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32 साल बाद आया दंगे का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Tue, 28 Jun 2016 02:00 AM IST
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अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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1984 का दंगा
: फीरोजाबाद में एसएन रोड स्थित गुरुद्वारा में हुई थी घटना
: 150 बलवाई थे, चार्जशीट सिर्फ छह के खिलाफ हुई
: पुलिस ने बचाई थी गुरुद्वारा में फंसे कई लोगों की जान
1984 में फीरोजाबाद में हुए दंगे का फैसला सोमवार को आया। इस केस में छह आरोपी थे। पांच की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। एक के ही खिलाफ केस चल रहा था। वह साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया है।
31 अक्तूबर 1984 को दिल्ली में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में दंगे हुए थे। इनमें फीरोजाबाद भी शामिल था। उस समय फीरोजाबाद आगरा जनपद का हिस्सा था। घटना गुरुद्वारा एसएन रोड पर हुई थी। पुलिस के सामने ही 150 उपद्रवियों ने आगजनी, लूटपाट और मारपीट की थी।
पुलिस ने गुरुद्वारा में फंसे लोगों की जान बड़ी मुश्किल से बचाई थी। सरदार इंदर सिंह, बल्देव सिंह, परताप सिंह, विनोद सिंह, रंजीत सिंह, रवीन्द्र सिंह, निर्मल सिंह, कमलेश, बसंत, कुलवंत कौर घायल हुए थे। थाना उत्तर के तत्कालीन थाना प्रभारी हाकिम राय ने केस दर्ज कराया था।
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15 मार्च 1985 को महेश बाबू, धर्मेंद्र शर्मा, गिरिजा शंकर, मदन लाल, रघुनाथ प्रसाद चतुर्वेदी और दिनेश कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। वर्ष 2000 में गिरिजा शंकर और मदन लाल की मृत्यु हो गई। 14 फरवरी 2001 को दिनेश की पत्रावली अलग कर दी गई। उसकी भी मृत्यु हो गई। इसके बाद महेश बाबू और रघुनाथ प्रसाद चतुर्वेदी की भी मृत्यु हो गई।
अब केस सिर्फ धर्मेंद्र शर्मा के खिलाफ रह गया। इसमें 10 गवाह पेश किए गए। सोमवार को इसमें स्पेशल जज दस्यु प्रभावी क्षेत्र वीरेंद्र कुमार ने निर्णय सुनाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजवीर सिंह, सलमा सुल्तान और रवि चौहान ने बताया कि कोर्ट ने धर्मेंद्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
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: फीरोजाबाद में एसएन रोड स्थित गुरुद्वारा में हुई थी घटना
: 150 बलवाई थे, चार्जशीट सिर्फ छह के खिलाफ हुई
: पुलिस ने बचाई थी गुरुद्वारा में फंसे कई लोगों की जान
1984 में फीरोजाबाद में हुए दंगे का फैसला सोमवार को आया। इस केस में छह आरोपी थे। पांच की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। एक के ही खिलाफ केस चल रहा था। वह साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया है।
31 अक्तूबर 1984 को दिल्ली में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में दंगे हुए थे। इनमें फीरोजाबाद भी शामिल था। उस समय फीरोजाबाद आगरा जनपद का हिस्सा था। घटना गुरुद्वारा एसएन रोड पर हुई थी। पुलिस के सामने ही 150 उपद्रवियों ने आगजनी, लूटपाट और मारपीट की थी।
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पुलिस ने गुरुद्वारा में फंसे लोगों की जान बड़ी मुश्किल से बचाई थी। सरदार इंदर सिंह, बल्देव सिंह, परताप सिंह, विनोद सिंह, रंजीत सिंह, रवीन्द्र सिंह, निर्मल सिंह, कमलेश, बसंत, कुलवंत कौर घायल हुए थे। थाना उत्तर के तत्कालीन थाना प्रभारी हाकिम राय ने केस दर्ज कराया था।
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15 मार्च 1985 को महेश बाबू, धर्मेंद्र शर्मा, गिरिजा शंकर, मदन लाल, रघुनाथ प्रसाद चतुर्वेदी और दिनेश कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। वर्ष 2000 में गिरिजा शंकर और मदन लाल की मृत्यु हो गई। 14 फरवरी 2001 को दिनेश की पत्रावली अलग कर दी गई। उसकी भी मृत्यु हो गई। इसके बाद महेश बाबू और रघुनाथ प्रसाद चतुर्वेदी की भी मृत्यु हो गई।
अब केस सिर्फ धर्मेंद्र शर्मा के खिलाफ रह गया। इसमें 10 गवाह पेश किए गए। सोमवार को इसमें स्पेशल जज दस्यु प्रभावी क्षेत्र वीरेंद्र कुमार ने निर्णय सुनाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजवीर सिंह, सलमा सुल्तान और रवि चौहान ने बताया कि कोर्ट ने धर्मेंद्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।