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टंकी से पांच घंटे तक देते रहे कूदने की चेतावनी
टंकी से पांच घंटे तक देते रहे कूदने की चेतावनी
Updated Wed, 09 Nov 2016 01:10 AM IST
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टंकी से पांच घंटे तक देते रहे कूदने की चेतावनी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नामांकन में एनएसयूआई का पूरा पैनल खारिज करने और बिना जानकारी दिए नियम बदलने के विरोध पर एनएसयूआई और निर्दल प्रत्याशी को मिलाकर कुल चार छात्र खंदारी कैंपस स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। पांच घंटे तक वह बार-बार कूदने की चेतावनी दे रहे।
सुबह 10 बजे एनएसयूआई कार्यकर्ता राष्ट्रीय महासचिव अमित सिंह के नेतृत्व में खंदारी कैंपस के प्रवेश द्वार पर पहुंचे। वहां मौजूद चीफ प्रॉक्टर और दो पुलिसकर्मी को बिना आईकार्ड दिखाए सभी अंदर घुस गए। एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी दीप आशुतोष विमल, उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी अखिलेंद्र शुक्ला, महामंत्री पद के प्रत्याशी जीतेश यादव और निर्दलीय अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सर्वेश यादव सुबह 10:50 बजे टंकी पर चढ़ गए।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव, जिलाध्यक्ष मनीष गौतम, दीपक आदि नीचे बैठकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद सीओ छत्ता बीएस त्यागी, एसीएम प्रथम रजनीश मिश्र और सिटी मजिस्ट्रेट संदीप गुप्ता पहुंचे।
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उन्होंने बारी-बारी समझाने की कोशिश की पर छात्र नहीं माने। जानबूझकर नामांकन खारिज करने का आरोप लगाया। कुछ देर बाद कांग्रेस नेत्री शबाना खंडेलवाल भी पहुंच गईं। वह भी टंकी पर चढ़ने लगीं। एसीएम ने उन्हें रोका। शाम 4:10 बजे चुनाव निरस्त होने की सूचना के बाद चारों छात्र टंकी से उतरे।
सछास, एनएसयूआई कार्यकर्ता साथ नजर आए
आगरा। समाजवादी छात्रसभा (सछास) और एनएसयूआई के कार्यकर्ता मंगलवार को एक साथ नजर आए। पहले एनएसयूआई के कार्यकर्ता अकेले प्रदर्शन कर रहे थे। दोपहर में सछास के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बृजेश शर्मा, शहर अध्यक्ष निर्वेश शर्मा, उपाध्यक्ष गौरव यादव आदि पहुंच गए। दोनों संगठनों के पदाधिकारी एक साथ मंत्रणा करते नजर आए। चुनाव अधिकारी के कक्ष में भी एक साथ पहुंचे। इसको देखकर छात्र सपा और कांग्रेस के गठबंधन के संबंध में भी चर्चा करने लगे। वहीं एबीवीपी ने आरोप लगाया कि दोनों संगठनों के दबाव में चुनाव स्थगित किया गया।
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क्या कहना है इनका
छात्रसभा पहले से ही मांग कर रही थी कि नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए थे। विश्वविद्यालय ने छात्रहित में मांगें मान ली हैं। - बृजेश शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, सछास
हम गलत के लिए खिलाफ लड़ रहे थे, जीत हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद को बचाने और बीजेपी नेताओं को खुश करने के लिए हम पर मुकदमा दर्ज कराया है।-अमित सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, एनएसयूआई
कार्यकर्ताओं पर बर्बरता पूर्व कार्रवाई की गई है, एबीवीपी की जीत की संभावना से बाकी संगठन डर गए थे। सत्ता के दबाव में चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया गया है। -राहुल सारस्वत, महानगर संगठन मंत्री, एबीवीपी
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सुबह 10 बजे एनएसयूआई कार्यकर्ता राष्ट्रीय महासचिव अमित सिंह के नेतृत्व में खंदारी कैंपस के प्रवेश द्वार पर पहुंचे। वहां मौजूद चीफ प्रॉक्टर और दो पुलिसकर्मी को बिना आईकार्ड दिखाए सभी अंदर घुस गए। एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी दीप आशुतोष विमल, उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी अखिलेंद्र शुक्ला, महामंत्री पद के प्रत्याशी जीतेश यादव और निर्दलीय अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सर्वेश यादव सुबह 10:50 बजे टंकी पर चढ़ गए।
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एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव, जिलाध्यक्ष मनीष गौतम, दीपक आदि नीचे बैठकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद सीओ छत्ता बीएस त्यागी, एसीएम प्रथम रजनीश मिश्र और सिटी मजिस्ट्रेट संदीप गुप्ता पहुंचे।
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उन्होंने बारी-बारी समझाने की कोशिश की पर छात्र नहीं माने। जानबूझकर नामांकन खारिज करने का आरोप लगाया। कुछ देर बाद कांग्रेस नेत्री शबाना खंडेलवाल भी पहुंच गईं। वह भी टंकी पर चढ़ने लगीं। एसीएम ने उन्हें रोका। शाम 4:10 बजे चुनाव निरस्त होने की सूचना के बाद चारों छात्र टंकी से उतरे।
सछास, एनएसयूआई कार्यकर्ता साथ नजर आए
आगरा। समाजवादी छात्रसभा (सछास) और एनएसयूआई के कार्यकर्ता मंगलवार को एक साथ नजर आए। पहले एनएसयूआई के कार्यकर्ता अकेले प्रदर्शन कर रहे थे। दोपहर में सछास के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बृजेश शर्मा, शहर अध्यक्ष निर्वेश शर्मा, उपाध्यक्ष गौरव यादव आदि पहुंच गए। दोनों संगठनों के पदाधिकारी एक साथ मंत्रणा करते नजर आए। चुनाव अधिकारी के कक्ष में भी एक साथ पहुंचे। इसको देखकर छात्र सपा और कांग्रेस के गठबंधन के संबंध में भी चर्चा करने लगे। वहीं एबीवीपी ने आरोप लगाया कि दोनों संगठनों के दबाव में चुनाव स्थगित किया गया।
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क्या कहना है इनका
छात्रसभा पहले से ही मांग कर रही थी कि नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए थे। विश्वविद्यालय ने छात्रहित में मांगें मान ली हैं। - बृजेश शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, सछास
हम गलत के लिए खिलाफ लड़ रहे थे, जीत हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद को बचाने और बीजेपी नेताओं को खुश करने के लिए हम पर मुकदमा दर्ज कराया है।-अमित सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, एनएसयूआई
कार्यकर्ताओं पर बर्बरता पूर्व कार्रवाई की गई है, एबीवीपी की जीत की संभावना से बाकी संगठन डर गए थे। सत्ता के दबाव में चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया गया है। -राहुल सारस्वत, महानगर संगठन मंत्री, एबीवीपी