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पाई-पाई को तरसे किसान, गुस्से में लगाया जाम
अमर उजाला ब्यूरो/आगरा
Updated Fri, 09 Dec 2016 12:54 AM IST
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पिनाहट में आगरा-बाह रोड, कागारौल में आगरा-जगनेर रोड पर बैंक ग्राहकों ने कैश न मिलने पर लगाया जाम,
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी को एक महीना हो चुका है। रबी की बुवाई के लिए किसान पाई-पाई के लिए तरस रहे हैं लेकिन बैंक नगदी नहीं दे पा रहीं। गुरुवार को देहात में कैश न मिलने के कारण लोगों ने हंगामा, नारेबाजी के बाद जाम लगाया। आगरा-बाह रोड को पिनाहट में और आगरा-जगनेर रोड को कागारौल में जाम कर दिया गया। कड़ाके की ठंड में सुबह से कतार में खड़े लोगों को कैश न मिला तो उन्होंने बैंककर्मियों पर भी अपना गुस्सा निकाला। हर जगह पुलिस ने पहुंचकर हालात संभाले।
स्याहीपुरा में गुरुवार सुबह से केनरा बैंक की शाखा के बाहर लाइन में लगे लोगों को जब कैश नहीं मिला तो उन्होंने आगरा-बाह मार्ग पर जाम लगा दिया। वाहनों की कतार लग गई। लोगों का आरोप है कि बैंक शाखा देरी से खुलती हैं। इसके बाद कैश न होने की बोर्ड लगा दिया जाता है। उन्होंने एक घंटे तक नारेबाजी की। सूचना पर आई पुलिस ने मैनेजर से बात कर टोकन बंटवाए। तब लोग घर लौटे। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को इन लोगों को कैश बांटा जाएगा। बाह में एसबीआई की शाखा के बाहर लगी लाइन हाईवे तक पहुंच गई। भदरौली में पंजाब नेशनल बैंक में भी हंगामा हुआ।
कागारौल में स्टेट बैंक शाखा पर सुबह से लगी लंबी लाइन में लोग तब भड़क उठे, जब बैंक खुलने पर मैनेजर ने कैश न होने की बात कही। इस पर गुस्साए लोगों ने आगरा-जगनेर मार्ग पर जाम लगा दिया। सूचना के तकरीबन डेढ़ घंटे बाद पुलिस पहुंची और लाठियां फटकार कर जाम खुलवाया। यही हाल फतेहपुर सीकरी, किरावली, अछनेरा समेत अन्य इलाकों का रहा। यहां एसबीआई, केनरा बैंक, ओबीसी बैंक, सेंट्रल बैंक, ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की शाखाओं में कैश नहीं पहुंचा। सीकरी में महिलाओं की एसबीआई और केनरा बैंक के मैनेजर से काफी नोकझोंक हुई।
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ग्रामीण बैंकों को कम दिया गया कैश
बीते शुक्रवार को ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की प्रवर्तक बैंक आफ इंडिया को रिजर्व बैंक से कैश मिला, लेकिन बैंक ने ग्रामीण बैंक को कम कैश उपलब्ध कराया। औसतन 1.50 लाख रुपये ही ग्रामीण बैंक की शाखाओं को प्रतिदिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि रबी की बुवाई के कारण किसानों को नगदी की ज्यादा जरूरत है। हाल ये है कि बैंकों ने अपनी देहात की शाखाओं को 10, 20 और 50 के सड़े-गले नोट ही पहुंचाए। नई करेंसी देहात में चुनिंदा शाखाओं तक पहुंच पाई। एक महीने में ग्रामीण बैंकों की शाखाओं में 4 से 6 दिन ही कैश मिला है।
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स्याहीपुरा में गुरुवार सुबह से केनरा बैंक की शाखा के बाहर लाइन में लगे लोगों को जब कैश नहीं मिला तो उन्होंने आगरा-बाह मार्ग पर जाम लगा दिया। वाहनों की कतार लग गई। लोगों का आरोप है कि बैंक शाखा देरी से खुलती हैं। इसके बाद कैश न होने की बोर्ड लगा दिया जाता है। उन्होंने एक घंटे तक नारेबाजी की। सूचना पर आई पुलिस ने मैनेजर से बात कर टोकन बंटवाए। तब लोग घर लौटे। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को इन लोगों को कैश बांटा जाएगा। बाह में एसबीआई की शाखा के बाहर लगी लाइन हाईवे तक पहुंच गई। भदरौली में पंजाब नेशनल बैंक में भी हंगामा हुआ।
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कागारौल में स्टेट बैंक शाखा पर सुबह से लगी लंबी लाइन में लोग तब भड़क उठे, जब बैंक खुलने पर मैनेजर ने कैश न होने की बात कही। इस पर गुस्साए लोगों ने आगरा-जगनेर मार्ग पर जाम लगा दिया। सूचना के तकरीबन डेढ़ घंटे बाद पुलिस पहुंची और लाठियां फटकार कर जाम खुलवाया। यही हाल फतेहपुर सीकरी, किरावली, अछनेरा समेत अन्य इलाकों का रहा। यहां एसबीआई, केनरा बैंक, ओबीसी बैंक, सेंट्रल बैंक, ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की शाखाओं में कैश नहीं पहुंचा। सीकरी में महिलाओं की एसबीआई और केनरा बैंक के मैनेजर से काफी नोकझोंक हुई।
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ग्रामीण बैंकों को कम दिया गया कैश
बीते शुक्रवार को ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की प्रवर्तक बैंक आफ इंडिया को रिजर्व बैंक से कैश मिला, लेकिन बैंक ने ग्रामीण बैंक को कम कैश उपलब्ध कराया। औसतन 1.50 लाख रुपये ही ग्रामीण बैंक की शाखाओं को प्रतिदिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि रबी की बुवाई के कारण किसानों को नगदी की ज्यादा जरूरत है। हाल ये है कि बैंकों ने अपनी देहात की शाखाओं को 10, 20 और 50 के सड़े-गले नोट ही पहुंचाए। नई करेंसी देहात में चुनिंदा शाखाओं तक पहुंच पाई। एक महीने में ग्रामीण बैंकों की शाखाओं में 4 से 6 दिन ही कैश मिला है।