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हिस्सेदारी के विवाद में पांटून पुल बंद
हिस्सेदारी के विवाद में पांटून पुल बंद
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:49 AM IST
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हिस्सेदारी के विवाद में पांटून पुल बंद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चंबल नदी पर बने पांटून पुल पर मंगलवार शाम कुछ लोगों ने हिस्सेदारी वसूलने के लिए ठेकेदार और कर्मचारियों पर दबाव बनाया। मना करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। ठेकेदार और कर्मचारियों के भाग जाने के बाद रातभर वाहन चालक और लोग अपनी मर्जी से निकलते रहे। बुधवार सुबह उन्होंने पुल से गार्डर और स्लीपर हटा दिए। ठेकेदार की शिकायत पर पहुंचे अधिकारियों ने स्टीमर का संचालन शुरू कराया।
मंगलवार देरशाम पांटून पुल पर पहुंचे लोगों ने ठेकेदार और कर्मचारियों से हिस्सेदारी मांगी। ठेकेदार ने मना करने पर उन्होंने पुल के बैरियर को तोड़ दिया और जान से मारने की धमकी दी। दहशत में आए ठेकेदार और कर्मचारी मौके से भाग गए। इसके बाद रातभर वाहन चालक और लोग अपनी मर्जी से निकलते रहे। बुधवार सुबह कर्मचारियों और ठेकेदारों ने पुल के स्लीपर और गार्डर हटा दिए। लेकिन पैदल और दोपहिया वाहन लेकर लोग निकलते रहे। बड़े वाहन न निकलने से लोगों को परेशानी हुई। घटना से संबंध में मुख्य ठेकेदार पटियाली कासगंज निवासी किरन देवी ने कर्मचारियों के साथ आयुक्त, जिलाधिकारी और एसएसपी से मिलकर शिकायत की। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार बाह देवेन्द्र सिंह यादव और क्षेत्राधिकारी पिनाहट देवेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुल के पट्टे हटवाकर स्टीमर का संचालन शुरू कराया। तहसीलदार ने बताया कि मामला जमीन के विवाद का है। इसे लेकर पुल पर आवागमन रोका गया है। वे जमीन की पैमाइश कराएंगे। ठेकेदार किरन देवी का कहना है कि कुछ लोग चंबल नदी के किनारे अपनी जमीन बताकर जबरन हिस्सेदारी मांगते हैं। हिस्सेदारी न देने पर उन्होंने जान से मारने की धमकी दी और पुल को अपने कब्जे में ले लिया। वहीं, लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता प्रभाकर शर्मा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
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मंगलवार देरशाम पांटून पुल पर पहुंचे लोगों ने ठेकेदार और कर्मचारियों से हिस्सेदारी मांगी। ठेकेदार ने मना करने पर उन्होंने पुल के बैरियर को तोड़ दिया और जान से मारने की धमकी दी। दहशत में आए ठेकेदार और कर्मचारी मौके से भाग गए। इसके बाद रातभर वाहन चालक और लोग अपनी मर्जी से निकलते रहे। बुधवार सुबह कर्मचारियों और ठेकेदारों ने पुल के स्लीपर और गार्डर हटा दिए। लेकिन पैदल और दोपहिया वाहन लेकर लोग निकलते रहे। बड़े वाहन न निकलने से लोगों को परेशानी हुई। घटना से संबंध में मुख्य ठेकेदार पटियाली कासगंज निवासी किरन देवी ने कर्मचारियों के साथ आयुक्त, जिलाधिकारी और एसएसपी से मिलकर शिकायत की। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार बाह देवेन्द्र सिंह यादव और क्षेत्राधिकारी पिनाहट देवेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुल के पट्टे हटवाकर स्टीमर का संचालन शुरू कराया। तहसीलदार ने बताया कि मामला जमीन के विवाद का है। इसे लेकर पुल पर आवागमन रोका गया है। वे जमीन की पैमाइश कराएंगे। ठेकेदार किरन देवी का कहना है कि कुछ लोग चंबल नदी के किनारे अपनी जमीन बताकर जबरन हिस्सेदारी मांगते हैं। हिस्सेदारी न देने पर उन्होंने जान से मारने की धमकी दी और पुल को अपने कब्जे में ले लिया। वहीं, लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता प्रभाकर शर्मा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
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