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पहले कुदरत का कहर, अब प्रश्ाासन का

Fri, 12 Jun 2015 02:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला,आगरा Updated Fri, 12 Jun 2015 02:28 AM IST
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Debt collection from farmers
बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से बर्बाद हो चुके किसानों पर अब सरकारी मशीनरी का कहर टूट रहा है। प्रदेश सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए सहकारी समितियों के कर्मचारी किसानों पर वसूली के लिए दबाव बना रहे हैं। कई किसानों को तो धमकाकर पैसा भी वसूल लिया है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है।
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पिछले महीनों में हुई बरसात और ओलावृष्टि ने गेंहू और सरसों की फसल को तबाह कर दिया है। आलू किसानों को उनकी लागत का भी मूल्य नहीं मिल रहा है। किसान मुआवजे को भटक रहे हैं लेकिन सरकारी मदद नहीं पहुंची है। ऐसे हालात में प्रदेश सरकार ने किसानों से किसी भी प्रकार की ऋण वसूली को फिलहाल स्थगित करने के आदेश दिए थे। सभी बैंकों, सहकारी सहमतियों पर यह आदेश लागू था। लेकिन सहकारी समितियों के कर्मचारी ऋण वसूली को किसानों पर दबाव बना रहे हैं।
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बरौली अहीर ब्लाक के गुतिला गांव के किसान कीरतराम का कहना है कि पिछले दिनों सहकारी समिति के लोग आए और 30 हजार रुपये बकाए के भुगतान का दबाव बनाया। भुगतान न करने पर खाद की आपूर्ति रोकने की धमकी दी। इधर-उधर से पैसा लेकर करीब 10 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। फतेहपुर सीकरी के पतसाल गांव के माखन सिंह ने बताया कि उनके गांव में सोसाइटी के कर्मचारी किसानों को धमका रहे हैं। किसान नेता मोहन चाहर ने बताया कि अछनेरा, कुकथला, अरसेना, रायभा सोसाइटी के  लोग भी गांव के चक्कर काट रहे हैं। उनके सचिवों का कहना है कि उन्हें तीन से चार लाख वसूली का लक्ष्य दिया गया है।
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मुआवजे के लिए भटक रहे किसान
जिले के किसानों की आर्थिक दशा किसी से छुपी नहीं है, लेकिन सहकारी समितियों को यह नजर नहीं आ रहा है। राजस्व विभाग ने जिले के किसानों के नुकसान का आकलन करीब 1,59,24,88,860 रुपये भेजा है। इसके सापेक्ष अभी तक करीब 49,35,19,000 रुपये ही जिले किसानों को मुआवजा मिला है। पिछले वर्ष के सूखा राहत के करीब 42.86 करोड़ रुपये अभी तक राजस्व विभाग के पास ही धूल फांक रहे हैं, लेकिन किसानों को बांटे नहीं गए हैं। किसान के पास अगली फसल बोने तो छोड़िए पेट भरने तक के लाले पड़ गए है।
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समितियों ने कर दिया गोलमाल
सहकारी समितियां किसानों पर ऋण अदायगी का दबाव तो बना रही हैं, लेकिन फतेहपुर सीकरी के सामरा और जाजौली समिति तो इससे भी एक कदम आगे हैं। किसान नेता मोहन चाहर का कहना है कि वहां के करीब 60-70 किसानों को खाद की आपूर्ति किए बिना ही उनके खाते में खाद का पैसा दर्शा दिया है। अब किसानों को धमकाया जा रहा है।


किसानों से किसी भी प्रकार की ऋण वसूली शासन के आदेश पर स्थगित की गई है। यदि कोई संस्था किसानों पर ऋण अदायगी के लिए दबाव बना रही है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एआर कोआपरेटिव को भी ताकीद कर दिया गया है कि किसानों से वसूली नहीं होगी।
- पंकज कुमार, जिलाधिकारी
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