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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   clerk arrested in marksheet fraud case

लिपिक भी शिकंजे में, छात्रनेताओं के नाम खोले

Thu, 11 Dec 2014 05:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 11 Dec 2014 05:32 PM IST
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में डीआईजी की स्पेशल टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। गैंग के सरगना मनोज तिवारी के साथी पवन शर्मा के पकड़ में आने के 24 घंटे बाद ही यूनिवर्सिटी के लिपिक रियाजुददीन को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसके पास से आठ फर्जी मार्कशीट और दो प्रोवीजनल डिग्री बरामद हुई। यह पहली बार है जब इस मामले में विश्वविद्यालय के किसी स्थाई कर्मचारी पर कार्रवाई हुई। फर्जी मार्कशीट और प्रोविजनल डिग्री भी बरामद हुई। इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय में खलबली मच गई।
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स्पेशल टीम के इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह ने बताया कि खंदौली में माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक पवन को मंगलवार को पकड़ा था। उसने पूछताछ में विश्वविद्यालय के क्लर्क रियाजुद्दीन और महीपाल सिंह की मदद से फर्जी मार्कशीट तैयार करने की जानकारी दी थी। टीम ने बुधवार को ईदगाह बस स्टेशन के पास से खेरिया मोड़ के नगला मेहराब निवासी रियाजुद्दीन को पकड़ा। उसने पूछताछ बताया कि स्नातक और बीएड की सैकड़ों फर्जी डिग्री और अंकपत्र लोगों को दे चुके हैं। वह वेरिफिकेशन के अलावा चार्ट में नंबर भी बढ़ाता था।
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उसने बताया है कि कई छात्र नेता फर्जी मार्कशीट के कॉकस में शामिल हैं। ऐसे कई नामों का खुलासा भी किया है। वह दबाव डालकर और धौंस से फर्जी अंकपत्र बनवा लेते थे। यूनिवर्सिटी के भी कई और कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी भी जल्द हो सकती है। अब तक यह छठवीं गिरफ्तारी है। इंस्पेक्टर ने बताया कि अन्य आरोपी बृजेश बघेल को पकड़ने के लिए दबिश जारी है।
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वेरिफिकेशन में 10 हजार से दो लाख तक लेता था
पुलिस ने बताया कि विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़े का खेल सालों पुराना है। इसका खुलासा सभी आरोपियों की पूछताछ में हुआ है। हजारों की संख्या में फर्जी मार्कशीट तैयार की जा चुकी है। इन मार्कशीट से अब तक सैकड़ों लोग सरकारी नौकरी तक पा चुके हैं। वेरिफिकेशन का काम रियाजुद्दीन पर होने के कारण वह मोटी रकम लेकर अपने हस्ताक्षर कर देता था। दस हजार से लेकर दो लाख तक की रकम ली जाती थी। कई दलालों से भी उसका संपर्क है।

 
बृजेश बघेल खोलेगा गिरोह का बड़ा पत्ता
रियाजुद्दीन के पकड़े जाने के बाद बुधवार को विश्वविद्यालय में हड़कंप की स्थिति रही। कर्मचारियों के चेहरे पर चिंता के भाव भी थे। महीपाल को लेकर भी चर्चा रही। कर्मचारियों का कहना था कि रियाज ने कई बडे़ कर्मचारियों के नाम पुलिस को बताए हैं। अगर बृजेश बघेल पकड़ में आया तो बडे़ गिरोह का पता पुलिस को चल जाएगा। यह साफ नहीं है कि पुलिस को कितने कर्मचारियों के नाम पता हैं। पुलिस कभी भी दबिश देकर विश्वविद्यालय से कर्मचारियों को गिरफ्तार कर सकती है।
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