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पेड़ों पर आरी, पर्यावरण पर भारी
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 07 May 2016 02:12 AM IST
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ताजमहल में पेड़
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
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बेतहाशा पेड़ों की कटाई शहर के पर्यावरण के लिए खतरा बन गई है। खतरा भी कम नहीं है। हवा तो इतनी जहरीली हो गई कि सांस लेने लायक भी नहीं रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर की हवा फेफड़ों और दिल की बीमारियों को भी न्यौता देने वाली है।
सीपीसीबी ने ताजमहल, एत्मादद्दौला, रामबाग और नुनिहाई स्थित अपने स्टेशनों पर वायु प्रदूषण की जांच के बाद हाल ही में अप्रैल की एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) जारी की है, जो चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक्यूआई 209 है। जबकि मार्च में यह 158 था। विभाग ने महीने तक इन स्टेशनों पर हवा में एसओटू, एनओटू, पीएम 10, पीएम 2.5 और एसपीएम का आकलन किया था। इनके आधार पर तय एक्यूआई के अनुसार, शहर की हवा को ‘पूअर’ (खराब) श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी की हवा सांस लेने लायक नहीं होती। यह बच्चों के साथ-साथ युवाओं और बुजुर्गों के फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचा सकती है। फरवरी में हवा इससे भी ज्यादा दूषित थी। इस महीने का एक्यूआई 307 था, जोकि ‘वेरी फुअर’ (अति खराब) श्रेणी में था। यह हवा बीमार कर देने वाली थी।
एमसी मेहता की रिपोर्ट से वन विभाग में हड़कंप
शहर की हवा ऐसे ही दूषित नहीं हुई। प्रदूषण तो लगातार बढ़ ही रहा है, इसकी रोकथाम के प्राकृतिक उपायों पर भी आरी चलाई जा रही है। इसका उदाहरण बाबरपुर और ताजमहल के आसपास काटे गए साढ़े दस हजार से अधिक पेड़ हैं। ये पेड़ किसी और ने नहीं बल्कि वन विभाग के अधिकारियों ने ही कटवाए। पर्यावरणविद एमसी मेहता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को इस संबंध में अपनी रिपोर्ट देकर इस आरोप पर मुहर लगा दी है। बता दें कि गुरुवार को एनजीटी में बाबरपुर और ताज के आसपास पेड़ों की कटाई के संबंध में सुनवाई थी। इसी दौरान एमसी मेहता ने अपनी 16 पेज की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत की थी। इसमें कहा गया कि ताज वन ब्लॉक में साढ़े तीन हजार और बाबरपुर में सात हजार पेड़ काटे गए। इस रिपोर्ट ने तत्कालीन डीएफओ एनके जानू की मुसीबत बढ़ा दी है। बता दें कि एमसी मेहता से पहले मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने इसी संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सरकार को हिला दिया था। बाद में प्रदेश सरकार ने इससे इनकार कर दिया था। इसके बाद ही एनजीटी ने एमसी मेहता को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर इस मामले की जांच कराई थी।
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बिल्डर को पहुंचाया लाभ
बाबरपुर में पेड़े ऐसे ही नहीं काटे गए। दरअसल, यहां एक बिल्डर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बना रहा है। इसी को लाभ पहुंचाने के लिए सात हजार से अधिक पेड़ों की बलि चढ़ाई गई। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ही बिल्डर का साथ दिया।
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सीपीसीबी ने ताजमहल, एत्मादद्दौला, रामबाग और नुनिहाई स्थित अपने स्टेशनों पर वायु प्रदूषण की जांच के बाद हाल ही में अप्रैल की एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) जारी की है, जो चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक्यूआई 209 है। जबकि मार्च में यह 158 था। विभाग ने महीने तक इन स्टेशनों पर हवा में एसओटू, एनओटू, पीएम 10, पीएम 2.5 और एसपीएम का आकलन किया था। इनके आधार पर तय एक्यूआई के अनुसार, शहर की हवा को ‘पूअर’ (खराब) श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी की हवा सांस लेने लायक नहीं होती। यह बच्चों के साथ-साथ युवाओं और बुजुर्गों के फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचा सकती है। फरवरी में हवा इससे भी ज्यादा दूषित थी। इस महीने का एक्यूआई 307 था, जोकि ‘वेरी फुअर’ (अति खराब) श्रेणी में था। यह हवा बीमार कर देने वाली थी।
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एमसी मेहता की रिपोर्ट से वन विभाग में हड़कंप
शहर की हवा ऐसे ही दूषित नहीं हुई। प्रदूषण तो लगातार बढ़ ही रहा है, इसकी रोकथाम के प्राकृतिक उपायों पर भी आरी चलाई जा रही है। इसका उदाहरण बाबरपुर और ताजमहल के आसपास काटे गए साढ़े दस हजार से अधिक पेड़ हैं। ये पेड़ किसी और ने नहीं बल्कि वन विभाग के अधिकारियों ने ही कटवाए। पर्यावरणविद एमसी मेहता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को इस संबंध में अपनी रिपोर्ट देकर इस आरोप पर मुहर लगा दी है। बता दें कि गुरुवार को एनजीटी में बाबरपुर और ताज के आसपास पेड़ों की कटाई के संबंध में सुनवाई थी। इसी दौरान एमसी मेहता ने अपनी 16 पेज की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत की थी। इसमें कहा गया कि ताज वन ब्लॉक में साढ़े तीन हजार और बाबरपुर में सात हजार पेड़ काटे गए। इस रिपोर्ट ने तत्कालीन डीएफओ एनके जानू की मुसीबत बढ़ा दी है। बता दें कि एमसी मेहता से पहले मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने इसी संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सरकार को हिला दिया था। बाद में प्रदेश सरकार ने इससे इनकार कर दिया था। इसके बाद ही एनजीटी ने एमसी मेहता को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर इस मामले की जांच कराई थी।
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बिल्डर को पहुंचाया लाभ
बाबरपुर में पेड़े ऐसे ही नहीं काटे गए। दरअसल, यहां एक बिल्डर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बना रहा है। इसी को लाभ पहुंचाने के लिए सात हजार से अधिक पेड़ों की बलि चढ़ाई गई। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ही बिल्डर का साथ दिया।