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फोरेंसिक वैज्ञानिक भी क्राइम सीन में उलझे
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Sun, 22 Nov 2015 01:59 AM IST
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शहर की पॉश कालोनी खंदारी के हनुमान चौराहा स्थित घर में 14 नवंबर (शनिवार रात) को चमड़ा कारोबारी अवनीश कुमार ग्रोवर (69) और उनकी पत्नी ऊषा रानी (65) की हत्या के सात दिन बाद फोरेंसिक वैज्ञानिकों की टीम घटनास्थल पर बुलाई गई। टीम ने क्राइम सीन जानने के लिए पुलिस और परिवारीजनों से भी बात की।
मगर, घटनास्थल पर किसी तरह का साक्ष्य न मिल पाने के कारण वैज्ञानिक उलझ गए। बदमाशों ने घर में कब और किस रास्ते से प्रवेश किया? हत्या करके शव गैराज में क्यों डाले गए? जैसे सवालों के जवाब नहीं मिल सके।
बता दें, कारोबारी दंपति की हत्या मेन गेट के पास फावड़े से सिर कुचलकर बेरहमी से हत्या की गई थी। दोनों के शव घसीटकर गैराज में बंद किए थे। उनके पैर और मुंह पर टेप लगाया गया था।
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मेन गेट पर खून से सना फावड़ा पड़ा था। फर्श पर घसीटे जाने के निशान थे। अवनीश ग्रोवर के बेडरूम में लूट की गई थी। फोरेंसिक साइंस लैब के डिप्टी डायरेक्टर डा. कपिल कुमार, राघवेंद्र कुमार, गीता रानी सहित सात सदस्यीय टीम ने सबसे पहले उस स्थान को देखा, जहां हत्या की गई। वहां से सभी सामान हटाया जा चुका है। सफाई भी की जा चुकी है। इसके बाद टीम ने गैराज को देखा। मगर, अब वहां से भी सामान इधर-उधर किया जा चुका है। गेट की टूटी जाली में हाथ डालकर चटकनी खोली। इसके अलावा परिवारीजनों से भी बात की।
कमरों के अंदर भी पड़ताल की। घटनास्थल पर फोटोग्राफी भी की गई। एक घंटे तक रुकी टीम ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर सकी। बता दें कि पुलिस ने घर से फावड़ा और गैंती बरामद की थी। इसके अलावा भी अन्य साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं।
..तो लूटपाट के बाद की हत्या!
वैज्ञानिकों ने यह पता करने की कोशिश की लूटपाट पहले की गई या फिर हत्या पहले हुई। इसके लिए घर के अंदर और बाहर केमिकल डाला गया। मगर, घर के अंदर कही भी खून नहीं मिला। ऐसे में आशंका है कि लूटपाट पहले की गई। बाद में हत्या की घटना को अंजाम दिया गया।
सर्विलांस का सहारा
कारोबारी दंपति के मोबाइल भी लूटे गए थे। हालांकि तीन दिन बाद कारोबारी के मोबाइल का सिम बेडरूम में मिल गया था। शुक्रवार को ऊषा रानी के मोबाइल का सिम भी पुलिस ने बरामद कर लिया था। 15 नवंबर को यह राजनगर के एक बच्चे को नाला बुढ़ान सैयद पर पड़ा मिला था।
इसके बाद पुलिस ने बच्चे के परिवारीजनों से बात की। पुलिस को आशंका है कि हत्यारे खटीक पाड़ा की तरफ भागे होंगे। पुलिस अब सर्विलांस से पता करने की कोशिश में है कि इन खंदारी से लेकर खटीक पाड़ा तक किस-किस ने मोबाइल का प्रयोग किया।
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मगर, घटनास्थल पर किसी तरह का साक्ष्य न मिल पाने के कारण वैज्ञानिक उलझ गए। बदमाशों ने घर में कब और किस रास्ते से प्रवेश किया? हत्या करके शव गैराज में क्यों डाले गए? जैसे सवालों के जवाब नहीं मिल सके।
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बता दें, कारोबारी दंपति की हत्या मेन गेट के पास फावड़े से सिर कुचलकर बेरहमी से हत्या की गई थी। दोनों के शव घसीटकर गैराज में बंद किए थे। उनके पैर और मुंह पर टेप लगाया गया था।
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मेन गेट पर खून से सना फावड़ा पड़ा था। फर्श पर घसीटे जाने के निशान थे। अवनीश ग्रोवर के बेडरूम में लूट की गई थी। फोरेंसिक साइंस लैब के डिप्टी डायरेक्टर डा. कपिल कुमार, राघवेंद्र कुमार, गीता रानी सहित सात सदस्यीय टीम ने सबसे पहले उस स्थान को देखा, जहां हत्या की गई। वहां से सभी सामान हटाया जा चुका है। सफाई भी की जा चुकी है। इसके बाद टीम ने गैराज को देखा। मगर, अब वहां से भी सामान इधर-उधर किया जा चुका है। गेट की टूटी जाली में हाथ डालकर चटकनी खोली। इसके अलावा परिवारीजनों से भी बात की।
कमरों के अंदर भी पड़ताल की। घटनास्थल पर फोटोग्राफी भी की गई। एक घंटे तक रुकी टीम ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर सकी। बता दें कि पुलिस ने घर से फावड़ा और गैंती बरामद की थी। इसके अलावा भी अन्य साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं।
..तो लूटपाट के बाद की हत्या!
वैज्ञानिकों ने यह पता करने की कोशिश की लूटपाट पहले की गई या फिर हत्या पहले हुई। इसके लिए घर के अंदर और बाहर केमिकल डाला गया। मगर, घर के अंदर कही भी खून नहीं मिला। ऐसे में आशंका है कि लूटपाट पहले की गई। बाद में हत्या की घटना को अंजाम दिया गया।
सर्विलांस का सहारा
कारोबारी दंपति के मोबाइल भी लूटे गए थे। हालांकि तीन दिन बाद कारोबारी के मोबाइल का सिम बेडरूम में मिल गया था। शुक्रवार को ऊषा रानी के मोबाइल का सिम भी पुलिस ने बरामद कर लिया था। 15 नवंबर को यह राजनगर के एक बच्चे को नाला बुढ़ान सैयद पर पड़ा मिला था।
इसके बाद पुलिस ने बच्चे के परिवारीजनों से बात की। पुलिस को आशंका है कि हत्यारे खटीक पाड़ा की तरफ भागे होंगे। पुलिस अब सर्विलांस से पता करने की कोशिश में है कि इन खंदारी से लेकर खटीक पाड़ा तक किस-किस ने मोबाइल का प्रयोग किया।