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फर्जी दस्तावेज से खोली थी ईएमआई फ्री कार कंपनी
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 04 Dec 2015 02:10 AM IST
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करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी ईएमआई फ्री कंपनी के डायरेक्टर ध्यान प्रताप सिंह को सिकंदरा पुलिस ने 24 घंटे के रिमांड पर लेकर बुधवार को पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। उसने बताया कि कंपनी खोलने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया था। कार पर विज्ञापन के जरिए प्रचार करने की भी अनुमति नहीं थी।
आवास विकास में 2014 में खोली गई इस कंपनी ने ईएमआई कार दिलाने के नाम पर 31-31 हजार और कंपनी की फ्रेंचाइजी के लिए तीन तीन लाख रुपये लिए थे। उसके झासे में आगरा और अलीगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजराज, बिहार, छत्तीसगढ़ तक के लोग आ गए थे।
13 अगस्त को उसकी जालसाजी सामने आ गई। लोगों को दिए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए। उसके खिलाफ सिकंदरा थाना में 31 केस दर्ज कराए गए थे। इसका पता चलते ही वह 2008 के बुलंदशहर के मामले में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया था। सिकंदरा पुलिस ने बुधवार सुबह उसे रिमांड पर लिया। उससे कार लोन में इस्तेमाल बैंक से संबंधित 400 दस्तावेज के बारे में सवाल किए गए।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि कई दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद कंपनी खोलने के लिए इस्तेमाल दस्तावेज के बारे में पूछा तो इनमें भी कई फर्जी मिले। उसने कंपनी खोलने के लिए किसी भी स्तर से कोई अनुमति नहीं ले रखी थी। इंस्पेक्टर सिकंदरा ने बताया कि उसके पूछताछ अभी चल रही है। कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल चुकी हैं।
‘मैंने 60 अधिकारियों को कार गिफ्ट की’
आगरा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान डीपी सिंह ने कहा है किवह आसानी से फंसने वाला नहीं था। उसने 60 अफसरों को कार गिफ्ट की थी। इनका डाउन पेमेंट उसने दिया। इसके बाद ईएमआई भी दे रहा था। इनमें से 15 पुलिस अधिकारी हैं। इनमें से कई आगरा के भी हैं। उसने यहां तक दावा किया कि ये अधिकारी अभी भी उससे उपहार में मिली कार चला रहे हैं। हालांकि उसने किसी का नाम बताने से इंकार कर दिया है।
उसका कहना था कि अगर नाम लिया तो और बड़ी मुश्किल में फंस जाएगा। इस पर पुलिस का कहना है कि वह खुद को बचाने के लिए झूठ बोल रहा है।
दरोगा ने ब्लॉक कराए थे चार एकाउंट
उसने बताया कि उसके बैंक आफ महाराष्ट्र, बैंक आफ इंडिया, एसबीआई और बीएमबी में कंपनी के खाते हैं। उपहार न मिलने पर इटावा के एक दरोगा ने इन खातों को बंद करवा दिया था। इसके बाद एक हजार से ज्यादा चेक बाउंस हो गए थे।
फ्रेंचाइजर्स ने बना ली अपनी कंपनी
आरोपी डायरेक्टर डीपी सिंह ने मीडिया को बताया कि उनके कई साथियों ने कंपनी का पैसा उड़ाया है। इनमें कई फ्रेंचाइजर भी शामिल हैं। उन्होंने नए नाम से कंपनी भी खोल ली हैं। उसने कहा कि धोखाधड़ी उसने नहीं की है। यह सब फ्रेंचाइजर्स का किया धरा है।
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आवास विकास में 2014 में खोली गई इस कंपनी ने ईएमआई कार दिलाने के नाम पर 31-31 हजार और कंपनी की फ्रेंचाइजी के लिए तीन तीन लाख रुपये लिए थे। उसके झासे में आगरा और अलीगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजराज, बिहार, छत्तीसगढ़ तक के लोग आ गए थे।
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13 अगस्त को उसकी जालसाजी सामने आ गई। लोगों को दिए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए। उसके खिलाफ सिकंदरा थाना में 31 केस दर्ज कराए गए थे। इसका पता चलते ही वह 2008 के बुलंदशहर के मामले में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया था। सिकंदरा पुलिस ने बुधवार सुबह उसे रिमांड पर लिया। उससे कार लोन में इस्तेमाल बैंक से संबंधित 400 दस्तावेज के बारे में सवाल किए गए।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि कई दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद कंपनी खोलने के लिए इस्तेमाल दस्तावेज के बारे में पूछा तो इनमें भी कई फर्जी मिले। उसने कंपनी खोलने के लिए किसी भी स्तर से कोई अनुमति नहीं ले रखी थी। इंस्पेक्टर सिकंदरा ने बताया कि उसके पूछताछ अभी चल रही है। कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल चुकी हैं।
‘मैंने 60 अधिकारियों को कार गिफ्ट की’
आगरा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान डीपी सिंह ने कहा है किवह आसानी से फंसने वाला नहीं था। उसने 60 अफसरों को कार गिफ्ट की थी। इनका डाउन पेमेंट उसने दिया। इसके बाद ईएमआई भी दे रहा था। इनमें से 15 पुलिस अधिकारी हैं। इनमें से कई आगरा के भी हैं। उसने यहां तक दावा किया कि ये अधिकारी अभी भी उससे उपहार में मिली कार चला रहे हैं। हालांकि उसने किसी का नाम बताने से इंकार कर दिया है।
उसका कहना था कि अगर नाम लिया तो और बड़ी मुश्किल में फंस जाएगा। इस पर पुलिस का कहना है कि वह खुद को बचाने के लिए झूठ बोल रहा है।
दरोगा ने ब्लॉक कराए थे चार एकाउंट
उसने बताया कि उसके बैंक आफ महाराष्ट्र, बैंक आफ इंडिया, एसबीआई और बीएमबी में कंपनी के खाते हैं। उपहार न मिलने पर इटावा के एक दरोगा ने इन खातों को बंद करवा दिया था। इसके बाद एक हजार से ज्यादा चेक बाउंस हो गए थे।
फ्रेंचाइजर्स ने बना ली अपनी कंपनी
आरोपी डायरेक्टर डीपी सिंह ने मीडिया को बताया कि उनके कई साथियों ने कंपनी का पैसा उड़ाया है। इनमें कई फ्रेंचाइजर भी शामिल हैं। उन्होंने नए नाम से कंपनी भी खोल ली हैं। उसने कहा कि धोखाधड़ी उसने नहीं की है। यह सब फ्रेंचाइजर्स का किया धरा है।