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शिक्षा विभाग का 'नटवरलाल' चपरासी गिरफ्तार, नौकरी का झांसा देकर ठगे करोड़ों रुपये

Thu, 31 Jan 2019 06:51 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 31 Jan 2019 06:51 PM IST
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fourth grade employee of education department arrested for fraud in agra
धोखाधड़ी का आरोपी चपरासी अजय सिंह
बीएड पास बेरोजगार नौजवानों को बेसिक शिक्षा विभाग में सरकारी शिक्षक बनाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना अजय कुमार को आगरा में गिरफ्तार कर लिया गया। वो बलिया में शिक्षा विभाग में चपरासी के पद पर तैनात हैं। 
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उसके गिरोह में पांच और सदस्य हैं। पुलिस इन सभी की तलाश कर रही है। इस गिरोह ने अकेले आगरा में ही 28 लोगों से 90 लाख की ठगी की है। गाजियाबाद, कन्नौज, मैनपुरी समेत कई जिलों में गिरोह का जाल फैला है। वहां के लोग भी शिकार बने हैं।
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इस गिरोह के खिलाफ रिपोर्ट कृष्णा बाग, दयालबाग निवासी कुलदीप कुमार ने दस जुलाई 2018 को थाना न्यू आगरा थाना में दर्ज कराई थी। इसमें बृजभूषण दुबे निवासी गांव सिकरोदा, (फतेहपुर सीकरी), अजय सिंह चौहान, उसका भाई कृष्णा, बेटा कन्हैया, अंकज सिंह और पत्नी पिंकी निवासी गांव केदारपुर, थाना वासोड़ी, बांसडीह, बलिया आरोपी हैं।
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फर्जी नियुक्ति पत्र थमाए

बृजभूषण खुद को अध्यापक बताता है। अजय सिंह खुद को बलिया के डायट में क्लर्क बताता था। कुलदीप का कहना है कि उसने 2011 में बीएड कर लिया था। वो नौकरी की तलाश में था। तभी बृजभूषण ने संपर्क किया। नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया और पांच लाख रुपये ले लिए।

इसी तरह 28 लोगों से चार से पांच लाख रुपये ले लिए गए। कुछ रकम कैश और कुछ रकम खातों में जमा कराई गई। इसके बाद 18 मार्च 2015 को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए। इस पर रकम वापस मांगी। 

बृजभूषण कमला नगर में स्कूल में तैनात था। उसने अपना ट्रांसफर जगनेर के एक कालेज में करा लिया, जबकि अजय सिंह ने संपर्क बंद कर दिया। मामले की जांच दयालबाग चौकी इंचार्ज अवनीश कुमार कर रहे थे।

इनके साथ हुई धोखाधड़ी

उन्होंने बताया कि आरोपी अजय सिंह को आईएसबीटी से पकड़ लिया। उसने बताया कि वो शिक्षा विभाग में चपरासी है। उसके खिलाफ गाजियाबाद, मैनपुरी, कन्नौज में मुकदमों की जानकारी मिली है। करोड़ों की धोखाधड़ी सामने आ सकती है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

धोखाधड़ी के शिकार कुलदीप, नीरज चौहान, सरवेंद्र प्रताप, सुनील कुमार सिंह, विनय मिश्रा, नीलम राजपूत, अमित चौहान, देवेंद्र शर्मा, वंदना पाराशर, जितेंद्र, मनोज, पुष्पेंद्र, हमवीर सिंह, अनुराग पांडेय, राजवीर, सत्येंद्र, अजय, शैलेंद्र, गौरव, योगेंद्र, पदम किशोर, त्रिवेंद्र, मुकेशचंद्र, जगजीत, रविंद्र, पूरनचंद्र, देशराज, पूजा हैं। 

सभी से चार से पांच लाख रुपये लिए गए थे। इस तरह यह धोखाधड़ी एक करोड़ से अधिक की है। मगर, खातों में रकम ही पीड़ितों के पास रिकॉर्ड है। बाकी रकम कैश दी थी। ये आरोपी आगरा के हैं।

चपरासी चला रहा था समानांतर शिक्षा विभाग

पीड़ितों के मुताबिक, बलिया शिक्षा विभाग का चपरासी समानांतर विभाग चला रहा था। उसने पीड़ितों को न सिर्फ नाम की सूची दी, बल्कि उन्हें कार्य मुक्ति प्रमाण पत्र भी दे दिए। वह बाद में फर्जी निकले। 

किसी को शक न हो, इसके लिए वह सभी डायट के पास ही एक फैक्ट्री में बुलाता था। पीड़ित सुजीत सिंह, कुलदीप सिंह, मनीष शर्मा, जितेंद्र ने पुलिस को बताया कि आरोपी की बलिया डायट के पास डिटरजेंट की फैक्ट्री है। यहीं पर 35-40 लोगों के फार्म भरवाए गए थे। 

अजय का बेटा अंकज सिंह एक पार्टी का नेता भी है। वह चुनाव भी लड़ चुका है। वहीं नवंबर 2018 में पुलिस ने आरोपी बृजभूषण को पकड़ लिया था। उसे़ दयालबाग चौकी पर लेकर भी आए थे। मगर, पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। पीड़ितों की सुनवाई नहीं की गई थी।

पीड़ितों के प्लान में फंस गया आरोपी

पुलिस की दबिश देने के बाद भी आरोपी अजय कुमार सिंह हाथ नहीं आ रहा था। इस पर पीड़ितों ने एक प्लान बनाया। एक  युवक ने नौकरी लगवाने के लिए अजय से संपर्क किया। 

उसने उससे भी पांच लाख रुपयों की मांग की। युवक ने उसे रुपये लेने के लिए आगरा बुलाया। इस पर अजय सिंह आ गया। पीड़ितों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस के हवाले कर दिया।
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