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कैंपस में थी पुलिस, फिर भी हो गया कत्ल
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 10 Sep 2015 02:10 AM IST
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छह सितंबर (रविवार) को आरबीएस कालेज में पीसीएस (जे) की प्रारंभिक परीक्षा चल रही थी। सुबह दस से शाम साढ़े पांच बजे तक कैंपस में न केवल पुलिस तैनात रही, बल्कि प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे। इसी दौरान इसी कैंपस में स्थित हास्टल में तोशी सेठ की हत्या कर शव पंखे से लटका दिया गया। सुबह की वारदात का रात साढ़े नौ बजे तक पता न चल पाना भी तमाम सवाल खड़े कर रहा है।
बिचपुरी स्थित आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज के तीन हिस्से हैं। एक तरफ बीफार्मा और आर्किटेक्ट डिपार्टमेंट है। इसी कैंपस में एक तरफ हास्टल है। कालेज से एक रास्ता हास्टल की तरफ जाता है। कैंपस के दो गेट हैं। एक हास्टल में खुलता है, दूसरा कालेज में। हास्टल में अंदर की तरफ एक और गेट है।
इसके ठीक सामने दूसरे कैंपस में बीटेक और एमटेक की क्लास चलती हैं। रविवार की छुट्टी के चलते दोनों कैंपस में छात्र नहीं थे। यहां 1500 स्टूडेंट्स में 250 छात्राएं हैं। उस दिन पीसीएस (जे) प्रारंभिक परीक्षा के चलते पुलिस सुरक्षा के अलावा एसडीएम भी कालेज कैंपस में ही थे। इसी दौरान हत्या हुई। हैरानी यह है कि किसी को पता नहीं चला।
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तोशी जिस कमरे (नंबर 122) में रहती थी, उसकी ठीक सामने और दोनों तरफ के कमरों में छात्राएं रहती हैं। इतनी बड़ी घटना का किसी छात्रा को भी पता न चलना हैरान करता है।
सबसे बड़ा सवाल
- छात्राओं ने कालेज प्रबंधन को बताया कि तोशी के कमरे का गेट लात मारकर खोला गया था। लेकिन फोरेंसिक एक्सपर्ट टीम को गेट पर फुट प्रिंट नहीं मिले हैं। आखिर छात्राओं ने झूठ क्यों बोला?
- सबसे बड़ी चूक
छह सितंबर की रात पुलिस जब मौके पर पहुंची तो तोशी की लाश पंखे से लटकी थी। अगर उसी समय फोरेंसिक एक्सपर्ट बुला लिए गए होते तो कई जानकारी मिल सकती थी। लेकिन फोरेंसिक टीम बुलाई गई आठ सितंबर की शाम को।
कत्ल की घड़ी
- तोशी के शव का पोस्टमार्टम हुआ सात सितंबर को दोपहर 3:20 बजे।
- हत्या का समय पोस्टमार्टम से लगभग 30 घंटे पहले का बताया गया है।
- इसका मतलब तोशी की हत्या सुबह के समय ही हो गई थी।
- सुबह दस बजे उसने अपने नाना से फोन पर बात भी की थी।
- छह सितंबर सुबह 11:30 बजे तोशी को पार्टनर छात्रा ने देखा था।
- इसका मतलब उसे 11:30 के तुरंत बाद ही मार दिया गया।
झूठ क्यों बोला?
- हास्टल की छात्राओं ने पुलिस को बताया था कि तोशी ने खुदकुशी की लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात झूठ साबित हुई।
- पुलिस को बताया गया था कि तोशी ने बेड पर प्लास्टिक की कुर्सी रखी और फिर दुपट्टे के सहारे पंखे से लटक गई।
- यह बात भी झूठ निकली है क्योंकि अगर मामला खुदकुशी का होता तो कुर्सी गिर गई होती लेकिन यह रखी हुई अवस्था में मिली थी।
अभेद नहीं है सुरक्षा
हास्टल में सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त हैं। दो वार्डन हैं। छात्राओं के परिवारीजनों तक को अंदर एंट्री नहीं है। लेकिन ये इंतजाम ऐसे भी नहीं कि इनमें सेंध न लगाई जा सके। कालेज कैंपस में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन हास्टल में नहीं है। दीवार चारों ओर है, लेकिन बहुत ऊंची नहीं है।
भावुक सपना था तोशी की आंखों में
आगरा। तोशी सेठ सिर्फ डिग्री हासिल करने के लिए जीतोड़ पढ़ाई नहीं कर रही थी। न ही उसकी तमन्ना पढ़-लिखकर पैसा कमाने की थी। उसे जुनून था तो सिर्फ अपने जान से प्यारे भाई आशुतोष की बीमारी का इलाज ढूंढने का। रात दिन किताबों में यही ढूंढती रहती थी कि ‘मस्क्युलर डिसऑर्डर’ का उपचार क्या है, जिसने उसके भाई को अपाहिज बना दिया। उसके पास बीटेक में और भी विकल्प थे, लेकिन भाई की खातिर चुना बॉयोटेक्नोलॉजी को। एमटेक में यही बीमारी उसका प्रोजेक्ट था।
तोशी काउंसलिंग 30 अगस्त को हुई थी। उससे पूछा गया था कि वह बायोटेक्नोलॉजी में ही एमटेक क्यों करना चाहती है। उसका जवाब था, ‘मैंने बीटेक अपने भाई के लिए किया है। एमटेक भी उसकी बीमारी का उपचार ढूंढने के इरादे से कर रही हूं।’ उसने बताया था कि उसकी छोटी बहन यति फैजाबाद से बीटेक कर रही है। वह खुद जयपुर से बीटेक करके आई थी।
परिवार दोनों बहनों के अलावा सबसे छोटा भाई आशुतोष है। वह मस्क्युलर डिसऑर्डर का शिकार है। इस बीमारी के चलते उसके पैर ठीक से काम नहीं करते। कई डाक्टरों को दिखाया गया, लेकिन वह ठीक न हो सका। इसलिए उसने इसी डिस्आर्डर के पर काम को चुना। एमटेक में एक प्रोजेक्ट पर फोकस करना होता है। उसकी काउंसलिंग करने वाले प्रोफेसर का कहना है कि वह ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरी छात्रा थी।
हमें किसी पर शक नहीं : गोपीनाथ
तोशी के पिता गोपीनाथ सेठ का कहना है कि कातिलों को पुलिस ही बेनकाब करेगी। उन्हें किसी पर शक नहीं है। न ही उनकी किसी से कोई दुश्मनी है। तोशी ने फोन पर कभी ऐसी कोई बात नहीं बताई कि उसे हास्टल या कालेज में किसी से कोई परेशानी है। उन्हें लगता है कि जो कुछ हुआ है, अचानक हुआ होगा।
आगरा में अंत्येष्टि मजबूरी थी
आरबीएस कालेज में एक सवाल यह भी तैर रहा है कि तोशी के शव का अंतिम संस्कार आगरा में क्यों किया गया। उसके परिवारीजन शव को इलाहाबाद क्यों नहीं ले गए। इस पर गोपीनाथ सेठ का कहना है कि कत्ल को दो दिन हो गए थे, लाश सड़ने लगी थी। इलाहाबाद ले जाने में शव और खराब होता, इसलिए मजबूरी में आगरा में ही अंतिम संस्कार किया।
वारदात से हैरान हैं हम : डायरेक्टर
आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज के डायरेक्टर डाक्टर एपी सिंह का कहना है कि वे खुद हैरान हैं कि हास्टल में इतनी बड़ी वारदात कैसे हो गई। वे चाहते हैं कि पुलिस जल्द से जल्द रहस्य से परदा उठाए। पुलिस का पूरा सहयोग किया जा रहा है। 1996 से चल रहे हास्टल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। इससे पहले यहां कभी कोई वारदात नहीं हुई।
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बिचपुरी स्थित आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज के तीन हिस्से हैं। एक तरफ बीफार्मा और आर्किटेक्ट डिपार्टमेंट है। इसी कैंपस में एक तरफ हास्टल है। कालेज से एक रास्ता हास्टल की तरफ जाता है। कैंपस के दो गेट हैं। एक हास्टल में खुलता है, दूसरा कालेज में। हास्टल में अंदर की तरफ एक और गेट है।
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इसके ठीक सामने दूसरे कैंपस में बीटेक और एमटेक की क्लास चलती हैं। रविवार की छुट्टी के चलते दोनों कैंपस में छात्र नहीं थे। यहां 1500 स्टूडेंट्स में 250 छात्राएं हैं। उस दिन पीसीएस (जे) प्रारंभिक परीक्षा के चलते पुलिस सुरक्षा के अलावा एसडीएम भी कालेज कैंपस में ही थे। इसी दौरान हत्या हुई। हैरानी यह है कि किसी को पता नहीं चला।
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तोशी जिस कमरे (नंबर 122) में रहती थी, उसकी ठीक सामने और दोनों तरफ के कमरों में छात्राएं रहती हैं। इतनी बड़ी घटना का किसी छात्रा को भी पता न चलना हैरान करता है।
सबसे बड़ा सवाल
- छात्राओं ने कालेज प्रबंधन को बताया कि तोशी के कमरे का गेट लात मारकर खोला गया था। लेकिन फोरेंसिक एक्सपर्ट टीम को गेट पर फुट प्रिंट नहीं मिले हैं। आखिर छात्राओं ने झूठ क्यों बोला?
- सबसे बड़ी चूक
छह सितंबर की रात पुलिस जब मौके पर पहुंची तो तोशी की लाश पंखे से लटकी थी। अगर उसी समय फोरेंसिक एक्सपर्ट बुला लिए गए होते तो कई जानकारी मिल सकती थी। लेकिन फोरेंसिक टीम बुलाई गई आठ सितंबर की शाम को।
कत्ल की घड़ी
- तोशी के शव का पोस्टमार्टम हुआ सात सितंबर को दोपहर 3:20 बजे।
- हत्या का समय पोस्टमार्टम से लगभग 30 घंटे पहले का बताया गया है।
- इसका मतलब तोशी की हत्या सुबह के समय ही हो गई थी।
- सुबह दस बजे उसने अपने नाना से फोन पर बात भी की थी।
- छह सितंबर सुबह 11:30 बजे तोशी को पार्टनर छात्रा ने देखा था।
- इसका मतलब उसे 11:30 के तुरंत बाद ही मार दिया गया।
झूठ क्यों बोला?
- हास्टल की छात्राओं ने पुलिस को बताया था कि तोशी ने खुदकुशी की लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात झूठ साबित हुई।
- पुलिस को बताया गया था कि तोशी ने बेड पर प्लास्टिक की कुर्सी रखी और फिर दुपट्टे के सहारे पंखे से लटक गई।
- यह बात भी झूठ निकली है क्योंकि अगर मामला खुदकुशी का होता तो कुर्सी गिर गई होती लेकिन यह रखी हुई अवस्था में मिली थी।
अभेद नहीं है सुरक्षा
हास्टल में सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त हैं। दो वार्डन हैं। छात्राओं के परिवारीजनों तक को अंदर एंट्री नहीं है। लेकिन ये इंतजाम ऐसे भी नहीं कि इनमें सेंध न लगाई जा सके। कालेज कैंपस में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन हास्टल में नहीं है। दीवार चारों ओर है, लेकिन बहुत ऊंची नहीं है।
भावुक सपना था तोशी की आंखों में
आगरा। तोशी सेठ सिर्फ डिग्री हासिल करने के लिए जीतोड़ पढ़ाई नहीं कर रही थी। न ही उसकी तमन्ना पढ़-लिखकर पैसा कमाने की थी। उसे जुनून था तो सिर्फ अपने जान से प्यारे भाई आशुतोष की बीमारी का इलाज ढूंढने का। रात दिन किताबों में यही ढूंढती रहती थी कि ‘मस्क्युलर डिसऑर्डर’ का उपचार क्या है, जिसने उसके भाई को अपाहिज बना दिया। उसके पास बीटेक में और भी विकल्प थे, लेकिन भाई की खातिर चुना बॉयोटेक्नोलॉजी को। एमटेक में यही बीमारी उसका प्रोजेक्ट था।
तोशी काउंसलिंग 30 अगस्त को हुई थी। उससे पूछा गया था कि वह बायोटेक्नोलॉजी में ही एमटेक क्यों करना चाहती है। उसका जवाब था, ‘मैंने बीटेक अपने भाई के लिए किया है। एमटेक भी उसकी बीमारी का उपचार ढूंढने के इरादे से कर रही हूं।’ उसने बताया था कि उसकी छोटी बहन यति फैजाबाद से बीटेक कर रही है। वह खुद जयपुर से बीटेक करके आई थी।
परिवार दोनों बहनों के अलावा सबसे छोटा भाई आशुतोष है। वह मस्क्युलर डिसऑर्डर का शिकार है। इस बीमारी के चलते उसके पैर ठीक से काम नहीं करते। कई डाक्टरों को दिखाया गया, लेकिन वह ठीक न हो सका। इसलिए उसने इसी डिस्आर्डर के पर काम को चुना। एमटेक में एक प्रोजेक्ट पर फोकस करना होता है। उसकी काउंसलिंग करने वाले प्रोफेसर का कहना है कि वह ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरी छात्रा थी।
हमें किसी पर शक नहीं : गोपीनाथ
तोशी के पिता गोपीनाथ सेठ का कहना है कि कातिलों को पुलिस ही बेनकाब करेगी। उन्हें किसी पर शक नहीं है। न ही उनकी किसी से कोई दुश्मनी है। तोशी ने फोन पर कभी ऐसी कोई बात नहीं बताई कि उसे हास्टल या कालेज में किसी से कोई परेशानी है। उन्हें लगता है कि जो कुछ हुआ है, अचानक हुआ होगा।
आगरा में अंत्येष्टि मजबूरी थी
आरबीएस कालेज में एक सवाल यह भी तैर रहा है कि तोशी के शव का अंतिम संस्कार आगरा में क्यों किया गया। उसके परिवारीजन शव को इलाहाबाद क्यों नहीं ले गए। इस पर गोपीनाथ सेठ का कहना है कि कत्ल को दो दिन हो गए थे, लाश सड़ने लगी थी। इलाहाबाद ले जाने में शव और खराब होता, इसलिए मजबूरी में आगरा में ही अंतिम संस्कार किया।
वारदात से हैरान हैं हम : डायरेक्टर
आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज के डायरेक्टर डाक्टर एपी सिंह का कहना है कि वे खुद हैरान हैं कि हास्टल में इतनी बड़ी वारदात कैसे हो गई। वे चाहते हैं कि पुलिस जल्द से जल्द रहस्य से परदा उठाए। पुलिस का पूरा सहयोग किया जा रहा है। 1996 से चल रहे हास्टल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। इससे पहले यहां कभी कोई वारदात नहीं हुई।