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Agra News: तुलसी के प्राकट्य की कथा सुन मुग्ध हुए श्रद्धालु
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आगरा। श्री बालाजी धाम आश्रम दयालबाग में श्री शिव महापुराण कथा चल रही है। बृहस्पतिवार को छठवें दिन कथा व्यास अभिषेक भैया ने वृंदा सती, तुलसी प्राकट्य, जालंधर वध और रुद्रावतार हनुमानजी की कथा सुनाई। तुलसी प्रकाट्य और हनुमान जन्म का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मुग्ध हो उठे। कथावाचक ने बताया कि दैत्यराज जलंधर की पत्नी वृंदा विष्णु भक्त और पतिव्रता थीं। उनके सतीत्व के प्रभाव से जलंधर अजेय बना हुआ था। देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा की तपस्या भंग की। सत्य का पता चलने पर क्रोधित वृंदा ने भगवान विष्णु को शालिग्राम रूप में पत्थर होने का श्राप दिया। इसके उपरांत वह स्वयं तुलसी के रूप में प्रकट हुईं। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि उनके बिना कोई भी भोग या प्रसाद स्वीकार नहीं करेंगे, तभी से माता तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। कथा में संत अरविंद महाराज की विशेष उपस्थिति रही। मुख्य यजमान पवन अग्रवाल और पूनम अग्रवाल रहे। आश्रम से जुडे़ अनूप कुमार बंसल ने बताया कि शुक्रवार को भगवान शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंग की कथा सुनाई जाएगी। ब्यूरो
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आगरा। श्री बालाजी धाम आश्रम दयालबाग में श्री शिव महापुराण कथा चल रही है। बृहस्पतिवार को छठवें दिन कथा व्यास अभिषेक भैया ने वृंदा सती, तुलसी प्राकट्य, जालंधर वध और रुद्रावतार हनुमानजी की कथा सुनाई। तुलसी प्रकाट्य और हनुमान जन्म का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मुग्ध हो उठे। कथावाचक ने बताया कि दैत्यराज जलंधर की पत्नी वृंदा विष्णु भक्त और पतिव्रता थीं। उनके सतीत्व के प्रभाव से जलंधर अजेय बना हुआ था। देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा की तपस्या भंग की। सत्य का पता चलने पर क्रोधित वृंदा ने भगवान विष्णु को शालिग्राम रूप में पत्थर होने का श्राप दिया। इसके उपरांत वह स्वयं तुलसी के रूप में प्रकट हुईं। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि उनके बिना कोई भी भोग या प्रसाद स्वीकार नहीं करेंगे, तभी से माता तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। कथा में संत अरविंद महाराज की विशेष उपस्थिति रही। मुख्य यजमान पवन अग्रवाल और पूनम अग्रवाल रहे। आश्रम से जुडे़ अनूप कुमार बंसल ने बताया कि शुक्रवार को भगवान शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंग की कथा सुनाई जाएगी। ब्यूरो