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Agra: आरटीओ के सॉफ्टवेयर में नहीं है पांच लाख डीएल का ब्योरा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान 

Tue, 28 Jun 2022 10:51 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 28 Jun 2022 10:51 AM IST
सार

आरटीओ के सॉफ्टवेयर में पांच लाख डीएल का ब्योरा नहीं है। यही कारण है कि वर्ष 1998 से 2008 तक बनाए गए डीएल कभी फर्जी निकलते हैं तो कभी उनकी फीस जमा नहीं मिलती है। 
 

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Details of five lakh DL are not in RTO software
ड्राइविंग लाइसेंस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा। आरटीओ में करीब पांच लाख ड्राइविंग लाइसेंस का ब्योरा अभी तक ऑनलाइन नहीं हैं। पांच साल पहले पुराने ड्राइविंग लाइसेंस को ऑनलाइन दर्ज कराने का काम शुरू किया गया था। पर, छह माह बाद ही यह बंद हो गया। यही कारण है कि वर्ष 1998 से 2008 तक बनाए गए डीएल कभी फर्जी निकलते हैं तो कभी उनकी फीस जमा नहीं मिलती। 

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आगरा आरटीओ से जारी किया गया आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर का ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी निकलने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ड्राइविंग लाइसेंस के स्मार्ट कार्ड बनाने और ऑनलाइन रिकॉर्ड रखने का काम वर्ष 2010 से शुरू हुआ था। इसके पहले सभी लाइसेंस डायरी या एंबोस कार्ड के रूप में लोगों के पास हैं। आरटीओ से जारी पुराने ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण या उनके गुम होने पर डुप्लीकेट आवेदन करने पर रजिस्टरों की तलाश की जाती है। न मिलने पर आवेदक चक्कर काटते रहते हैं।
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एआरटीओ प्रशासन एके सिंह ने बताया कि पूर्व में मैनुअल तरीके से बनाए गए ड्राइविंग लाइसेंस का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया गया था, लेकिन अब यह कार्य बंद है। ऐसे में 15 फीसदी लाइसेंस ऐसे हैं, जिनका ऑनलाइन रिकॉर्ड आरटीओ में दर्ज नहीं है। चेकिंग के दौरान भी फर्जी लाइसेंस का सत्यापन करना टेढ़ी खीर होता है। 

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दुर्घटना में क्लेम में भी दिक्कत

एआरटीओ वंदना सिंह का कहना है कि सड़क दुर्घटना में मृत्यु या घायल होने पर अदालत के लिए जब ड्राइविंग लाइसेंस को सत्यापन के लिए भेजा जाता है तो काफी लाइसेंस फर्जी निकलते हैं। ऐसे लोगों को दुर्घटना में जनहानि या क्षति होने के बाद भी क्लेम नहीं मिल पाता है। इसलिए लोगों को अपने ड्राइविंग लाइसेंस को सुरक्षित रखना चाहिए। 

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