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पुलिस के सामने महिला को जिंदा जलाने का प्रयास

Sat, 14 May 2016 12:34 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sat, 14 May 2016 12:34 AM IST
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women got fired infront of police
अाग - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
लोहामंडी के नौबस्ता के पीर बहादुरी में शुक्रवार दोपहर बबली (32) को पुलिस के सामने जिंदा जलाने की कोशिश की गई। वह 90 फीसदी झुलस गई है। इसका आरोप पूर्व पार्षद अधिवक्ता राजेंद्र कुमार पर है। वह पुलिस को लेकर अपना मकान खाली करने पहुंचे थे। बबली के झुलस जाने पर हंगामा हुआ तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। इससे भड़के लोगों ने पथराव कर दिया। पुलिस ने फिर से बल प्रयोग पर बवाल पर काबू पाया।
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बबली की मां रामरती (80) का कहना है कि उनका परिवार 100 साल से मकान पर काबिज है। उन्हें जबरन निकालने के लिए राजेंद्र कुमार पुलिस लेकर पहुंचे। आरोप है कि विरोध होने पर पुलिस और राजेंद्र पक्ष ने महिलाओं को पीटा। बबली नहीं मानी तो उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। चीखपुकार पर जमा हुए लोगों का गुस्सा भड़क गया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो लोगों ने पथराव कर दिया। इसमें कई लोगों को चोट आई है। राजेंद्र कुमार और उनकी पत्नी अनुपम भी घायल हो गईं। बवाल की सूचना पर फोर्स आ गई। पुलिस ने झुलसी महिला को एंबुुलेंस में ले जाने का प्रयास किया तो भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बाद में बमुश्किल अस्पताल ले जाया गया।
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रामरती ने बताया कि उसके ससुर जमुनादास ने क्षेत्र के ही रहने वाले राजेंद्र के पूर्वजों से यह मकान लिया था। वह अपने बेटे मुन्ना, मोती, बेटी बबली पत्नी छोटू, धेवते प्रदीप, छोटी बेटी आशा के साथ रहती है। दस मई को राजेंद्र पुलिस के साथ आया। पुलिस उनका सामान कब्जे में लेकर चली गई। तब से परिवार किसी तरह अपना गुजारा कर रहा था। शुक्रवार चार बजे राजेंद्र फिर से पुलिस लेकर आया और उन्हें मकान से निकालने लगा।
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कोर्ट के आदेश पर खाली कराया मकान
राजेंद्र का कहना है कि रामरती उनके मकान पर 35 साल से किरायेदार थीं। उन्होंने मकान खाली कराने के लिए 2013 में कोर्ट में वाद दायर किया था। कोर्ट ने फैसला राजेंद्र के पक्ष में सुनाया। किरायेदार से मकान खाली कराने के आदेश दिए। एसएसपी से पुलिस बल मांगा गया था। तब मकान खाली करा दिया गया था। मगर, रामरती और उसके परिवार ने फिर से कब्जा कर लिया। जब दोबारा उनसे मकान खाली करने को बोला गया तो हंगामा कर दिया। मकान खाली कराने में पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई है। बबली को जलाने का आरोप गलत है।
कोर्ट के आदेश पर मकान पर कब्जा दिलाया गया था। झगड़े की सूचना पर पुलिस गई थी। महिला के परिवार की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करके जांच की जाएगी।
मनीषा सिंह, सीओ कोतवाली
हैंडपंप भी ले गई पुलिस
रामरती ने बताया कि दो दिन से उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। बिजली काटी जा चुकी है। हैंडपंप भी पुलिस कब्जे में करके ले गई। इससे पानी तक नहीं भर पा रहे हैं। रसोई की दीवार गिरा दी गई। अब वह जाएं तो जाएं कहां पर। उनके सामने आर्थिक संकट है।

एक घंटे तक तड़पती रही बबली
पुलिस के सामने ही बबली के जलने की घटना हुई। इसके बावजूद उसे तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया गया। एक घंटे तक वह तड़पती रही। मोहल्ले के लोग उसे कमरे से बाहर लेकर आए। पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रही। एक घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची। तब अस्पताल ले जाया गया।

100 साल पहले दिए थे 50 रुपये
रामरती ने बताया कि सौ साल पहले उसके ससुर जमुनादास ने राजेंद्र के पूर्वजों को 50 रुपये दिए थे। पूर्वजों ने उन्हें तब से वहीं पर रहने दिया। मकान में तीन कमरे हैं, जबकि जमीन का काफी हिस्सा खाली है। तब उसकी कीमत भी कौड़ियों में थीं। मगर, अब जमीन के दाम बढ़ने के साथ ही राजेंद्र पक्ष उन पर मकान खाली कराने का दबाव बना रहा है।


पूर्व एमएलसी के बेटे हैं राजेंद्र
राजेंद्र कुमार उर्फ बाला के पिता स्व. ध्रुव नरायन सिंह सन 1972 से 1978 तक एमएलसी थे। राजेंद्र खुद भी वार्ड 32 से पार्षद थे। अब उनके भाई राजीव सिंह पार्षद हैं।
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