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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Devutthana Ekadashi will be celebrated on November 1st in Ravi Yoga, Dhruva Yoga and Hans Mahapurusha Raja Yoga.

Agra News: देवोत्थान एकादशी पर्व 1 नवंबर को रवि योग, धुव्र योग और हंस महापुरुष राजयोग में मनेगा

Thu, 30 Oct 2025 11:31 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 11:31 PM IST
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Devutthana Ekadashi will be celebrated on November 1st in Ravi Yoga, Dhruva Yoga and Hans Mahapurusha Raja Yoga.
फोटो03पंड़ित भरत राम गौड़।संवाद
कासगंज। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी या देवोत्थान एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु चार महीनों की योग निद्रा से जागते हैं। भगवान विष्णु के जागने के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है और सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि पुनः प्रारंभ हो जाते हैं। पंडित भरतराम गौड़ ने बताया कि एकादशी पर्व 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर आरंभ होगी, जो 2 नवंबर को शाम 7 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगाी। ऐसे में गृहस्थ लोग 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखेंगे।
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उन्होंने बताया कि इस दिन रवि योग, धुव्र योग और हंस महापुरुष राजयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। शास्त्रों में देवउठनी एकादशी पर तुलसी-शालिग्राम विवाह का भी विशेष महत्व माना जाता है। देवोत्थान पर तुलसी विवाह कराने पर साधक को कन्यादान के समान फल प्राप्त होता है।
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देवउठनी एकादशी पूजा- विधि
कासगंज। देवउठनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद गन्नों से मंडप तैयार करें। इसमें चौक बनाकर उसके बीच में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। विष्णु जी के चरण चिह्न भी बनाए जाते हैं। इस दिन भगवान को गन्ना, सिंघाड़ा, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु की आराधना करें। पूजा के समय विष्णु चालीसा, एकादशी व्रत कथा, श्री विष्णु स्तोत्र और विष्णु मंत्रों का पाठ करना शुभ माना जाता है। अंत में आरती करें और किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
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