{"_id":"5af6d44e4f1c1be1408b4a34","slug":"demand-for-removal-of-silt-from-yamuna-edge","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ताजमहल को बेदाग रखने के लिए अंग्रेजों का ये फॉर्मूला आया याद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ताजमहल को बेदाग रखने के लिए अंग्रेजों का ये फॉर्मूला आया याद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 12 May 2018 05:17 PM IST
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ताजमहल
ताजमहल पर कीड़ों का हमला लगातार जारी है। तीन साल से कीड़ों की संख्या और हरे दाग के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। ऐसा यमुना नदी में प्रदूषण बढ़ने के कारण हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन दागों के लिए एएसआई को फटकारने के बाद यमुना नदी में डी-सिल्टिंग की मांग अब जोर पकड़ रही है। ताज से लेकर कैलाश घाट तक यमुना में डी-सिल्टिंग की मांग उठ रही है।
अंग्रेजी हुकूमत ताजमहल के लिए फिक्रमंद रही है। हर साल यमुना में एएसआई डी-सिल्टिंग कराती थी। 1936-37 के इस दुर्लभ फोटो में सैकड़ों मजदूर ताजमहल के पीछे से यमुना से सिल्ट निकालते दिख रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन दागों के लिए एएसआई को फटकारने के बाद यमुना नदी में डी-सिल्टिंग की मांग अब जोर पकड़ रही है। ताज से लेकर कैलाश घाट तक यमुना में डी-सिल्टिंग की मांग उठ रही है।
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अंग्रेजी हुकूमत ताजमहल के लिए फिक्रमंद रही है। हर साल यमुना में एएसआई डी-सिल्टिंग कराती थी। 1936-37 के इस दुर्लभ फोटो में सैकड़ों मजदूर ताजमहल के पीछे से यमुना से सिल्ट निकालते दिख रहे हैं।
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ताजमहल
देश आजाद होने के बाद सरकारों ने लापरवाही की चादर ओढ़ ली। यही वजह रही कि यमुना में सिल्ट बढ़ती गई। अब ताज के पीछे करीब 24 फुट तक सिल्ट जमा है।
ताजमहल के पास दशहरा घाट की तरह कई सीढ़ियां यमुना की ओर थीं, जहां से कभी मुगल शहंशाह ताज में प्रवेश करते थे। मगर, डीसिल्टिंग न होने से यह सीढ़ियां सिल्ट के नीचे दबती गईं।
यहां सीढ़ियों के साथ बसई घाट और दशहरा घाट की ओर के दरवाजे भी आधे सिल्ट में दब चुके हैं। एएसआई ने 15 साल पहले इसी सिल्ट पर पार्क बना दिया, जिस पर पर्यावरणविद और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी।
ताजमहल के पास दशहरा घाट की तरह कई सीढ़ियां यमुना की ओर थीं, जहां से कभी मुगल शहंशाह ताज में प्रवेश करते थे। मगर, डीसिल्टिंग न होने से यह सीढ़ियां सिल्ट के नीचे दबती गईं।
यहां सीढ़ियों के साथ बसई घाट और दशहरा घाट की ओर के दरवाजे भी आधे सिल्ट में दब चुके हैं। एएसआई ने 15 साल पहले इसी सिल्ट पर पार्क बना दिया, जिस पर पर्यावरणविद और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी।
एमसी मेहता के डर से चलाया बुलडोजर
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल के पास ताज टैनरी के पीछे यमुना नदी की सफाई के लिए नगर निगम ने बुलडोजर और सौ सफाईकर्मी लगाए थे। पर्यावरणविद और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता एमसी मेहता के आने से पहले निगम ने यह सफाई कराई थी।
अन्य दिनों में जब शहर के लोग सफाई की मांग करते हैं तो ताज के पास 500 मीटर में डीजल वाहन का बहाना बनाकर अफसर उसे टाल देते हैं, जबकि दस दिन पहले उन्होंने टैनरी के पास सफाई कराई है जो प्रतिबंधित दायरे के अंदर है।
नेशनल चेंबर के अध्यक्ष राजवी तिवारी टीटीजेड की बैठक में यमुना की डी-सिल्टिंग पर फैसला हो चुका है, ड्रेजर भी आया, लेकिन उसे अन्य शहरों को भेज दिया गया। ताज के पीछे गंदगी और दलदल को डी-सिल्टिंग कर हटाना जरूरी है।
अन्य दिनों में जब शहर के लोग सफाई की मांग करते हैं तो ताज के पास 500 मीटर में डीजल वाहन का बहाना बनाकर अफसर उसे टाल देते हैं, जबकि दस दिन पहले उन्होंने टैनरी के पास सफाई कराई है जो प्रतिबंधित दायरे के अंदर है।
नेशनल चेंबर के अध्यक्ष राजवी तिवारी टीटीजेड की बैठक में यमुना की डी-सिल्टिंग पर फैसला हो चुका है, ड्रेजर भी आया, लेकिन उसे अन्य शहरों को भेज दिया गया। ताज के पीछे गंदगी और दलदल को डी-सिल्टिंग कर हटाना जरूरी है।