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पीईटीएन : आगरा लैब में परीक्षण पर लगा ब्रेक

Wed, 19 Jul 2017 08:47 AM IST
अमर उजाला, अागरा
अमर उजाला, अागरा Updated Wed, 19 Jul 2017 08:47 AM IST
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break on testing of petn in agra lab
छानबीन करते - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश की विधान सभा में 12 जुलाई को मिले संदिग्ध पाउडर की जांच को लेकर मचे हड़कंप के बीच यह बात सामने आई है कि आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में इसका परीक्षण शुरू तो हुआ था लेकिन अब इसे बीच में ही रुकवा दिया गया है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि संदिग्ध पाउडर को देखते ही वैज्ञानिकों ने इसके बारे में मामले की जांच कर रहे लखनऊ के अधिकारियों को मौखिक जानकारी दी थी। इसी से शासन में हड़कंप मच गया है। जानकारी क्या थी, यह कोई बताने के लिए तैयार नहीं है।
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लैब के सूत्रों ने बताया कि इस पाउडर का सैंपल 15 को लखनऊ से आया  था।सैंपल को खोलते ही विस्फोटक  और रसायन अनुभाग के वैज्ञानिक चौंक गए थे। इस पाउडर को पेंटा एरिथ्रेटॉल टेट्रा नाइट्रेट ( पीईटीएन)  बताया जा रहा था। उन्होंने इस बारे में मामले के जांच अधिकारियों से बात की। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए टीम गठित की गई। इसके बाद परीक्षण शुरू भी हुआ था लेकिन इसे लखनऊ के अधिकारियों ने बीच में ही रुकवा दिया।
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लैब के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सैंपल आया था और टेस्ट भी शुरू हुआ था लेकिन नतीजा निकलने से पहले ही इसे रुकवा दिया गया। इस बारे में कोई अधिकारी मीडिया से बात करने के लिए तैयार नहीं है।
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सूत्रों का यह भी कहना है कि आगरा लैब के अफसरों को सख्त हिदायत दी गई कि वह सैपल का अब कोई परीक्षण न करें और न ही इस बारे में किसी से कोई बात करें। माना जा रहा है कि परीक्षण पर लखनऊ या अन्य किसी लैब में कराया जाएगा।

उधर, इस हिदायत का नतीजा यह हुआ कि लैब के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. एके मित्तल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मंगलवार को लैब से गैर हाजिर रहे। लैब के गेट पर पुलिस भी तैनात कर दी गई। विस्फोटक अनुभाग में कोई काम ही नहीं हुआ।


दोहराई गई रामवृक्ष के डीएनए टेस्ट की कहानी
आगरा।
यह पहला मौका नहीं है जब प्रदेश के किसी लैब में परीक्षण को बीच में रोका गया है। इससे पहले यही कहानी मथुरा की जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव के डीएनए परीक्षण में हुई थी। उसके डीएनए का उसके बेटे के डीएनए से मिलान नहीं हुआ था। परीक्षण लखनऊ लैब में चल रहा था। लैब सूत्रों का कहना है कि मिलान न होने पर वैज्ञानिक घबरा गए थे, क्योंकि इसका मतलब यह था कि वह शव रामवृक्ष यादव का नहीं था जिसे उसका बताया गया। पुलिस के आला अफसर यह दावा कर चुके थे कि रामवृक्ष मर चुका है। ऐसे में डीएनए परीक्षण पूरा होकर रिपोर्ट कोर्ट में पहुंच जाती तो अफसर फंस जाते। इसके चलते परीक्षण को रोक दिया गया। कोई रिपोर्ट ही नहीं दी गई। पहले बहाना बनाया कि केमिकल खत्म हो गया है। बाद में सैंपल सीबीआई को सौंप दिए गए। अब सीबीआई ही डीएनए टेस्ट करा रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब लखनऊ लैब में परीक्षण रोका गया था। अब आगरा में।
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