{"_id":"634528f53d0b28645e68e591","slug":"deadly-attack-on-mulayam-singh-yadav-in-1980-karahal-mainpuri","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mulayam Singh Yadav: पहली बार एमएलसी बनकर मैनपुरी आए 'नेताजी' पर हुई थी गोलियों की बौछार, बाल-बाल बचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mulayam Singh Yadav: पहली बार एमएलसी बनकर मैनपुरी आए 'नेताजी' पर हुई थी गोलियों की बौछार, बाल-बाल बचे
Tue, 11 Oct 2022 01:57 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 11 Oct 2022 01:57 PM IST
सार
जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हारने के बाद मुलायम सिंह यादव एमएलसी बनकर विधान परिषद में नेता विपक्ष बने। तीन मार्च 1984 को वह थाना कुर्रा क्षेत्र के गांव मई खेड़ा में रामेश्वर सिंह की बेटी की में बराती के रूप में आए थे, तभी ये घटना हुई।
विज्ञापन
मुलायम सिंह यादव से जुड़ीं यादें।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का जैसे-जैसे राजनीति में कद बढ़ा, वैसे-वैसे उनके दुश्मन भी बढ़े। वर्ष 1984 में करहल क्षेत्र में जानलेवा हमला करके गोलियों की बौछार की गई। जानलेवा हमले में मुलायम सिंह यादव बच गए।
बात वर्ष 1980 की है, जब जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हारने के बाद मुलायम सिंह यादव एमएलसी बनकर विधान परिषद में नेता विपक्ष बने। तीन मार्च 1984 को वह थाना कुर्रा क्षेत्र के गांव मई खेड़ा में रामेश्वर सिंह की बेटी की में बराती के रूप में आए थे। रात 10 बजे एंबेसडर कार में बैठकर मुलायम सिंह यादव करहल की तरफ चल दिए। उनके साथ करहल के नेता रामेश्वर दयाल यादव और बच्ची लाल यादव भी थे।
ये भी पढ़ें - Mulayam Singh Yadav: विरोधियों पर भी थे ‘मुलायम’, भीड़ में पहचान लेते थे पुराने साथियों को
विज्ञापन
कार पर हुई गोलियों की बौछार एंबेसडर कार सरकारी थी और चालक भी सरकारी। कार मई खेड़ा से बंबा की पटरी होकर गांव अंबरपुर के सामने पहुंची। वहां आम के बाग में छिपे बदमाशों ने कार पर फायरिंग शुरू कर दी। नेत्रपाल सिंह यादव घायल हुए। छोटेलाल की मौके पर ही मौत हो गई। नेताजी कार के अंदर झुक गए। गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। फायरिंग करने वाले बदमाश मौके से भाग गए। उसी कार से नेताजी इटावा रात को ही चले गए थे। बाद में नेताजी नेत्रपाल सिंह यादव से मिलने आगरा के अस्पताल में भी गए थे।
विज्ञापन
बात वर्ष 1980 की है, जब जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हारने के बाद मुलायम सिंह यादव एमएलसी बनकर विधान परिषद में नेता विपक्ष बने। तीन मार्च 1984 को वह थाना कुर्रा क्षेत्र के गांव मई खेड़ा में रामेश्वर सिंह की बेटी की में बराती के रूप में आए थे। रात 10 बजे एंबेसडर कार में बैठकर मुलायम सिंह यादव करहल की तरफ चल दिए। उनके साथ करहल के नेता रामेश्वर दयाल यादव और बच्ची लाल यादव भी थे।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - Mulayam Singh Yadav: विरोधियों पर भी थे ‘मुलायम’, भीड़ में पहचान लेते थे पुराने साथियों को
विज्ञापन
कार पर हुई गोलियों की बौछार एंबेसडर कार सरकारी थी और चालक भी सरकारी। कार मई खेड़ा से बंबा की पटरी होकर गांव अंबरपुर के सामने पहुंची। वहां आम के बाग में छिपे बदमाशों ने कार पर फायरिंग शुरू कर दी। नेत्रपाल सिंह यादव घायल हुए। छोटेलाल की मौके पर ही मौत हो गई। नेताजी कार के अंदर झुक गए। गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। फायरिंग करने वाले बदमाश मौके से भाग गए। उसी कार से नेताजी इटावा रात को ही चले गए थे। बाद में नेताजी नेत्रपाल सिंह यादव से मिलने आगरा के अस्पताल में भी गए थे।