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सहकारी समिति की आड़ में लोगों से धोखाधड़ी
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 18 Jul 2015 02:04 AM IST
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श्री कृष्णराम सहकारी आवास समिति द्वारा प्लाटों के आवंटन के नाम पर की गई धोखाधड़ी के खुलासे के बाद पीड़ित लोग सामने आने लगे हैं। कुछ पीड़ितों को दस साल बाद भी कब्जा नहीं दिया गया। उनकी रजिस्ट्री तक को मानने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद में की गई शिकायतों के पुलिंदे में साक्ष्य बतौर इस तरह की तमाम रजिस्ट्रियों की छायाप्रति लगाई गई है।
पिछले दिनों समिति के एक सदस्य ने मामले में अपर आवास आयुक्त राम प्रकाश से शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने पांच पेजों का शिकायती पत्र और दो पेज के साक्ष्य अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। इसमें कहा गया है कि समिति के सदस्यों को भूखंड उपलब्ध न कराकर अवैध रूप से लाभ कमाने के लिए एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर अन्य सहकारी आवास समितियों को मनमाने तरीके से बेचा गया। समिति के कई सदस्यों को वर्तमान में भी भूखंड नहीं मिल सके हैं। नियम के मुताबिक, सहकारी समिति सिर्फ अपने सदस्यों को ही आवासीय भूखंड उपलब्ध करा सकती है।
वहीं, समिति के कुछ सदस्यों के डर की वजह से कमला नगर के ही एक पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2003 में उसने समिति से यमुना विहार स्थित सरयू धाम में एक प्लॉट की रजिस्ट्री कराई थी। मगर, उसे अब तक कब्जा नहीं मिल सका है। समिति द्वारा महर्षिपुरम, ककरैठा में भी डेढ़ बीघा का भूखंड एक अन्य बिल्डर को बेचने की शिकायत की गई है। इन्हीं शिकायतों पर अपर आवास आयुक्त ने 15 जुलाई को जांच पूरी होने तक समिति द्वारा क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के साथ-साथ उसके खाते सीज करने के निर्देश दिए थे।
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पिछले दिनों समिति के एक सदस्य ने मामले में अपर आवास आयुक्त राम प्रकाश से शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने पांच पेजों का शिकायती पत्र और दो पेज के साक्ष्य अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। इसमें कहा गया है कि समिति के सदस्यों को भूखंड उपलब्ध न कराकर अवैध रूप से लाभ कमाने के लिए एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर अन्य सहकारी आवास समितियों को मनमाने तरीके से बेचा गया। समिति के कई सदस्यों को वर्तमान में भी भूखंड नहीं मिल सके हैं। नियम के मुताबिक, सहकारी समिति सिर्फ अपने सदस्यों को ही आवासीय भूखंड उपलब्ध करा सकती है।
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वहीं, समिति के कुछ सदस्यों के डर की वजह से कमला नगर के ही एक पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2003 में उसने समिति से यमुना विहार स्थित सरयू धाम में एक प्लॉट की रजिस्ट्री कराई थी। मगर, उसे अब तक कब्जा नहीं मिल सका है। समिति द्वारा महर्षिपुरम, ककरैठा में भी डेढ़ बीघा का भूखंड एक अन्य बिल्डर को बेचने की शिकायत की गई है। इन्हीं शिकायतों पर अपर आवास आयुक्त ने 15 जुलाई को जांच पूरी होने तक समिति द्वारा क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के साथ-साथ उसके खाते सीज करने के निर्देश दिए थे।
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