व्हाट्सएप पर होता था कछुओं का सौदा, आरोपियों ने उगले कई राज, अब तस्करों की तलाश
- पुलिस ने बताया कि लाल तिलकधारी कछुओं की सबसे ज्यादा मांग विदेश में होती है। यह तीन से साढ़े तीन लाख रुपयों में बिकता है। इसी तरह 20 नाखून वाले कछुओं की ज्यादा मांग है।
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आगरा में पेट हाउस और मछली बिक्री की आड़ में कछुओं की बिक्री का खेल चल रहा है। दिल्ली से आई वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरों की टीम की सूचना पर बुधवार को पुलिस टीम ने दो दुकानदारों में इस धंधे का भंडाफोड़ किया। यहां से पांच कछुए भी बरामद किए गए। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कछुओं के बेचने वालों के तार तस्करों से जुड़े हुए हैं। पुलिस इस बारे में छानबीन में जुटी है।
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि बुधवार को दिल्ली से आई वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने जानकारी दी कि आगरा में तस्करी के कछुओं को बेचा जा रहा है। इनकी सप्लाई आगरा और आसपास के राज्यों में भी की जा रही है। इस पर पुलिस टीम ने छानबीन शुरू कर दी।
एक टीम को लोहामंडी में लगाया गया। पता चला कि पेट हाउस का संचालक कछुओं को दूसरे राज्य में बिक्री के लिए ले जाता है। वन विभाग की टीम के साथ पुलिस, दिल्ली की टीम ने जांच की। पुलिस कर्मी ग्राहक बनकर दुकान पर गए थे।
लोहामंडी चौराहे पर किदवई पार्क निवासी अक्की की पेट हाउस के नाम से दुकान है। टीम वहां पहुंची। कछुओं के बारे में बात की। इसके बाद मालिक का मोबाइल नंबर ले लिया। मालिक से फोन पर कछुओं खरीदने के लिए बात शुरू हो गई। 20 और 12 नाखून के हिसाब से कीमत तय की जाने लगी। उसने अपने घर बुला लिया।
पुलिस टीम ने दुकान मालिक के घर जाकर तीन कछुओं को बरामद कर लिया। इनमें एक कछुए के 20 नाखून थे। यह दुर्लभ प्रजाति का माना जाता है, जबकि 12-12 नाखून वाले दो कछुए थे। इनकी भी बाजार में मांग है।
अक्की से पूछताछ के बाद आवास विकास कालोनी के सेक्टर 12 स्थित सुनील की दुकान पर छापा मारा गया। वह एक्वेरियम और मछली बेचता है। इसकी आड़ में कछुओं की भी बिक्री करता है। उसके यहां से 12-12 नाखून वाले दो कछुए बरामद हुए। पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। अक्की ने एक और आरोपी विष्णु का नाम लिया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में देर रात दबिश दे रही थी।
तिलकधारी कछुओं की मांग
पुलिस ने बताया कि लाल तिलकधारी कछुओं की सबसे ज्यादा मांग विदेश में होती है। यह तीन से साढ़े तीन लाख रुपयों में बिकता है। इसी तरह 20 नाखून वाले कछुओं की ज्यादा मांग है। इसकी भी कीमत काले बाजार में तीन लाख तक है। भारत में इनकी कीमत 50 हजार रुपये तक है। तिलकधारी कछुए की प्रजाति चंबल नदी में पाई जाती है। इनको बचाने के लिए वन विभाग की टीम कार्य कर रही है। तस्कर चोरी छिपे कछुओं को ले जाते हैं। इसके बाद इन्हें बेच दिया जाता है।
एसपी सिटी ने बताया कि बरामद कछुओं की कीमत तस्कर तकरीबन पांच लाख रुपये वसूलते। आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस को आशंका है कि चंबल सेंचुरी क्षेत्र से कछुओं को यहां लाया जा रहा है। इसके बारे में पुलिस टीम पड़ताल में जुटी है।
व्हाट्स एप पर होता कछुओं का सौदा
शहर से लेकर देहात में कई बार कछुओं की तस्करी पकड़ी जा चुकी है। पुलिस कई लोगों को गिरफ्तार करके जेल भी भेज चुकी है। इसके बावजूद कछुओं की तस्करी हो रही है। पुलिस को सूचना मिली है कि शहर के कई मछली बेचने वाले कछुओं को बेचते हैं। दुकानदार पुराने और मिलने वाले ग्राहक से ही कछुओं के बारे में बात करते हैं।
दुकान पर कछुओं को नहीं रखा जाता है। कछुए दिखाने के लिए घर पर बुलाया जाता है। यहीं पर रकम भी वसूल की जाती है। कई बार फोन पर ही पूरी डीलिंग की जाती है। बाहर से भी कछुओं को तस्कर लेकर आते हैं। जो लोग कछुओं को देखना चाहते हैं, उनके व्हाट्स एप पर फोटो भेजी जाती है। इसी पर रेट भी तय किया जाता है।
एसपी सिटी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल में कई लोगों के नंबर मिले हैं। इनमें कई नंबर तस्करों के भी हो सकते हैं। ऐसे में जांच की जा रही है। आशंका है कि तस्करों को मध्य प्रदेश और दिल्ली में बेचा जा रहा है। यहां से तस्कर दूसरे राज्य में कछुओं को लेकर जाते हैं।
चंबल नदी में कई कछुए
चंबल नदी में मोरपंखी, साल, सुंदरी, कटहेवा, पचेड़ा, तिलकधारी, धमोक और चौड़ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। तिलकधारी बेहद दुर्लभ पाए जाते हैं। इनकी गर्दन और आंखों के पास लाल रंग की धारी होती है।