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CBSE 12th Result 2022: पापा का साथ छूटा, तंगी ने रास्ता रोका, फिर भी नहीं टूटा हौसला

Sat, 23 Jul 2022 02:04 PM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 23 Jul 2022 02:04 PM IST
सार

परिवार पर विपदा आई तो बेटियों ने ट्यूशन भी पढ़ाई, लेकिन खुद की पढ़ाई नहीं छोड़ी। हाईस्कूल-इंटरमीडिएट में सफलता हासिल करने वाली इन बेटियों का कहना है कि अपने पिता का सपना पूरा करेंगी।
 

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daughters succeeded in 10th and 12th CBSE examination Struggling with financial crisis
तनु, पलक और शिवांगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई का 10वीं और 12वीं का परिणाम जारी हो गया है। ऐसे में उन बेटियों की कहानी सामने आई जिनकी पढ़ाई के बीच पिता का साथ छूट गया। पिता के जाने से मानो उनकी दुनिया ही उजड़ गई। आर्थिक संकट आया, लगा कि अब स्कूल से नाता टूट जाएगा। प्रतिकूल परिस्थिति में बेटियों ने हिम्मत नहीं हारी। मन मजबूत किया, मां को भी संभाला। पढ़ाई जारी रखी। खर्चे की बात आई तो ट्यूशन पढ़ाया। सपने पूरे करने के लिए बेटियों ने संघर्ष किया। हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में उन्होंने अच्छे अंकों के साथ सफलता पाई है।    

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ट्यूशन पढ़ाकर भरी फीस, 90 फीसदी अंक पाए

कमला नगर की तनु शर्मा ने पिता भूपेंद्र कुमार को खो दिया। तीन छोटे भाई-बहन हैं, आर्थिक स्थिति देख लगा कहीं पढ़ाई बीच में न छूट जाए। मां शैलजा और परिजनों ने सहयोग किया। 11वीं तक बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया, फीस और अन्य खर्चे उठाए। तनु बोलीं कि पिता की यादों के सहारे मन लगाकर पढ़ाई की और 90.60 फीसदी अंकों से गणेशराम नागर सरस्वती विद्या मंदिर से इंटर पास किया। 

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मां ने साड़ी बेची, पर नहीं रुकने दी पढ़ाई

कर्मयोगी फव्वारा की पलक जलान ने सेंट एंड्ऱज स्कूल सेे 80 फीसदी अंकों से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। पलक ने बताया कि पिता अविनाश जलान का दो साल पहले देहांत हो गया था। मां प्रीति ने दो बहन और एक भाई की परवरिश के लिए साड़ी की दुकान खोली, कोरोना में ये भी बंद करनी पड़ी। घर से ही साड़ी बेचकर परिवार पाला, पढ़ाई भी नहीं रुकने दी। 

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परीक्षा देकर आई तो पता चला पिता नहीं रहे

खंदौली की शिवांगी गुप्ता ने इंटरमीडिएट में 83.6 फीसदी अंक पाए हैं। उन्होंने बताया कि मां रजनी शिक्षामित्र हैं। बीते मार्च में प्रयोगात्मक परीक्षा देकर घर पहुंची तो पता चला कि पिता अजय गुप्ता नहीं रहे। मां और छोटी बहन आर्शी का रो-रोकर बुरा हाल था। सदमे से महीने भर तक पढ़ाई नहीं कर सकीं। आर्थिक हालात खराब हुए तो जरूरत पर ट्यूशन भी पढ़ाया।  

पिता चलाते हैं ऑटो, बेटी ने पाये 80 फीसदी अंक

ट्रांस यमुना कॉलोनी की प्रीति खन्ना ने विपरीत हालातों में वनस्थली स्कूल से इंटरमीडिएट में 80 फीसदी अंक पाए हैं। उनके पिता अजय खन्ना ऑटो चलाते हैं और महीने में सात-आठ हजार रुपये ही कमा पाते हैं। घर में दो छोटी बहन हैं। मां अंजू गृहणी हैं। रुपयों की किल्लत होने लगी तो ट्यूशन पढ़ना शुरू कर दिया। पढ़ाई नहीं रुकने दी।

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