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जूता कारखाने के कारीगरों ने किया था अंशु का अपहरण

Fri, 20 Jan 2017 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Fri, 20 Jan 2017 11:54 PM IST
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shoe factory workers were abducted Anshu
बच्चे ने कहा, ऊपर कारखाने में काम करने वाले भइया ले गए थे, पुलिस ने तीन कारीगर गिरफ्तार किए - फोटो : अमर उजाला
रकाबगंज के काजीपाड़ा से जूता व्यवसायी जितेंद्र कुमार के बेटे दिव्यांश उर्फ अंशु (5) का अपहरण व्यवसायी के कारखाने में ही काम करने वाले कारीगरों ने किया था। पुलिस ने बच्चे की बरामदगी के चार घंटे बाद ही तीन कारीगरों को गिरफ्तार कर लिया।
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बता दें, अंशु गुरुवार को घर के बाहर खेलते समय लापता हो गया था। जितेंद्र के भाई प्रदीप कुमार के मोबाइल पर 15 लाख रुपये की फिरौती के लिए कॉल आई। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। हालांकि थोड़ी देर बाद ही अंशु अकोला में मिल गया। सीओ सदर असीम चौधरी ने बताया कि इंस्पेक्टर थाना रकाबगंज ने अंशु को टाफी और चाकलेट देकर प्यार से बात की। तब उसने बताया कि कारखाना में सबसे ऊपर की मंजिल पर काम करने वाले भइया उसे ले गए थे। दोपहर के समय काम की कहकर गए कारीगर पर शक हो गया। तब पुलिस ने कारीगर विकास (कांशीराम आवास योजना), लक्ष्मण (शाहगंज) और मनोज (उखर्रा, सदर) को गिरफ्तार किया। साजिश विकास ने रची थी। वह दो बजे मामा के यहां जाने की कहकर चला गया। बाइक लेकर नहीं गया। इसके बाद लक्ष्मण अंशु को बहाने से अपने साथ ले गया और विकास के हवाले किया। विकास बालक को कंपनी गार्डन तक ले आया। वहां लक्ष्मण उसे बाइक देकर चला गया। विकास ने अंशु के मोबाइल से उसके ताऊ को कॉल करके फिरौती मांगी। बाद में अकोला में छोड़कर भाग निकला। उधर, लक्ष्मण और मनोज कारखाने में ही बच्चे की तलाश का ड्रामा करते रहे।
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गर्लफ्रेंड से शादी रचाने को बनाया अपहरण का प्लान
इंस्पेक्टर के मुताबिक, विकास ने बताया कि वह सदर क्षेत्र निवासी अपनी गलफ्रेंड से शादी करना चाहता है। उसके घरवाले राजी नहीं हैं। वह काफी रकम जुटाना चाहता था। उम्मीद थी कि जितेंद्र से 15 लाख रुपये मिल जाएंगे। आधी रकम रख लेता। बाकी लक्ष्मण और मनोज को देता। शुक्रवार तक रकम मिलने की उम्मीद थी। रविवार को वह प्रेमिका को लेकर ग्वालियर भाग जाता। शक न हो इसके लिए सुबह ही कारखाने भी पहुंचने वाले थे। विकास का भाई भी फैक्ट्री में काम करता है। उधर, मनोज ने खुद को बेगुनाह बताया है।
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अंशु को जान से मार देता कारीगर
अंशु ने कारीगरों को पहचान लिया था। कारीगर उसे जिंदा नहीं छोड़ते। अपहरण के कुछ देर बाद ही उसे जान से मारने का प्लान बनाया था। मगर, विकास हिम्मत नहीं कर सका।
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