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Agra News: ‘ईश्वर को पाने के लिए समर्पण और संयम जरूरी’
Fri, 08 May 2026 02:29 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 08 May 2026 02:29 AM IST
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बाह के खेडा देवीदास गांव में शिव महापुराण कथा
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बाह में शिव महापुराण में उमड़ा भक्ति का सैलाब, माता पार्वती की तपस्या और शिव के योगेश्वर स्वरूप का हुआ वर्णन
बाह। भूतेश्वर महादेव मंदिर खेडा देवीदास पर बृहस्पतिवार को शिव महापुराण कथा का प्रवचन करते हुए सुदर्शन महाराज ने कहा कि शिव पुराण से विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस्य रखने की सीख मिलती है। उन्होंने भक्तों को दिखावे से दूर सच्ची भक्ति का मार्ग बताया।
सुदर्शन महाराज ने बताया कि भगवान शिव को प्राप्त करने हेतु माता पार्वती ने घोर तपस्या की। यह इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर को पाने के लिए मनुष्य को समर्पण, साधना और संयम का मार्ग अपनाना होता है। माता भवानी ने भगवान शिव से कहा कि कर्म की शक्ति ही प्रकृति कहलाती है। इसी से सृष्टि की उत्पत्ति, पालन तथा संहार होता है। प्राणी मात्र प्रकृति के प्रभाव से ही ईश्वर की उपासना, अर्चना और ध्यान करते हैं। योगेश्वर भगवान शिव ने गिरिराज हिमालय और माता पार्वती की इच्छा का सम्मान किया। उन्होंने उन्हें अपनी सेवा में स्थान दिया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य का परम कर्तव्य ईश्वर की आराधना एवं साधना करना है। महाराज ने यह भी बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर से प्राप्त शक्ति और प्रेरणा को अपने जीवन में उतारना चाहिए। यही सच्चा धर्म और जीवन की दिशा है। कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा। श्रोताओं ने कथा के दिव्य प्रसंगों में भावविभोर होकर भक्ति रस का आनंद लिया।
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बाह। भूतेश्वर महादेव मंदिर खेडा देवीदास पर बृहस्पतिवार को शिव महापुराण कथा का प्रवचन करते हुए सुदर्शन महाराज ने कहा कि शिव पुराण से विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस्य रखने की सीख मिलती है। उन्होंने भक्तों को दिखावे से दूर सच्ची भक्ति का मार्ग बताया।
सुदर्शन महाराज ने बताया कि भगवान शिव को प्राप्त करने हेतु माता पार्वती ने घोर तपस्या की। यह इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर को पाने के लिए मनुष्य को समर्पण, साधना और संयम का मार्ग अपनाना होता है। माता भवानी ने भगवान शिव से कहा कि कर्म की शक्ति ही प्रकृति कहलाती है। इसी से सृष्टि की उत्पत्ति, पालन तथा संहार होता है। प्राणी मात्र प्रकृति के प्रभाव से ही ईश्वर की उपासना, अर्चना और ध्यान करते हैं। योगेश्वर भगवान शिव ने गिरिराज हिमालय और माता पार्वती की इच्छा का सम्मान किया। उन्होंने उन्हें अपनी सेवा में स्थान दिया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य का परम कर्तव्य ईश्वर की आराधना एवं साधना करना है। महाराज ने यह भी बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर से प्राप्त शक्ति और प्रेरणा को अपने जीवन में उतारना चाहिए। यही सच्चा धर्म और जीवन की दिशा है। कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा। श्रोताओं ने कथा के दिव्य प्रसंगों में भावविभोर होकर भक्ति रस का आनंद लिया।
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