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आईटीआई पास था मेरा भाई, पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मारा

Sat, 10 Dec 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आगरा
अमर उजाला ब्यूरो/आगरा Updated Sat, 10 Dec 2016 12:22 AM IST
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ITI had my brother killed in police encounter
रामू - फोटो : अमर उजाला
मेरा भाई आईटीआई पास था। कभी किसी से झगड़ा तक  नहीं किया। झूठ बोलने को भी पाप समझता था। वह भला अपराध कैसे कर सकता है? पुलिस झूठ बोल रही है। उसे फर्जी मुठभेड़ में मारा गया है। इसकी जांच होनी चाहिए। यह कहते कहते रामू का भाई अजीत सिंह गुस्से में आ जाता है। उसका कहना है कि पुलिस ने पूरी कहानी फर्जी बनाई है।
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एसएन मेडिकल कालेज में पोस्टमार्टम हाउस पर अजीत के अलावा रामू के पिता प्रेम सिंह, तहेरे भाई महेंद्र , जीजा राम प्रकाश समेत कई रिश्तेदार पहुंचे। इनका कहना था कि थाने का रिकार्ड चेक कर लो, चाहें गांव में किसी से मालूम कर लो, रामू ने कभी कोई गलत काम नहीं किया। अजीत सिंह ने कहा कि उसने इसी साल तो किरावली के आनंद कालेज से आईटीआई किया है। नौकरी नहीं मिली तो छोटे-मोटे काम करने लगा। आखिर परिवार का पेट जो पालना था।
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उसने बताया कि रामू गांव में मजदूरी करता था। 10 दिन पहले ही किसी ने बताया कि मथुरा में होर्डिंग कटिंग का काम है। वह वहां चला गया। दो दिसंबर को उससे फोन पर बात हुई थी। कह रहा था, काम ठीक चल रहा है। सोचा था, दो पैसे लेकर आएगा, क्या पता था, उसकी लाश आएगी। रामू छह भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था। उसकी शादी दो साल पहले हुई थी।
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पिता प्रेम सिंह दीवार किनारे रोए जा रहे थे। उनका कहना था कि रामू की पढ़ाई के लिए पेट काट काटकर पैसे दिए। वह गांव से बाहर नहीं जाना चाहता था। किरावली भेजा पढ़ने के लिए। इसकेबाद गांव में ही काम कर रहा था। मथुरा में मजदूरी का काम मिला, तो जाने में घबरा रहा था।
मारपीट का एक मामला दर्ज
आगरा। फतेहपुर थाना सीकरी पुलिस ने बताया कि रामू के खिलाफ सिर्फ मारपीट की एक एनसीआर है। इसके अतिरिक्त कोई केस दर्ज नहीं है। उसकी मौत हो जाने के बाद मथुरा पुलिस ने उसके आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी मांगी थी।

मथुरा पुलिस ने 10 मिनट में तीन बार किया फोन
फतेहपुर सीकरी के रहने वाले रामू की पत्नी हरवीरी घर में काम कर रही थी। दोपहर के तीन बजे थे। तभी उसके  मोबाइल पर घंटी बजी। उसने फोन रिसीव किया तो मथुरा पुलिस से सिपाही बोल रहा था। हरवीरी ने फोन अजित सिंह को दे दिया। बकौल अजित, सिपाही ने बताया कि रामू घायल हो गया है। उसे मथुरा के एक हास्पिटल में भर्ती कराया गया है। वे लोग मथुरा जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी सिपाही का फिर से फोन आ गया। उसने बताया कि रामू को आगरा रेफर किया गया है। उसे एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है। इस पर वे लोग एसएन चल दिए। घर से निकलने से पहले ही फिर से फोन आ गया। इस बार सिपाही बोला कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। शव पोस्टमार्टम हाउस में है। 10 मिनट में तीन बार फोन आया। अजित का सवाल है कि 10 मिनट के भीतर कोई घायल मथुरा से आगरा कैसे आ सकता है?

रात में पोस्टमार्टम नहीं हो पाया
आगरा। रामू का परिवार चाहता था कि उसके शव का पोस्टमार्टम रात में ही हो जाए। लेकिन उनसे साफ इंकार कर दिया गया। पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ ने बताया कि रात में पोस्टमार्टम केवल डीएम के आदेश पर होता है। उधर, प्रशासन के अधिकारी भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।
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