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बेबस हुक्मुरान

Mon, 06 Jul 2015 02:27 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Mon, 06 Jul 2015 02:27 AM IST
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helpless administration
सस्ती शराब के चक्कर में लोग अपनी जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं। एक्साइज ड्यूटी अधिक होने से उत्तर प्रदेश में शराब की कीमत पड़ोसी राज्यों के मुकाबले ढाई से तीन गुना तक अधिक है। यही वजह है कि यूपी के बार्डर वाले राज्यों से प्रतिदिन शराब की तस्करी होती है। तस्करों ने तमाम चोर रास्ते बना रखे हैं। ऐसा नहीं है कि आबकारी विभाग को इन रास्तों की जानकारी नहीं है, लेकिन अधिकारी जानबूझकर आंख बंद करके बैठे रहते हैं।
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हरियाणा और राजस्थान में देशी शराब उत्तर प्रदेश के मुकाबले तीन गुना सस्ती है। मध्य प्रदेश में भी देशी शराब की कीमत दो गुना तक कम है। जो देशी शराब की बोतल उत्तर प्रदेश में 77 रुपये मिलती है वह राजस्थान और हरियाणा में करीब 25 रुपये की मिल जाती है। मध्यप्रदेश में उस बोतल की कीमत करीब 38 रुपये है। अंग्रेजी शराब का जो क्वार्टर यहां करीब 160 रुपये का आता है वह हरियाणा और राजस्थान में 80 रुपये तक मिल जाता है। कुछ ऐसी ही स्थिति बीयर की है। यूपी में बीयर लाइसेंसी दुकानों पर 105 रुपये में मिल रही है, वह हरियाणा और राजस्थान 40-45 रुपये तक मिल जाती है।
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राजस्थान बार्डर पर मनिया से और चौमा शाहपुर, रुपवास, और अन्य ग्रामीण इलाके में बने ठेकों से शराब की तस्करी होती है। सैंया और फतेहपुर सीकरी चेक पोस्ट से बचने के लिए तस्करों ने गांवों की सड़कों से तमाम चोर रास्ते बना रखे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो धड़ल्ले से हाईवे का प्रयोग करते हैं। इसी तरह हरियाणा बार्डर पर होडल से शराब की तस्करी की जाती है। एक शराब कारोबारी का कहना है कि हरियाणा बार्डर पर पेटियों की बोली लगती है।
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हरियाणा की शराब की होम डिलीवरी
एक शराब कारोबारी ने बताया कि अंग्रेजी शराब के लाइसेंस धारक परेशान हैं। दरअसल, शहर में हरियाणा की शराब की होम डिलीवरी तक हो रही है। इस कारोबार से जुड़े लोग स्कूटर मोटरसाइकिलों की जरिये होम डिलीवरी पहुंचा रहे हैं। शहर मेें होने वाले समारोहों में हरियाणा की शराब परोसी जा रही है। शहर में कुछ बार भी हैं जहां कुछ पैग तो सही परोसे जाते हैं उसके बाद हरियाणा का माल बेचा जाता है।


मुनाफे के लिए मिथाइल एल्कोहल का इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश में महंगी शराब के चलते ही लोग सस्ती कच्ची शराब पीते हैं। इसी में इनकी जान जा रही है। सस्ती के चक्कर में ही गांवों में शराब की अवैध भट्टियां चल रही हैं। कच्ची शराब सबसे ज्यादा खतरनाक है। ज्यादा लालच के चक्कर में इसमें इथाइल की जगह मिथाइल एल्कोहल इस्तेमाल किया जाता है। यह जानलेवा है।

जगदीशपुरा, एत्माद्दौला में पकड़ी अवैध शराब
आगरा। जहरीली शराब पीकर हो रही लोगों की मौत के बाद अब आबकारी विभाग की नींद टूटी है। रविवार को आबकारी और पुलिस की टीम ने जगदीशपुरा और एत्माद्दौला क्षेत्र में छापामार कर बड़ी मात्रा में हरियाणा से तस्करी कर लाई गई शराब बरामद की है।
आबकारी निरीक्षक सुरेश चंद्र ने बताया कि जगदीशपुरा के रामनगर इलाके में दिलीप के घर से करीब 10 पेटी हरियाणा की अंग्रेजी शराब बरामद की गई है। दिलीप को गिरफ्तार कर लिया है। उसका साथी हरियाणा फरीदाबाद निवासी सूरज पुलिस के हाथ नहीं लगा है। दूसरी ओर एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के गोवर्धन का पुरा में टीम ने सलीम के घर से 48 क्वार्टर देशी शराब और करीब 15 टिन बीयर के बरामद किए हैं। सलीम के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

वोट के खातिर बांट रहे ‘जहर’
 पंचायत चुनाव की आहट होते ही गांव में वोटों के लिए बिसात बिछने लगी। कोई दबंगों को पैसे बांट रहा है तो कोई शराब की दावत देने में लगा। चुनाव थोड़ा दूर है, इसलिए ज्यादा पैसा भी नहीं खर्च कर रहे। यही वजह है कि प्रधानी के दावेदार असली की जगह कच्ची शराब बांट रहे हैं। नतीजा, जिंदगी बेमौत मरने लगी है।
अभी यह शुरुआत है। अगर प्रशासन इसी तरह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा तो लाशों की गिनती करना मुश्किल हो जाएगा। पहले शमसाबाद और फिर खंदौली में जहरीली शराब से हुई मौत के बाद भी ये खेल जारी है।
अब जरूरत है कच्ची शराब बनाने के लिए बदनाम गांवों में व्यापक अभियान चलाने की। आबकारी विभाग का रिकार्ड भी यह बता रहा है कि पिछले दो माह में शराब की तस्करी बढ़ी है। हरियाणा और राजस्थान से आ रही शराब पकड़ी भी गई है।
नशे में झगड़ा होने के मामले भी पुलिस के पास ज्यादा आ रहे हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर में प्रधानी, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव होंगे। अभी सीटों का आरक्षण तय नहीं हुआ है। इसके बाद शराब वितरण और तेज हो जाएगा। अभी कच्ची शराब बांटी जा रही है, फिर हरियाणा की तस्करी वाली पिलाई जाएगी। उम्मीदवारों के खास लोगों को ही यूपी की महंगी शराब मिलेगी। यह पहली बार नहीं हो रहा। लेकिन पुलिस एक्शन में तभी आती है जब एक साथ कई मौत हो जाएं।

बीकापुर से आती है जहरीली शराब!
इसौली और गढ़ी खांडेराव के लोगों का कहना है कि यह जहरीली शराब पुलिस की शह पर शमसाबाद के पास ही स्थित बीकापुर से आती है। ग्रामीणों का आरोप है कि वहीं पर यह शराब बनती है। लोगों का कहना है कि गांव में ठेका नहीं है। इसके बाद भी कुछ लोग बीकापुर से सस्ती मिलावटी शराब लाकर गांव में बेचते हैं। यह लोग पहले कोई और शराब लाते थे मगर 27 जून को दूसरी शराब लाई गई थी। अधिकतर लोगों की हालत उसी दिन की शराब पीने से बिगड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उस दिन लाया गया शराब का पूरा लॉट जहरीला था। इसौली के ग्राम प्रधान मेवाराम का कहना है कि गांव में यादराम कई सालों से शराब का अवैध कारोबार कर रहा है। जिसमें लोगों को अवैध शराब न खरीदने की अपील की गई है।


बेटे की चिता के साथ जल गए अरमान
इसौली निवासी 65 वर्षीय मुन्ना लाल की आंखों से आंसु थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जहरीला शराब ने उसके 40 वर्षीय बेटे सुनील को भी निगल लिया। जवान बेटे की मौत के बाद मुन्ना लाल पूरी तरह से टूट गया। अपने आपको संभालते हुए वह बस इतना ही बोला, ‘बुढ़ाने में बेटे से बहुत उम्मीद थी कि वह मेरी सेवा करेगा। मगर, इससे पहले वह ही दुनिया से विदा हो गया। मेरे तो सारे अरमान धरे के धरे रह गए।’ सुनील अपने पीछे पांच बेटिया और एक बेटा छोड़ गया है।
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