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कलवारी कांड : सैफई कनेक्शन से अधिकारी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:25 AM IST
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जमीन को सरकार में निहित करने के लिए प्रशासन कर चुका है सिफारिश
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जगदीशपुरा के कलवारी में हरस्वरूप इंटर कालेज की जिस जमीन पर कब्जे के दौरान कई राउंड फायरिंग और तोड़फोड़ हुई उसेे लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी परेशान हैं। दोनों पक्षों का सैफई कनेक्शन है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के दरबार में हाजिरी देते हैं। सैफई से लेकर दिल्ली तक की परिक्रमा चल रही थी। एक अधिकारी ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की थी कि मामले को सिविल कोर्ट के माध्यम से ही निपटाएं लेकिन सत्ता की धौंस में अधिकारियों की बात को अनसुना किया जा रहा था।
प्रशासन ने सरकार में निहित करने की सिफारिश की है। यह जमीन अनुसूचित जाति के व्यक्ति की थी। बैनामा बिना प्रशासन की अनुमति के हुआ था। दाखिला खारिज होने में दिक्कत हुई तो एक के बाद एक अब तक 23 लोग खरीद-बेच चुके हैं।
वीरेश यादव का कहना है कि उन्होंने जमीन 2004 में खरीदी थी और सुमन यादव 2012 की रजिस्ट्री दिखा रही हैं। जब कब्जे का विवाद बढ़ा था तो इस मामले की जांच एडीएम सिटी के स्तर से हुई थी। एडीएम सिटी ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन होने के कारण दोनों का टाइटिल खारिज करते हुए इसे सरकार में निहित करने की सिफारिश की थी। इस पर दोनों ही पक्ष कोर्ट में चले गए। बताया जा रहा है कि हाल में न्यायालय से कुसुम यादव अपने पक्ष में कब्जे का आदेश लाई थीं और प्रशासन को कब्जा दिलाने का आवेदन दिया था। अब सवाल यह उठता है कि जब कुसुम यादव के पास कोर्ट का आदेश था वे प्रशासन की मदद से कब्जा लेने क्यों नहीं गईं।
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घटना के एक घंटे बाद पहुंचे दो सिपाही
आगरा। कलवारी कांड में भी पुलिस और प्रशासन की लापरवाही उजागर हो गई। वीरेश यादव और उनके परिवार के सदस्य संजय यादव, राहुल आदि का कहना है कि 100 नंबर पर डायल करने के बाद करीब 1.30 बजे दो सिपाही उनके यहां पहुंचे। तब तक आरोपी वहां से जा चुके थे। इसके बाद करीब एक घंटे बाद थाना जगदीशपुरा प्रभारी पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे।
सीसीटीवी में रिकार्ड हुई ‘दहशत’
आगरा। कब्जे की कार्यवाही की तस्वीर कालेज के बाहर लगे दो सीसीटीवी कैमरों में रिकार्ड में हो गई है। इन तस्वीरों में मुंह ढंके हुए युवक खुलेआम फायरिंग कर करते दिख रहे हैं। उनके हाथ में रायफल, तमंचे और पिस्टल और डंडे साफ दिख रहे हैं। फायरिंग की आवाज सुनकर कालेज के बराबर चल रही फैक्ट्री के मजदूर बाहर निकले को एक युवक ने उन्हें फायरिंग करते हुए उन्हें अंदर जाने की धमकी दी, इससे मजदूर फैक्ट्री के अंदर चल गए। कब्जा करने आए लोगों के साथ महिलाओं के हाथ में भी डंडे थे। एक महिला ने जेसीबी पर सवार होकर तोड़फोड़ कराई।
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प्रशासन ने सरकार में निहित करने की सिफारिश की है। यह जमीन अनुसूचित जाति के व्यक्ति की थी। बैनामा बिना प्रशासन की अनुमति के हुआ था। दाखिला खारिज होने में दिक्कत हुई तो एक के बाद एक अब तक 23 लोग खरीद-बेच चुके हैं।
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वीरेश यादव का कहना है कि उन्होंने जमीन 2004 में खरीदी थी और सुमन यादव 2012 की रजिस्ट्री दिखा रही हैं। जब कब्जे का विवाद बढ़ा था तो इस मामले की जांच एडीएम सिटी के स्तर से हुई थी। एडीएम सिटी ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन होने के कारण दोनों का टाइटिल खारिज करते हुए इसे सरकार में निहित करने की सिफारिश की थी। इस पर दोनों ही पक्ष कोर्ट में चले गए। बताया जा रहा है कि हाल में न्यायालय से कुसुम यादव अपने पक्ष में कब्जे का आदेश लाई थीं और प्रशासन को कब्जा दिलाने का आवेदन दिया था। अब सवाल यह उठता है कि जब कुसुम यादव के पास कोर्ट का आदेश था वे प्रशासन की मदद से कब्जा लेने क्यों नहीं गईं।
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घटना के एक घंटे बाद पहुंचे दो सिपाही
आगरा। कलवारी कांड में भी पुलिस और प्रशासन की लापरवाही उजागर हो गई। वीरेश यादव और उनके परिवार के सदस्य संजय यादव, राहुल आदि का कहना है कि 100 नंबर पर डायल करने के बाद करीब 1.30 बजे दो सिपाही उनके यहां पहुंचे। तब तक आरोपी वहां से जा चुके थे। इसके बाद करीब एक घंटे बाद थाना जगदीशपुरा प्रभारी पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे।
सीसीटीवी में रिकार्ड हुई ‘दहशत’
आगरा। कब्जे की कार्यवाही की तस्वीर कालेज के बाहर लगे दो सीसीटीवी कैमरों में रिकार्ड में हो गई है। इन तस्वीरों में मुंह ढंके हुए युवक खुलेआम फायरिंग कर करते दिख रहे हैं। उनके हाथ में रायफल, तमंचे और पिस्टल और डंडे साफ दिख रहे हैं। फायरिंग की आवाज सुनकर कालेज के बराबर चल रही फैक्ट्री के मजदूर बाहर निकले को एक युवक ने उन्हें फायरिंग करते हुए उन्हें अंदर जाने की धमकी दी, इससे मजदूर फैक्ट्री के अंदर चल गए। कब्जा करने आए लोगों के साथ महिलाओं के हाथ में भी डंडे थे। एक महिला ने जेसीबी पर सवार होकर तोड़फोड़ कराई।