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शैलेंद्र को छोड़ा नहीं, अफसरों को छेड़ा नहीं
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Mon, 02 May 2016 01:49 AM IST
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हाईप्रोफाइल जालसाज का जेल में एक साल पूरा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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- 43 केस दर्ज हो चुकेहैं जालसाज के खिलाफ
- 30 मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है
- करोड़ों की जालसाजी के आरोप में बंद है जेल में
हाईप्रोफाइल जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल का जेल में एक साल पूरा हो गया। एक मई 2015 को उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ एक के बाद एक दर्ज कराए गए मुकदमों की संख्या 43 तक जा पहुंची। उसके अलावा उसके पूरे परिवार और रिश्तेदार तक आरोपी बना दिए गए। लेकिन जालसाजी में उसका साथ देने वाले अफसरों का बाल भी बांका न हुआ। इनके खिलाफ जांच कराने की बात तो कई मर्तबा कही गई, लेकिन इनमें से एक का भी बयान तक दर्ज करने की हिम्मत पुलिस ने नहीं दिखाई। आरोपों के घेरे में दो पूर्व डीजीपी, एक आईएएस और एक आईपीएस आए थे।
शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ पहला केस दरोगा की पत्नी ने दर्ज कराया था। इसमें उसे एक मई को जेल भेजा गया। इससे काफी समय पहले उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ था लेकिन उसमें वह न केवल जल्द ही जेल से बाहर आ गया था, बल्कि क्लीन चिट भी मिल गई थी। उसके खिलाफ दर्ज 42 केस में से 30 में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उसकी हिस्ट्रीशीट खोली जा चुकी है। उस पर गैंगस्टर एक्ट भी लग चुका है। उसके बाद उसका भाई नितेंद्र अग्रवाल भी धोखाधड़ी के आरोप में जेल गया।
गायब कर दी एसएमएस डिटेल
पुलिस ने शैलेंद्र की जालसाजी का राज खोलने के लिए सीबीआई की टेनिक्नकल विंग की मदद ली थी। उसके मोबाइल से डिलीट एसएमएस को डीकोड कराया गया था। इस डिटेल से उसके अफसरों के साथ रिश्ते उजागर हुए। पुलिस ने इसे साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश नहीं किया। पुलिस सूत्रों की मानें तो डिटेल गायब कर दी गई।
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परिवार पर भी गिरफ्तारी की तलवार
शैलेंद्र और उसका भाई नितेंद्र जेल में है। उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी है। इनके खिलाफ कई बार गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। एक बार तो कुर्की वारंट भी जारी हो गए। इस पर इन्हें बाद में स्टे मिल गया। इसके बाद एक और केस में वारंट जारी हो गए।
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- 30 मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है
- करोड़ों की जालसाजी के आरोप में बंद है जेल में
हाईप्रोफाइल जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल का जेल में एक साल पूरा हो गया। एक मई 2015 को उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ एक के बाद एक दर्ज कराए गए मुकदमों की संख्या 43 तक जा पहुंची। उसके अलावा उसके पूरे परिवार और रिश्तेदार तक आरोपी बना दिए गए। लेकिन जालसाजी में उसका साथ देने वाले अफसरों का बाल भी बांका न हुआ। इनके खिलाफ जांच कराने की बात तो कई मर्तबा कही गई, लेकिन इनमें से एक का भी बयान तक दर्ज करने की हिम्मत पुलिस ने नहीं दिखाई। आरोपों के घेरे में दो पूर्व डीजीपी, एक आईएएस और एक आईपीएस आए थे।
शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ पहला केस दरोगा की पत्नी ने दर्ज कराया था। इसमें उसे एक मई को जेल भेजा गया। इससे काफी समय पहले उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ था लेकिन उसमें वह न केवल जल्द ही जेल से बाहर आ गया था, बल्कि क्लीन चिट भी मिल गई थी। उसके खिलाफ दर्ज 42 केस में से 30 में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उसकी हिस्ट्रीशीट खोली जा चुकी है। उस पर गैंगस्टर एक्ट भी लग चुका है। उसके बाद उसका भाई नितेंद्र अग्रवाल भी धोखाधड़ी के आरोप में जेल गया।
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गायब कर दी एसएमएस डिटेल
पुलिस ने शैलेंद्र की जालसाजी का राज खोलने के लिए सीबीआई की टेनिक्नकल विंग की मदद ली थी। उसके मोबाइल से डिलीट एसएमएस को डीकोड कराया गया था। इस डिटेल से उसके अफसरों के साथ रिश्ते उजागर हुए। पुलिस ने इसे साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश नहीं किया। पुलिस सूत्रों की मानें तो डिटेल गायब कर दी गई।
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परिवार पर भी गिरफ्तारी की तलवार
शैलेंद्र और उसका भाई नितेंद्र जेल में है। उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी है। इनके खिलाफ कई बार गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। एक बार तो कुर्की वारंट भी जारी हो गए। इस पर इन्हें बाद में स्टे मिल गया। इसके बाद एक और केस में वारंट जारी हो गए।