फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   young man committed suside due to note ban

नोटबंदी: भूख से बिलखे बच्चे, युवक ने लगाई फांसी

Sat, 17 Dec 2016 12:54 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sat, 17 Dec 2016 12:54 AM IST
विज्ञापन
young man committed suside due to note ban
अात्‍महत्‍या - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
नोटबंदी के बाद काम धंधा नहीं मिलने से परेशान जूता कारीगर हरीभान सिंह ने घर में फांसी लगा ली। घर में उधारी से राशन आ रहा था लेकिन तीन दिन से वह भी बंद हो गया। घर में चूल्हा तक नहीं जला था। परिवार पाई-पाई के लिए मोहताज हो गया था। इससे आहत होकर ही हरीभान ने यह कदम उठाया।
विज्ञापन

जीवनी मंडी स्थित नगला परमा निवासी हरीभान सिंह (22) पुत्र स्व. महेंद्र सिंह घर का इकलौता कमाने वाला था। वह जूता कारखाने में काम करता था। उसके पड़ोसी दिलीप ने बताया कि पुराने 500 और एक हजार के नोट बंद होने के बाद हरीभान सिंह बेरोजगार हो गया। कारखाने में काम बंद हो गया था। हरीभान की मां श्यामवती और बहन अंजू है। वहीं बड़े भाई वेदप्रकाश की कुछ महीने पहले मौत हो गई थी। उसकी पत्नी पिंकी और चार बच्चों की जिम्मेदारी भी हरीभान पर ही आ गई। हरीभान नौकरी की तलाश कर रहा था। परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। वह घर का राशन भी दुकान से उधार ला रहा था। तीन दिन पहले से दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया। इसके चलते घर में चूल्हा तक नहीं जला। गुरुवार रात को मासूम भतीजों को भूख से बिलखता देखकर हरिभान काफी आहत हुआ। शुक्रवार सुबह परिवारीजनों ने उसका शव दुपट्टे से फंदे पर लटका देखा तो चीख निकल गई। परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। इंस्पेक्टर छत्ता थाना का कहना है कि युवक ने आर्थिक तंगी में फांसी लगाई है।
विज्ञापन


अंतिम संस्कार के लिए मोहल्ले के लोगों ने किया चंदा
परिवारीजनों पर इतनी रकम भी नहीं थी कि हरीभान के शव का अंतिम संस्कार कर सकें। इस पर मोहल्ले के लोगों ने चंदा करके रकम जुटाई। इसके बाद ही अंतिम संस्कार किया जा सका। परिवार के लिए भोजन का भी बंदोबस्त किया गया। पार्षद धर्म सिंह ने बताया कि नोटबंदी के बाद से कई मजदूर परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कारीगरों को काम तक नहीं मिल रहा है। हरीभान ने भी इसी परेशानी के चलते यह कदम उठाया। उसके परिवार को 10 लाख रुपये की सरकार की ओर से आर्थिक सहायता की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन


छह महीने पहले रेबीज से हुई थी भाई की मौत
हरीभान के पिता की मौत कई साल पहले हो गई थी। भाई वेदप्रकाश को भी छह महीने पहले रेबीज हो गई थी। इस कारण उसका 15 दिन तक इलाज चला लेकिन वह ठीक नहीं हो सका। उसकी मौत हो गई। वेदप्रकाश के चार बेटे हैं। इनमें आठ साल का विशाल, पांच साल का मोहित, चार साल का विवेक और एक एक महीने का बेटा आयुष है। हरीभान पर ही उनकी जिम्मेदारी थी। वेदप्रकाश का इलाज कराने के लिए कर्ज लिया था। हरीभान ने ही कर्ज चुकाया। मां श्यामवती भी घरों में काम करने लगी। हरीभान के बेरोजगार होने पर घर में आटा भी बमुश्किल आ पा रहा था।


बच्चों को भूख से रोता देख खुद भी रोया
हरीभान को दुकानदारों ने सामान देने से मना कर दिया तो वह टूट गया। उधर बच्चे भी भूख से बिलख रहे थे। परिवार की स्थिति देखकर हरीभान भी रोया और अपने कमरे में चला गया। इसके बाद फांसी लगा ली। अब परिवार चलाने वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed