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UP: परिजनों के इंतजार में रखी रही बस के खालसी की लाश, तीसरे दिन हो पाया पोस्टमार्टम; सड़क हादसे में गई थी जान
Sat, 21 Jun 2025 10:21 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 21 Jun 2025 10:21 AM IST
सार
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस हादसे में जिस खालसी की मौत हो गई, उसकी लाश परिजनों के इंतजार में तीन दिन रखी रही। परिवार के लोग आए, तब पोस्टमार्टम हो सका।
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मृतक का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर स्लीपर बस दुर्घटना में मृत चालक के साथी का पोस्टमार्टम तीसरे दिन हो पाया। इसके बाद परिजन शव लेकर बिहार चले गए।
राजीव उर्फ राजू(30) बिहार के अररिया जिले के गांव कुसमोल का निवासी था। परिवार में पत्नी विभा और पांच वर्षीय बेटा दिपांशु हैं। भाई संजीव ने बताया कि राजीव बस पर खलासी का काम करता था। बुधवार रात को पुलिस ने फोन पर सूचना दी थी। शुक्रवार को आगरा पहुंचकर शव की शिनाख्त की। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया।
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राजीव उर्फ राजू(30) बिहार के अररिया जिले के गांव कुसमोल का निवासी था। परिवार में पत्नी विभा और पांच वर्षीय बेटा दिपांशु हैं। भाई संजीव ने बताया कि राजीव बस पर खलासी का काम करता था। बुधवार रात को पुलिस ने फोन पर सूचना दी थी। शुक्रवार को आगरा पहुंचकर शव की शिनाख्त की। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया।
आगरा -लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर महालक्ष्मी स्लीपर कोच की बस दिल्ली से बिहार के लिए जा रही थी। उसमें 60 सवारियां थी। मंगलवार रात को फतेहाबाद टोल प्लाजा के पास वह पत्थर से लदे ट्रेलर में पीछे से घुस गई थी। जिसमें चालक और उसके साथी की मौत हो गई थी। करीब 34 सवारियां घायल हुई थीं।
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बस मालिक ने नहीं दी सूचना
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में मृतक चालक और उसके साथी की शिनाख्त दूसरे दिन देर रात तक हो पाई। बस मालिक ने पुलिस का सहयोग नहीं किया। पुलिस ने राजीव का पता करने में लगभग 24 घंटे का समय लग गया। उन्होंने घायल एक-एक सवारी से पूछताछ कर किसी तरह राजीव के परिजन का पता किया। तब जाकर परिजन को सूचना दी। वह शुक्रवार को आगरा आए और शव का पोस्टमार्टम हो सका।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में मृतक चालक और उसके साथी की शिनाख्त दूसरे दिन देर रात तक हो पाई। बस मालिक ने पुलिस का सहयोग नहीं किया। पुलिस ने राजीव का पता करने में लगभग 24 घंटे का समय लग गया। उन्होंने घायल एक-एक सवारी से पूछताछ कर किसी तरह राजीव के परिजन का पता किया। तब जाकर परिजन को सूचना दी। वह शुक्रवार को आगरा आए और शव का पोस्टमार्टम हो सका।