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Cyber Crime: इंडो-नाईजीरियन गैंग पकड़ा, फर्जी बेवसाइट से करते थे ठगी, कमाए करोड़ों

Fri, 14 Aug 2020 09:47 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 14 Aug 2020 09:47 AM IST
सार

बरामद हुआ लैपटॉप, एटीएम कार्ड और स्वाइप मशीन के साथ कई बैंक पासबुक

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Cyber Cell Arrested Nigerian Cyber Gang Crime News
साइबर रेंज थाना ने पकड़ा गैंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रेंज साइबर सेल ने ठगों के ऐसे गिरोह को पकड़ा है जिसने दस साल में दस हजार से ज्यादा लोगों से लगभग 250 करोड़ की ठगी की है। इसकी जानकारी गिरोह के सदस्य के लैपटॉप से मिली है।
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यह नाइजीरियन गैंग है जिसके सदस्य फेसबुक पर विदेशी महिला मित्र बनकर और गूगल पर बीमा कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करते हैं। आगरा के पूर्व फौजी प्रताप सिंह से 1.32 करोड़ रुपये ठग लिए थे। गिरोह का सरगना जॉन स्टेनले अभी पुलिस के हाथ नहीं आया है।
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गिरोह ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश के लोगों के साथ ठगी की है। गिरोह के  गिरफ्तार चार सदस्यों में एक नाइजीरियन, जबकि तीन भारतीय हैं। आईजी ए सतीश गणेश ने बताया कि वेस्ट अर्जुन नगर स्थित लक्ष्मण नगर निवासी प्रताप सिंह को बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर नाइजीरियन गैंग ने उनसे अपने खातों में 1.34 करोड़ रुपये जमा करा लिए गए थे। उन्होंने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। इस पर जांच की गई। इसमें यह खुलासा हुआ।

फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल से फंसाते हैं जाल में
आईजी ने बताया कि गिरोह के सदस्य फेसबुक पर महिला या युवती बनकर दोस्ती करते हैं। खुद को यूएस की रहने वाली बताते हैं।
कुछ दिन बातचीत करते हैं, जब कोई फंस जाए तो उसे ठग लेते हैं।

1. महंगा गिफ्ट भेजने की बात करते हैं। बाद में कॉल करते हैं कि एयरपोर्ट पर गिफ्ट आ गया है, लेकिन कस्टम की वजह से फंसा है। टैक्स अदा करने पर मिल जाएगा। लोगों के रकम जमा करते ही मोबाइल बंद कर लेते हैं।

2. इसके अलावा मिलने आने के बहाने एयरपोर्ट पर महंगे गिफ्ट के साथ पकड़े जाने की बात कहते हैं। फिर बताते हैं कि अगर एक्साइज ड्यूटी दे दी जाए तो गिफ्ट छूट जाएगा। झांसे में आने वाले से पैसा जमा करा लेते हैं। झारखंड के एक व्यक्ति से इसी तरह ठगी की गई। 20 लाख रुपये जमा करा लिए गए थे।

3. विभिन्न निजी और सरकारी संस्थाओं की फर्जी वेबसाइट बनाकर रखते हैं। जब लोग वेबसाइट पर सर्च करते हैं। उनसे ई मेल के माध्यम से खाते की जानकारी लेते हैं। इसके बाद कॉल करके खातों में रकम जमा कराते हैं। जिन खातों में रकम जमा होती थी, उनको किराए पर लिया जाता था।

4. बीमा कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। इसमें ऑफर देते हैं। जो लालच में फंसा और पॉलिसी कराई, उसका पैसा खाते में जमा कराकर हड़प लेते हैं।

पहले पॉलिसी के नाम पर ठगा, फिर रकम दिलाने के
वेस्ट अर्जुन नगर स्थित लक्ष्मण नगर निवासी प्रताप सिंह की वर्ष 2015 में एक बीमा एजेंट ने बीमा पालिसी की थीं। उनको पालिसी बांड भी भेजे। यह सब फोन पर और ऑनलाइन हुआ था। 30 लाख प्रीमियम देने के बाद बंद कर दिया। उन्हें मालूम नहीं था कि यह पॉलिसी फर्जी है, पैसा नाइजीरियन गैंग के खाते में गया है। थोड़े दिन बाद जमा रकम को वापस लेने के लिए प्रताप सिंह ने बीमा कंपनियों की वेबसाइट सर्च करना शुरू कर दिया।

मार्च 2017 में उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वालों ने अपना नाम जगदीश नेगी और राजीव शुक्ला बताए। खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। कहा कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है।

पालिसी फर्जी थीं। गैंग को हमने पकड़ा है। बाद में बताया कि सभी पालिसियों का पैसा वापस करा दिया जाएगा। रकम पांच करोड़ की बताई। लालच दिया कि इनका बचा हुआ प्रीमियम देने पर यह पूरी रकम खातों में भेज दी जाएगी। उनसे 95 लाख रुपये जमा करा लिए। इसके बाद प्रताप सिंह का नंबर ब्लाक कर दिया।

इनकी हुई गिरफ्तारी
गुड्स टाइम संडे उर्फ बेंशन निवासी रावारी कालोनी पाठाकोट, रोइवर स्टेट, नाइजीरिया। हाल पता स्ट्रीट फ्लैट नंबर 30 फर्स्ट फ्लोर वाटिका मानेसर रोड, सेक्टर 82/83 गुरुग्राम। तरुण यादव निवासी सेक्टर एक, वसुंधरा, गाजियाबाद। आसिफ निवासी महमूद नगर, अकबरपुर गहरा, थाना असमौली, संभल। जसपाल निवासी नवाबपुरा, भूलेश्वर, थाना नखाशा, संभल हैं।

ये हैं फरार: जॉन स्टेनले निवासी नाइजीरिया हाल पता नई दिल्ली (सरगना), डिक्सन उर्फ स्मॉल   वीटा इनलॉ, फ्रांसिस, स्टाइलिश बैंशन निवासी नई दिल्ली।

यह हुई बरामदगी
तीन लैपटॉप, पीओएस स्वैप मशीन, 24 मोबाइल, 75 बैंक पासबुक, 40 एटीएम कार्ड, 24 चेकबुक, तीन इंटरनेट डिवाइस, दो हाईपावर हार्ड डिस्क, तरुण यादव के 14 आईडी, एक डायरी (जिस पर सैकड़ों खाता धारकों का विवरण है)। लैपटॉप में कई साफ्टवेयर अपलोड हैं, जिनके बारे में रेंज साइबर सेल की टीम जानकारी जुटा रही है।
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