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‘साइबर क्राइम के मामलों में डिजिटल साक्ष्य अहम’
‘साइबर क्राइम के मामलों में डिजिटल साक्ष्य अहम’
Updated Sun, 10 Apr 2016 02:01 AM IST
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‘साइबर क्राइम के मामलों में डिजिटल साक्ष्य अहम’
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पुलिस लाइन में साइबर क्राइम पर आगरा जोन की दो दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को समापन हो गया। कार्यशाला में सेंटर फोर रिसर्च आन साइबर क्राइम एंड साइबर लॉ (सीसी एंड सीएल) और कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) के चेयरमैन अनुज अग्रवाल ने बताया कि साइबर क्राइम के मामलों में डिजीटल साक्ष्य जुटाना अहम होता है। इसके लिए पुलिसकर्मियों को ट्रेंड होना होगा। कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है। उन्होंने ‘लाइव’ और ‘डेड’ साक्ष्य जुटाने की तकनीकि के बारे में बताया।
अनुज अग्रवाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि कई बार क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने के मामले आते हैं। अपराधी इंटरनेट और मोबाइल की मदद से दूसरे शहरों में बैठे लोगों के संपर्क में रहते हैं। कंप्यूटर में रकम और लोगों की जानकारी रखी जाती है। ऐसे मेें पुलिस को पता होना चाहिए कि वह किस तरह कंप्यूटर से उनको हासिल कर सकती है। इसी तरह साइबर क्राइम के तमाम मामलों में अपराधी इंटरनेट और कंप्यूटर का सहारा लेते हैं। उन्होंने फोरेंसिक एनालिसिस साफ्टवेयर की जानकारी भी दी। पुलिस कर्मियों को डेमो करके भी दिखाया गया। शाम को कार्यशाला का समापन हो गया। इस मौके पर डीआईजी अजय मोहन शर्मा ने प्रशिक्षण देने वाली टीम को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न भेंट किए। कार्यशाला में एसपी सिटी सुशील घुले, एसपी क्राइम सहित जोन के पुलिस अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
..तो लग सकती है लगाम
सीएसआई के चेयरमैन अनुज अग्रवाल बताते हैं साइबर क्रिमिनल्स फर्जी दस्तावेजों से मोबाइल, इंटरनेट कनेक्शन और बैंक खाता खुलवाते हैं। मगर, अब तकनीक की मदद से उन्हें पकड़ा जा सकता है। डिजीटल साक्ष्य कोर्ट में अपराधी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे साइबर क्राइम के मामलों में काफी हद तक लगाम लगेगी।
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अनुज अग्रवाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि कई बार क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने के मामले आते हैं। अपराधी इंटरनेट और मोबाइल की मदद से दूसरे शहरों में बैठे लोगों के संपर्क में रहते हैं। कंप्यूटर में रकम और लोगों की जानकारी रखी जाती है। ऐसे मेें पुलिस को पता होना चाहिए कि वह किस तरह कंप्यूटर से उनको हासिल कर सकती है। इसी तरह साइबर क्राइम के तमाम मामलों में अपराधी इंटरनेट और कंप्यूटर का सहारा लेते हैं। उन्होंने फोरेंसिक एनालिसिस साफ्टवेयर की जानकारी भी दी। पुलिस कर्मियों को डेमो करके भी दिखाया गया। शाम को कार्यशाला का समापन हो गया। इस मौके पर डीआईजी अजय मोहन शर्मा ने प्रशिक्षण देने वाली टीम को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न भेंट किए। कार्यशाला में एसपी सिटी सुशील घुले, एसपी क्राइम सहित जोन के पुलिस अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
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..तो लग सकती है लगाम
सीएसआई के चेयरमैन अनुज अग्रवाल बताते हैं साइबर क्रिमिनल्स फर्जी दस्तावेजों से मोबाइल, इंटरनेट कनेक्शन और बैंक खाता खुलवाते हैं। मगर, अब तकनीक की मदद से उन्हें पकड़ा जा सकता है। डिजीटल साक्ष्य कोर्ट में अपराधी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे साइबर क्राइम के मामलों में काफी हद तक लगाम लगेगी।
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