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शैलेंद्र पर एक साथ पांच मुकदमों में चार्जशीट
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 26 Jul 2015 01:55 AM IST
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पहले अफसरों को बचाया। फिर शैलेंद्र अग्रवाल से संगीन धाराएं हटाई और अब उसके पिता, पत्नी और मैनेजर को क्लीन चिट दे दी। सबसे बड़ी जालसाजी केस की जांच में पुलिस का खेल जारी है। इस बार जालसाज पर एक साथ पांच मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की गई है। इनमें सिर्फ शैलेंद्र को ही आरोपी बनाया गया है। इस बार भी अफसरों की भूमिका के बारे में कोई जांच-पड़ताल नहीं हुई है।
ये पांचों मुकदमे केदारनगर के लोगों ने शाहगंज थाना में अलग-अलग दर्ज कराए थे। इनमें घनश्याम, रवि बंसल, दीपक बंसल, विनय बंसल और कल्पना बंसल वादी हैं। सभी ने शैलेंद्र पर आलू में निवेश के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।
इनमें एक केस में शैलेंद्र, उसकी पत्नी वंदना और मैनेजर आरोपी बनाया गया। दूसरे में सिर्फ शैलेंद्र, तीसरे और चौथे में वह और उसकी पत्नी और पांचवें में वह और उसके पिता मुरारी लाल अग्रवाल। पुलिस ने तीन महीने लंबी जांच पड़ताल के बाद सिर्फ शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की है।
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एसएमएस का जिक्र ही नहीं
शैलेंद्र के खिलाफ यह दूसरी चार्जशीट है। पहली चार्जशीट में एसएमएस की डिटेल शामिल न करने के पीछे कहा गया था कि इसकी जांच साइबर सेल ने पूरी नहीं की है। दूसरी चार्जशीट में भी एसएमएस डिटेल नहीं शामिल की गई है। इस डिटेल में दरोगाओं की ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल बताया जाता है।
साक्ष्य नष्ट कर सकती है पुलिस
पुलिस ने दोनों में से एक भी चार्जशीट में शैलेंद्र की डायरी का जिक्र नहीं किया है। इसमें उसके अफसरों के साथ लेन देन का हिसाब किताब बताया जाता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह डायरी एसआईटी के पास है लेकिन इसे नष्ट किया जा सकता है।
सीबीआई जांच से डर रहे अधिकारी
शैलेंद्र पर चार्जशीट में अफसरों का डर भी साफ नजर आ रहा है। हर बार यही लिखा जा रहा है कि एसएमएस और फोन रिकार्डिंग की जांच अभी चल रही है। इस तरह अधिकारी खुद को सेफ करके चल रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर सीबीआई जांच हो गई तो फंस जाएंगे। इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लंबित है।
नौकर भी साफ बच गए
शैलेंद्र पर पहली चार्जशीट के बाद पुलिस की ओर से कहा जा रहा था कि दूसरे आरोप पत्र में उसके नौकरों का नाम भी होगा। अधिकारी कह रहे थे कि नौकरों को आरोपी बनाकर शैलेंद्र का गैंग रजिस्टर्ड होगा और इसके बाद उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी। लेकिन अभी ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
रकम वापसी की संभावना कम
दोनों चार्जशीट से यह भी साफ हो गया है कि पुलिस का इरादा शैलेंद्र से जालसाजी में कमाई गई करोड़ों की रकम वापस उन लोगों को दिलाने का नहीं है जो पीड़ित हैं। इसका पता इससे भी लगता है कि पुलिस ने पांच केस की जांच पड़ताल शैलेंद्र का रिमांड लिए बगैर ही पूरी कर ली। पुलिस चाहती तो उसे रिमांड पर लेकर उसकी दौलत के बारे में जानकारी कर सकती थी।
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ये पांचों मुकदमे केदारनगर के लोगों ने शाहगंज थाना में अलग-अलग दर्ज कराए थे। इनमें घनश्याम, रवि बंसल, दीपक बंसल, विनय बंसल और कल्पना बंसल वादी हैं। सभी ने शैलेंद्र पर आलू में निवेश के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।
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इनमें एक केस में शैलेंद्र, उसकी पत्नी वंदना और मैनेजर आरोपी बनाया गया। दूसरे में सिर्फ शैलेंद्र, तीसरे और चौथे में वह और उसकी पत्नी और पांचवें में वह और उसके पिता मुरारी लाल अग्रवाल। पुलिस ने तीन महीने लंबी जांच पड़ताल के बाद सिर्फ शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की है।
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एसएमएस का जिक्र ही नहीं
शैलेंद्र के खिलाफ यह दूसरी चार्जशीट है। पहली चार्जशीट में एसएमएस की डिटेल शामिल न करने के पीछे कहा गया था कि इसकी जांच साइबर सेल ने पूरी नहीं की है। दूसरी चार्जशीट में भी एसएमएस डिटेल नहीं शामिल की गई है। इस डिटेल में दरोगाओं की ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल बताया जाता है।
साक्ष्य नष्ट कर सकती है पुलिस
पुलिस ने दोनों में से एक भी चार्जशीट में शैलेंद्र की डायरी का जिक्र नहीं किया है। इसमें उसके अफसरों के साथ लेन देन का हिसाब किताब बताया जाता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह डायरी एसआईटी के पास है लेकिन इसे नष्ट किया जा सकता है।
सीबीआई जांच से डर रहे अधिकारी
शैलेंद्र पर चार्जशीट में अफसरों का डर भी साफ नजर आ रहा है। हर बार यही लिखा जा रहा है कि एसएमएस और फोन रिकार्डिंग की जांच अभी चल रही है। इस तरह अधिकारी खुद को सेफ करके चल रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर सीबीआई जांच हो गई तो फंस जाएंगे। इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लंबित है।
नौकर भी साफ बच गए
शैलेंद्र पर पहली चार्जशीट के बाद पुलिस की ओर से कहा जा रहा था कि दूसरे आरोप पत्र में उसके नौकरों का नाम भी होगा। अधिकारी कह रहे थे कि नौकरों को आरोपी बनाकर शैलेंद्र का गैंग रजिस्टर्ड होगा और इसके बाद उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी। लेकिन अभी ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
रकम वापसी की संभावना कम
दोनों चार्जशीट से यह भी साफ हो गया है कि पुलिस का इरादा शैलेंद्र से जालसाजी में कमाई गई करोड़ों की रकम वापस उन लोगों को दिलाने का नहीं है जो पीड़ित हैं। इसका पता इससे भी लगता है कि पुलिस ने पांच केस की जांच पड़ताल शैलेंद्र का रिमांड लिए बगैर ही पूरी कर ली। पुलिस चाहती तो उसे रिमांड पर लेकर उसकी दौलत के बारे में जानकारी कर सकती थी।