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85 कालेजों के नाम से बनाई 25000 फर्जी मार्कशीट
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 30 Aug 2015 02:24 AM IST
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डाक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री घोटाले में एक और खुलासा हुआ है। रेट फिक्स करके बेची गई 25 हजार फर्जी डिग्रियां 85 कालेजों के नाम से बनाई गईं थीं। इनमें कई कालेज ऐसे हैं, जिनके मैनेजमेंट को पता ही नहीं चला कि घोटाले में उनका नाम इस्तेमाल हुआ है। कुछ ऐसे हैं, जो खुद जालसाजी में शामिल रहे। एसआईटी ने सभी कालेजों का ब्योरा तैयार कर हाईकोर्ट के सामने रखा है।
इस पर सुनवाई दो सितंबर को होनी है। सभी 85 कालेज आगरा जनपद के हैं। ज्यादातर देहात में और प्राइवेट है। इनके नाम से बीएड की डिग्री जारी की गई। एसआईटी के सूत्रों ने बताया कि फर्जी डिग्रियों की जांच में इन कालेजों के नाम सामने आया। डिग्री पर नाम देखकर कालेजों में जांच पड़ताल की गई। पता चला कि जिनका इन कालेजों में दाखिला ही नहीं था, उनकी डिग्रियों पर कालेज का नाम था।
एसआईटी जांच हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही है। घोटाले में विश्वविद्यालय के लिपिकों से लेकर आला अधिकारी तक फंसे हैं। अब इन कालेजों के मैनेजमेंट भी घबरा गए हैं, जिनके नाम फर्जी डिग्रियों में मिले। देखना है कि इनके बारे में हाईकोर्ट से एसआईटी को क्या निर्देश मिलता है। जांच पूरी होने के बाद केस की सुनवाई सीबीआई कोर्ट लखनऊ में होनी है। एसआईटी के मामले इसी कोर्ट में जाते हैं। हालांकि घोटाले की एफआईआर आगरा में दर्ज कराई गई थी।
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आगे की जांच में ही इन कालेजों की भूमिका साफ होगी। पहले जांच आगरा डीआईजी के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी में लखनऊ के अधिकारी हैं। एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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इस पर सुनवाई दो सितंबर को होनी है। सभी 85 कालेज आगरा जनपद के हैं। ज्यादातर देहात में और प्राइवेट है। इनके नाम से बीएड की डिग्री जारी की गई। एसआईटी के सूत्रों ने बताया कि फर्जी डिग्रियों की जांच में इन कालेजों के नाम सामने आया। डिग्री पर नाम देखकर कालेजों में जांच पड़ताल की गई। पता चला कि जिनका इन कालेजों में दाखिला ही नहीं था, उनकी डिग्रियों पर कालेज का नाम था।
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एसआईटी जांच हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही है। घोटाले में विश्वविद्यालय के लिपिकों से लेकर आला अधिकारी तक फंसे हैं। अब इन कालेजों के मैनेजमेंट भी घबरा गए हैं, जिनके नाम फर्जी डिग्रियों में मिले। देखना है कि इनके बारे में हाईकोर्ट से एसआईटी को क्या निर्देश मिलता है। जांच पूरी होने के बाद केस की सुनवाई सीबीआई कोर्ट लखनऊ में होनी है। एसआईटी के मामले इसी कोर्ट में जाते हैं। हालांकि घोटाले की एफआईआर आगरा में दर्ज कराई गई थी।
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आगे की जांच में ही इन कालेजों की भूमिका साफ होगी। पहले जांच आगरा डीआईजी के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी में लखनऊ के अधिकारी हैं। एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।