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फसल बीमा योजना : जिम्मेदारों की बेरुखी से विमुख हो रहे किसान
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कासगंज। दैवीय आपदाओं के दौरान किसानों के लिए संकट मोचक करार दी गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। इस योजना के फायदे तो बहुत हैं, लेकिन किसानों को इसकी जानकारी नहीं है और जो किसान जानकारी कर बीमा कराते हैं, उनसे प्रीमियम वसूलने के बाद कंपनी के अफसर गायब हो जाते हैं। पिछले दो सालों की तुलना में किसानों की संख्या में तेजी के साथ कमी आई है।
कृषि विभाग में ढाई लाख से अधिक किसान पंजीकरण करा चुके हैं। लेकिन वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से दूरी बनाए रहते हैं। रबी फसलों का बीमा कराने का अंतिम समय 31 दिसंबर तक था, लेकिन निर्धारित समय गुजरने तक खास रुचि बीमा कराने में किसानों ने नहीं दिखाई। पिछले साल 4300 किसानों ने अभियान के दौरान बीमा कराया था। जबकि इस साल मात्र ढाई हजार किसान ही बीमा करा पाए हैं। इस तरह एक ही अभियान में एक साल में 1800 किसानों ने बीमा योजना से मोहभंग कर लिया। प्रत्येक सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के किसानों में कमी होती जा रही है। वर्ष 2019 तक जिले में हर साल 14000 किसान से अधिक किसान अपनी फसलों का बीमा कराते थे। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि किसानों को जानकारी का ही अभाव हो, बल्कि जिम्मेदार भी इस ओर प्रीमियम लेने के बाद बेरुख हो जाते हैं और बीमा कराने वाले किसानों को नुकसान की एवज बीमा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता।
पिछले दिनों हुए नुकसान की भी औपचारिकता
पिछले दिनों जिले में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। कृषि विभाग ने माना कि कुल 4-5 गांव में ही फसलों में नुकसान हुआ है और इन गांव में मात्र 15 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने फसल बीमा कराया है। उसमें भी यह देखना है कि इन किसानों ने बीमा के लिए अधिसूचित फसल गेहूं, आलू और सरसों की फसल तैयार की है या नहीं। और यदि तैयार की है तो कितने हेक्टेयर में कितना नुकसान है। ऐसे में माना जा रहा है कि शायद ही किसी किसान को बीमा कंपनी लाभ दे।
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यह है जिले में अधिसूचित फसलों की बीमित राशि और प्रीमियम
फसल बीमित राशि प्रीमियम राशि (प्रति हेक्टेअर)
गेहूं 72145 1082.18
सरसो ं 85969 1289.54
आलू 14800 7400
वर्ष 2016 में शुरू हुई थी योजना
जिले में गंगानदी में बाढ़ से एक बड़ा क्षेत्रफल प्रभावित होता है। बारिश से भी किसानों की फसलें डूब जाती हैं। ऐसे में वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। इस योजना के तहत खेत स्वामी किसानों के साथ साथ बटाईदार व सहखाते धारकों को भी लाभ देने की व्यवस्था है।
इन परिस्थितियों में मिलता है बीमा-
- मौसम के प्रतिकूल होने पर फसलों की बुवाई न कर पाने पर।
- फसल की प्राकृतिक आपदा में होने वाले नुकसान पर।
- फसलों की कटाई के बाद खेतों में रखी फसल में बेमौसम बारिश और चक्रवात से नुकसान पर।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की संख्या में हर साल कमी आ रही है। किसानों को इस योजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पिछले साल बीमा कंपनी ने 4300 किसानों का बीमा कराया और 136 लाख रुपये प्रीमियम के रूप में लिए। बीमित किसानों में से 1330 किसानों को नुकसान के आकलन के आधार पर लाभान्वित भी किया गया। - सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।
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कृषि विभाग में ढाई लाख से अधिक किसान पंजीकरण करा चुके हैं। लेकिन वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से दूरी बनाए रहते हैं। रबी फसलों का बीमा कराने का अंतिम समय 31 दिसंबर तक था, लेकिन निर्धारित समय गुजरने तक खास रुचि बीमा कराने में किसानों ने नहीं दिखाई। पिछले साल 4300 किसानों ने अभियान के दौरान बीमा कराया था। जबकि इस साल मात्र ढाई हजार किसान ही बीमा करा पाए हैं। इस तरह एक ही अभियान में एक साल में 1800 किसानों ने बीमा योजना से मोहभंग कर लिया। प्रत्येक सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के किसानों में कमी होती जा रही है। वर्ष 2019 तक जिले में हर साल 14000 किसान से अधिक किसान अपनी फसलों का बीमा कराते थे। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि किसानों को जानकारी का ही अभाव हो, बल्कि जिम्मेदार भी इस ओर प्रीमियम लेने के बाद बेरुख हो जाते हैं और बीमा कराने वाले किसानों को नुकसान की एवज बीमा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता।
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पिछले दिनों हुए नुकसान की भी औपचारिकता
पिछले दिनों जिले में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। कृषि विभाग ने माना कि कुल 4-5 गांव में ही फसलों में नुकसान हुआ है और इन गांव में मात्र 15 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने फसल बीमा कराया है। उसमें भी यह देखना है कि इन किसानों ने बीमा के लिए अधिसूचित फसल गेहूं, आलू और सरसों की फसल तैयार की है या नहीं। और यदि तैयार की है तो कितने हेक्टेयर में कितना नुकसान है। ऐसे में माना जा रहा है कि शायद ही किसी किसान को बीमा कंपनी लाभ दे।
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यह है जिले में अधिसूचित फसलों की बीमित राशि और प्रीमियम
फसल बीमित राशि प्रीमियम राशि (प्रति हेक्टेअर)
गेहूं 72145 1082.18
सरसो ं 85969 1289.54
आलू 14800 7400
वर्ष 2016 में शुरू हुई थी योजना
जिले में गंगानदी में बाढ़ से एक बड़ा क्षेत्रफल प्रभावित होता है। बारिश से भी किसानों की फसलें डूब जाती हैं। ऐसे में वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। इस योजना के तहत खेत स्वामी किसानों के साथ साथ बटाईदार व सहखाते धारकों को भी लाभ देने की व्यवस्था है।
इन परिस्थितियों में मिलता है बीमा-
- मौसम के प्रतिकूल होने पर फसलों की बुवाई न कर पाने पर।
- फसल की प्राकृतिक आपदा में होने वाले नुकसान पर।
- फसलों की कटाई के बाद खेतों में रखी फसल में बेमौसम बारिश और चक्रवात से नुकसान पर।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की संख्या में हर साल कमी आ रही है। किसानों को इस योजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पिछले साल बीमा कंपनी ने 4300 किसानों का बीमा कराया और 136 लाख रुपये प्रीमियम के रूप में लिए। बीमित किसानों में से 1330 किसानों को नुकसान के आकलन के आधार पर लाभान्वित भी किया गया। - सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।