से लौट रहा है, पर्स चोरी हो गया है। उसे उसके घर तक छोड़ दे। धर्मेंद्र राजी हो गया। ललित उसे निखिल मेंगोलिया, ग्रीन पिंक सिटी, शाहगंज स्थित अपने घर ले आया।
अरुण स्कूटी से पीछे चलता रहा। घर पर ललित की मां शामिनी ने धर्मेंद्र से कहा कि उसने बेटे की मदद की है, कॉफी पीकर जाना। ललित ने कॉफी में नींद की तीन गोलियां मिला दीं। इससे वह गहरी नींद में चला गया।
मुंह के साथ नाक बंद की, दम घुटने से मौत
पुलिस ने बताया कि 18 अक्तूबर की रात नौ बजे ललित ने धर्मेंद्र के नींद की हालत में ही चौड़ी वाली टेप से हाथ और पैर बांध दिए। अरुण मुंह पर टेप लगा रहा था। उसने नाक पर भी टेप लगा दी। इससे धर्मेंद्र की सांस बंद हो गई। दम घुटने से उसकी जान चली गई। इसका पता चलते ही शव ठिकाने लगाने की साजिश पर काम शुरू हुआ।
तीन दिन रजाई में बंद रखा शव, चौथे दिन से फूंका
शव पर एक रजाई लपेटी और घर में रखी धूपबत्ती हर कोने में जला दी गई। ललित 700 रुपये की अगरबत्ती ले आया। कमरे में रूम फ्रेशनर का स्प्रे करता रहा। तीन दिन (18, 19 और 20 अक्तूबर) इसी में बीत गए कि शव का क्या किया जाए? चौथे दिन 21 अक्तूबर को साजिश बनी, इसे जला दिया जाए। इस पर ललित 10 लीटर पेट्रोल खरीदकर लाया। इससे शव को फूंका गया।
पहले दिन पैर, दूसरे दिन धड़ और तीसरे दिन सिर फूंका
पहले दिन 21 अक्तूबर को धर्मेंद्र के शव के निचला हिस्सा फूंका गया। पैर जलने के बाद आग धड़ तक पहुंचते ही बुझा दी गई। ऐसा इसलिए किया, ताकि बदबू न फैले। एक साथ शव जलाते तो आग, धुएं या बदबू से पड़ोसियों को पता चल सकता था। दूसरे दिन 22 को धड़ का हिस्सा फूंका और फिर आग बुझा दी। तीसरे दिन 23 को शेष हिस्सा फूंक दिया।
छठे दिन नाले में फेंक दी हड्डियां
शव जल चुका था। सिर्फ हड्डियां बची थीं। छठे दिन ही यानी 23 अक्तूबर की देर रात हड्डियों को एक चादर में रखा। पहले शालिनी के घर के बाहर जाकर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा। इसकेबाद ललित और अरुण स्कूटी से हड्डियों को बिचपुरी नाले में फेंक आए।
बीएससी पास हैं आरोपी
ललित मूल रूप से जैतपुर का रहने वाला है। काफी समय अछनेरा में रहा है। कुछ समय से ग्रीन-पिंक सिटी, शाहगंज में रह रहा है। वह बीएससी (बायो) किए हुए है। फार्मा कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर रहा है। उसका चचेरा भाई अरुण उर्फ दीपक पुत्र राकेश कुमार, रुनकता का रहने वाला है। वह बीएससी (मैथमेटिक्स) पास है। ललित के घर में वह और मां शालिनी ही हैं।