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बिल्डर ने पांच दर्जन से अधिक परिवारों के साथ किया धोखा
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Sun, 20 Sep 2015 02:11 AM IST
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खासपुर में यमुना किनारे अवैध रूप से विकसित मां गौरी टाउन में लाखों रुपये के घर खरीद कर पांच दर्जन से अधिक लोग फंस गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का शिकंजा कसने के बाद लोग अपने मकान बेचना चाह रहे हैं। लेकिन कोई 12 लाख में खरीदे गए इन मकानों के छह लाख भी देने को तैयार नहीं है।
मां गौरी टाउन के लोगों की फरियाद खारिज होने के बाद आगरा विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले चरण में डूब क्षेत्र के दायरे में आने वाले भवनों को ढहाया जा रहा है। कालोनी में रहने वाले पांच दर्जन से अधिक परिवार सिर से छत छिनने के डर से दहशत में हैं। कमिश्नर द्वारा कालोनी को अवैध करार दिए जाने के बाद आज नहीं तो कल उनके मकानों पर भी बुलडोजर चल सकता है।
बता दें, यह कालोनी वर्ष 2010 में विकसित की गई थी। तब 9 से 12 लाख रुपये में 80 वर्ग गज के मकान लोगों ने खरीदे थे। बिल्डर के झांसे में आकर लोगों ने अपनी जमा पूंजी से यहां मकान खरीद लिए। तब उन्हें न तो एनजीटी के बारे में जानकारी थी और न ही बिल्डर द्वारा दिए गए धोखे का अहसास था।
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फंस सकते हैं कई विभागों के अफसर
मां गौरी टाउन पूरी तरह से अवैध है। यह बिना मानचित्र स्वीकृति के विकसित की गई थी, मगर ऐसे में कालोनी के लोग तमाम सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्राधिकरण ही नहीं, सिंचाई और तहसील के अधिकारी भी इस अवैध कालोनी को विकसित होने के जिम्मेदार हैं। इन सभी ने तब अपने विभाग की तरफ से एनओसी जारी की थी।
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मां गौरी टाउन के लोगों की फरियाद खारिज होने के बाद आगरा विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले चरण में डूब क्षेत्र के दायरे में आने वाले भवनों को ढहाया जा रहा है। कालोनी में रहने वाले पांच दर्जन से अधिक परिवार सिर से छत छिनने के डर से दहशत में हैं। कमिश्नर द्वारा कालोनी को अवैध करार दिए जाने के बाद आज नहीं तो कल उनके मकानों पर भी बुलडोजर चल सकता है।
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बता दें, यह कालोनी वर्ष 2010 में विकसित की गई थी। तब 9 से 12 लाख रुपये में 80 वर्ग गज के मकान लोगों ने खरीदे थे। बिल्डर के झांसे में आकर लोगों ने अपनी जमा पूंजी से यहां मकान खरीद लिए। तब उन्हें न तो एनजीटी के बारे में जानकारी थी और न ही बिल्डर द्वारा दिए गए धोखे का अहसास था।
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फंस सकते हैं कई विभागों के अफसर
मां गौरी टाउन पूरी तरह से अवैध है। यह बिना मानचित्र स्वीकृति के विकसित की गई थी, मगर ऐसे में कालोनी के लोग तमाम सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्राधिकरण ही नहीं, सिंचाई और तहसील के अधिकारी भी इस अवैध कालोनी को विकसित होने के जिम्मेदार हैं। इन सभी ने तब अपने विभाग की तरफ से एनओसी जारी की थी।