{"_id":"616595978ebc3ed0952842a3","slug":"dasharatha-gave-up-his-life-in-the-loss-of-shri-ram-mainpuri-news-agr511175769","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीराम के व्योग में दशरथ ने त्यागे तड़प तड़प कर प्रांण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीराम के व्योग में दशरथ ने त्यागे तड़प तड़प कर प्रांण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आगरा रोड रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में मंगलवार को केवट संवाद, दशरथ मरण और चित्रकूट में भरत मिलाप लीला का मंचन किया गया। वन गमन पदयात्रा का शुभारंभ भीमसेन मंदिर से पं. शील नामाचार्य और साहेबलाल तिवारी ने भगवान के स्वरूपों का पूजन और आरती उतारकर कराया।
भगवान राम लक्ष्मण और सीता के साथ वन गमन के क्रम में मंदिर भीमसेन जी महाराज से पद यात्रा के रूप में निकले। यह पद यात्रा मुकुट बिहारी रोड होती हुई, करहल रोड, बड़ा चौराहा, डाकखाना चौराहा, घंटाघर चौराहा, कटरा मोहल्ला होती हुई मोहल्ला मिश्राना स्थित विजय कुमार सराफ के आवास पर पहुंची। यहां भगवान के स्वरूपों की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद वन जाते समय गंगा नदी को पार करने के लिए केवट से अनुरोध करते हैं। केवट भगवान राम को पहचान जाता है और उनके चरणों को धोकर पानी पीकर अपना परलोक सुधारने के बाद ही राम को गंगा पार कराता है। इधर अयोध्या में राम, लक्ष्मण और सीता के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। ननिहाल से भरत और शत्रुघ्न को बुलाया जाता है। भरत को जब सारी घटना की जानकारी होती है तो वह राम को वापस लाने वन की ओर प्रस्थान करते हैं। चित्रकूट में राम और भरत का मिलन होता है भरत के काफी अनुनय विनय के बाद भी भगवान राम वापस अयोध्या जाने को तैयार नहीं होते तब राम की खड़ाऊं लेकर वापस अयोध्या लौटते हैं।
इस दौरान पं. जगन्नाथ मिश्रा, विजय कुमार सराफ, सुरेश चंद्र बीनू बंसल, रमेश चंद्र सराफ, वीर सिंह भदौरिया, अशोक गुप्ता पप्पू, सौरभ सराफ, अजय गुप्ता, प्रशोत मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
भगवान राम लक्ष्मण और सीता के साथ वन गमन के क्रम में मंदिर भीमसेन जी महाराज से पद यात्रा के रूप में निकले। यह पद यात्रा मुकुट बिहारी रोड होती हुई, करहल रोड, बड़ा चौराहा, डाकखाना चौराहा, घंटाघर चौराहा, कटरा मोहल्ला होती हुई मोहल्ला मिश्राना स्थित विजय कुमार सराफ के आवास पर पहुंची। यहां भगवान के स्वरूपों की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद वन जाते समय गंगा नदी को पार करने के लिए केवट से अनुरोध करते हैं। केवट भगवान राम को पहचान जाता है और उनके चरणों को धोकर पानी पीकर अपना परलोक सुधारने के बाद ही राम को गंगा पार कराता है। इधर अयोध्या में राम, लक्ष्मण और सीता के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। ननिहाल से भरत और शत्रुघ्न को बुलाया जाता है। भरत को जब सारी घटना की जानकारी होती है तो वह राम को वापस लाने वन की ओर प्रस्थान करते हैं। चित्रकूट में राम और भरत का मिलन होता है भरत के काफी अनुनय विनय के बाद भी भगवान राम वापस अयोध्या जाने को तैयार नहीं होते तब राम की खड़ाऊं लेकर वापस अयोध्या लौटते हैं।
विज्ञापन
इस दौरान पं. जगन्नाथ मिश्रा, विजय कुमार सराफ, सुरेश चंद्र बीनू बंसल, रमेश चंद्र सराफ, वीर सिंह भदौरिया, अशोक गुप्ता पप्पू, सौरभ सराफ, अजय गुप्ता, प्रशोत मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन