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दबिश-दबिश का ड्रामा फेल तो अब मीटिंग-मीटिंग का खेल
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
Updated Thu, 16 Mar 2017 11:31 PM IST
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100 करोड़ की तेल चोरी के मुख्य आरोपी मनोज गोयल
- फोटो : अमर उजाला
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महीना एक , कार्रवाई शून्य
सर्विलांस : मनोज गोयल ने फरार होने के दो दिन तक मोबाइल ऑन रखा, तब उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं की गई।
वारंट : एनबीडब्ल्यू लेने के लिए कोर्ट में अर्जी देने में भी देरी की। अभी तक वारंट नहीं मिल पाए हैं।
पासपोर्ट : पुलिस ने उसके पासपोर्ट को निलंबित कराने के लिए अभी तक पासपोर्ट आफिस को रिपोर्ट नहीं भेजी है।
लाइसेंस : उसके रिवाल्वर के शस्त्र लाइसेंस को भी तब निरस्त किया गया जब मीडिया में इसकी खबर्रें आइं।
तफ्तीश : मनोज गोयल के कई दोस्तों ने भी चोरी का तेल बेचा है। उन्हें अभी तक आरोपी नहीं बनाया गया।
बरामदगी : सौ करोड़ की तेल चोरी में इस्तेमाल किए गए टैंकरों को भी पुलिस ने अभी तक अपने कब्जे में नहीं लिया है।
मथुरा रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंध लगाकर की गई सौ करोड़ की तेल चोरी के मास्टरमाइंड मनोज गोयल पर कार्रवाई के बजाए पुलिस सिर्फ दिखावा कर रही है। पहले कागजों में दबिश का ड्रामा चला। यह फेल हो गया। अब एक महीना बीत जाने केबाद मीटिंग-मीटिंग का खेल खेला जा रहा है। आला अधिकारी मीटिंग कर उसकी गिरफ्तारी की हिदायत दे रहे हैं लेकिन पुलिस के कान पर जूं नही रेंग रही है। आईजी सुजीत पांडेय ने गुरुवार को एक बार फिर अपने दफ्तर में अफसरों की मीटिंग ली।
उन्होंने सख्ती के साथ कहा कि मनोज गोयल की गिरफ्तारी के लिए रात दिन एक कर दो। सात में उसकी गिरफ्तारी हो जानी चाहिए लेकिन देर रात तक इसका कुछ नतीजा नहीं निकला। बता दें, यह मामला 17 फरवरी को प्रकाश में आया था। पूरा एक महीना बीत गया है। इससे पहले आईजी मथुरा जाकर वहां अफसरों की मीटिंग ले चुके थे। उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला था। मथुरा पुलिस मनोज गोयल का सुराग तक नहीं लगा पाई।
डीआईजी महेश कुमार मिश्रा ने भी पुलिस को सख्त हिदायत दी थी मनोज पर शिकंजा कसने की। इसका भी कोई असर नहीं हुआ। उसे पकड़ने के लिए दो उपाय किए जा सकते हैं। एक तो एसटीएफ, क्राइम ब्रांच समेत कई पुलिस टीमें लगाकर उसके ठिकानों पर तलाश की जाए। दूसरा, चोरी में सहयोग करने वाले उसके साथियों पर शिकंजा कसके उस पर दबाव बनाया जाए। हैरानी की बात यह है कि पुलिस दोनों में से कोई काम नहीं कर रही।
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नोटिस देकर भूल गया आपूर्ति विभाग
आगरा। सिर्फ पुलिस ही नहीं, मनोज गोयल पर कार्रवाई में सभी महकमे ढिलाई बरत रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर सभी ने कार्रवाई के दावे किए, इसके बाद चुप बैठ गए। आपूर्ति विभाग ने मनोज गोयल के सात पेट्रोल पंपों को नोटिस जारी किया गया था। इसका जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। नोटिस में पेट्रोल की बिक्री और खरीद का विवरण मांगा गया था। एस्सार कंपनी के अधिकारियों को भी नोटिस दिया गया था। उनसे यह बताने के लिए कहा गया था कि मनोज के पंपों का कब-कब निरीक्षण किया और उसकी रिपोर्ट क्या रही। उन्होंने भी जवाब नहीं दिया। उसके मारुति स्टेट स्थित जिस पंप पर छापा मारा गया था, वह भी अब खुल गया है।
नोट बदले जाने की भी होगी जांच
आईजी की मीटिंग में डीआईजी मेहश कुमार मिश्र और एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह भी मौजूद रहे। आईजी ने मनोज की गिरफ्तारी के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया। यह भी कहा कि नोटबंदी के दौरान मनोज के खातों में हुए लेन-देन की जांच की जाएगी। बता दें, पुलिस को शक है कि मनोज के पेट्रोल पंपों पर नोटबंदी के दौरान नोट बदले जाने का खेल हुआ।
वर्जन
मथुरा के तेल चोरी प्रकरण में कार्रवाई के लिए मीटिंग की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की जाए।
- सुजीत पांडे ( आईजी )
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सर्विलांस : मनोज गोयल ने फरार होने के दो दिन तक मोबाइल ऑन रखा, तब उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं की गई।
वारंट : एनबीडब्ल्यू लेने के लिए कोर्ट में अर्जी देने में भी देरी की। अभी तक वारंट नहीं मिल पाए हैं।
पासपोर्ट : पुलिस ने उसके पासपोर्ट को निलंबित कराने के लिए अभी तक पासपोर्ट आफिस को रिपोर्ट नहीं भेजी है।
लाइसेंस : उसके रिवाल्वर के शस्त्र लाइसेंस को भी तब निरस्त किया गया जब मीडिया में इसकी खबर्रें आइं।
तफ्तीश : मनोज गोयल के कई दोस्तों ने भी चोरी का तेल बेचा है। उन्हें अभी तक आरोपी नहीं बनाया गया।
बरामदगी : सौ करोड़ की तेल चोरी में इस्तेमाल किए गए टैंकरों को भी पुलिस ने अभी तक अपने कब्जे में नहीं लिया है।
मथुरा रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंध लगाकर की गई सौ करोड़ की तेल चोरी के मास्टरमाइंड मनोज गोयल पर कार्रवाई के बजाए पुलिस सिर्फ दिखावा कर रही है। पहले कागजों में दबिश का ड्रामा चला। यह फेल हो गया। अब एक महीना बीत जाने केबाद मीटिंग-मीटिंग का खेल खेला जा रहा है। आला अधिकारी मीटिंग कर उसकी गिरफ्तारी की हिदायत दे रहे हैं लेकिन पुलिस के कान पर जूं नही रेंग रही है। आईजी सुजीत पांडेय ने गुरुवार को एक बार फिर अपने दफ्तर में अफसरों की मीटिंग ली।
उन्होंने सख्ती के साथ कहा कि मनोज गोयल की गिरफ्तारी के लिए रात दिन एक कर दो। सात में उसकी गिरफ्तारी हो जानी चाहिए लेकिन देर रात तक इसका कुछ नतीजा नहीं निकला। बता दें, यह मामला 17 फरवरी को प्रकाश में आया था। पूरा एक महीना बीत गया है। इससे पहले आईजी मथुरा जाकर वहां अफसरों की मीटिंग ले चुके थे। उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला था। मथुरा पुलिस मनोज गोयल का सुराग तक नहीं लगा पाई।
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डीआईजी महेश कुमार मिश्रा ने भी पुलिस को सख्त हिदायत दी थी मनोज पर शिकंजा कसने की। इसका भी कोई असर नहीं हुआ। उसे पकड़ने के लिए दो उपाय किए जा सकते हैं। एक तो एसटीएफ, क्राइम ब्रांच समेत कई पुलिस टीमें लगाकर उसके ठिकानों पर तलाश की जाए। दूसरा, चोरी में सहयोग करने वाले उसके साथियों पर शिकंजा कसके उस पर दबाव बनाया जाए। हैरानी की बात यह है कि पुलिस दोनों में से कोई काम नहीं कर रही।
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नोटिस देकर भूल गया आपूर्ति विभाग
आगरा। सिर्फ पुलिस ही नहीं, मनोज गोयल पर कार्रवाई में सभी महकमे ढिलाई बरत रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर सभी ने कार्रवाई के दावे किए, इसके बाद चुप बैठ गए। आपूर्ति विभाग ने मनोज गोयल के सात पेट्रोल पंपों को नोटिस जारी किया गया था। इसका जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। नोटिस में पेट्रोल की बिक्री और खरीद का विवरण मांगा गया था। एस्सार कंपनी के अधिकारियों को भी नोटिस दिया गया था। उनसे यह बताने के लिए कहा गया था कि मनोज के पंपों का कब-कब निरीक्षण किया और उसकी रिपोर्ट क्या रही। उन्होंने भी जवाब नहीं दिया। उसके मारुति स्टेट स्थित जिस पंप पर छापा मारा गया था, वह भी अब खुल गया है।
नोट बदले जाने की भी होगी जांच
आईजी की मीटिंग में डीआईजी मेहश कुमार मिश्र और एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह भी मौजूद रहे। आईजी ने मनोज की गिरफ्तारी के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया। यह भी कहा कि नोटबंदी के दौरान मनोज के खातों में हुए लेन-देन की जांच की जाएगी। बता दें, पुलिस को शक है कि मनोज के पेट्रोल पंपों पर नोटबंदी के दौरान नोट बदले जाने का खेल हुआ।
वर्जन
मथुरा के तेल चोरी प्रकरण में कार्रवाई के लिए मीटिंग की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की जाए।
- सुजीत पांडे ( आईजी )