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डेथ वारंट देख सलीम ने लिख दी दया याचिका
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 25 May 2015 02:25 AM IST
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सेंट्रल जेल में बंद बावनखेड़ी नरसंहार के गुनाहगार सलीम को उसकी मृत्यु होने तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश रविवार को उसके पास पहुंच गया। यह देखते ही उसकी पहले से खराब हालत और बिगड़ गई। उसने तुरंत एक कागज लिया और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नाम दया याचिका लिख डाली। लेकिन थोड़ी देर बाद उसे पता चला कि उसे अभी फांसी नहीं दी जा सकती है क्योंकि डेथ वारंट में तारीख और जगह नहीं लिखी है। इस पर उसने दया याचिका जेल प्रशासन को नहीं दी। जेल अधिकारियों ने उसे बताया कि वह जेल प्रशासन के अलावा अपने वकील के माध्यम से भी इसे राष्ट्रपति के पास भिजवा सकता है।
अदालत ने चार दिन पहले उसके साथ ही अमरोहा जेल में बंद प्रेमिका शबनम का भी डेथ वारंट जारी किया था। इसे अमरोहा जेल प्रशासन ने यह कहते हुए लौटा दिया था कि इसमें फांसी देने का स्थान और तारीख नहीं लिखी है। इस पर जज ने उन जेलों के नाम पूछे थे, जहां पर फांसी दिए जाने की व्यवस्था है। अब आगरा सेंट्रल जेल का प्रशासन भी यही करेगा।
जेल सूत्रों ने बताया कि कोर्ट को ऐसी सभी जेलों के नाम भेजे जाएंगे, जिनमें फांसीघर बने हुए हैं। आगरा सेंट्रल जेल में फांसी दिए जाने का इंतजाम नहीं है, लेकिन आगरा जिला जेल में फांसीघर है। इनके अलावा मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, मथुरा का नाम भी भेजा जाएगा। जेलर रत्नाकर सिंह का कहना है कि सलीम को बता दिया गया है कि वह दया याचिका अपने वकील या जेल प्रशासन के माध्यम से भिजवा सकता है। उधर, डेथ वारंट देखने के बाद सलीम बहुत परेशान नजर आ रहा है। उसे तीन दिन पहले ही अखबार के माध्यम से इस आदेश का पता चल गया था।
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अदालत ने चार दिन पहले उसके साथ ही अमरोहा जेल में बंद प्रेमिका शबनम का भी डेथ वारंट जारी किया था। इसे अमरोहा जेल प्रशासन ने यह कहते हुए लौटा दिया था कि इसमें फांसी देने का स्थान और तारीख नहीं लिखी है। इस पर जज ने उन जेलों के नाम पूछे थे, जहां पर फांसी दिए जाने की व्यवस्था है। अब आगरा सेंट्रल जेल का प्रशासन भी यही करेगा।
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जेल सूत्रों ने बताया कि कोर्ट को ऐसी सभी जेलों के नाम भेजे जाएंगे, जिनमें फांसीघर बने हुए हैं। आगरा सेंट्रल जेल में फांसी दिए जाने का इंतजाम नहीं है, लेकिन आगरा जिला जेल में फांसीघर है। इनके अलावा मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, मथुरा का नाम भी भेजा जाएगा। जेलर रत्नाकर सिंह का कहना है कि सलीम को बता दिया गया है कि वह दया याचिका अपने वकील या जेल प्रशासन के माध्यम से भिजवा सकता है। उधर, डेथ वारंट देखने के बाद सलीम बहुत परेशान नजर आ रहा है। उसे तीन दिन पहले ही अखबार के माध्यम से इस आदेश का पता चल गया था।
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