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शैलेंद्र अग्रवाल को पहले केस में मिली सशर्त जमानत

Sat, 12 Sep 2015 01:39 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Sat, 12 Sep 2015 01:39 AM IST
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bail to shalindra agarwal
सवा चार महीनों से जेल में बंद हाईप्रोफाइल जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ दर्ज 35 में सबसे पहले केस में शुक्रवार को सशर्त जमानत मिल गई। यह मुकदमा दरोगा संजीत सिंह की पत्नी श्वेता सिंह ने दर्ज कराया था। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करते समय दो संगीन धाराएं हटा दीं थीं। माना जा रहा है कि इसी मेहरबानी का फायदा उसे मिला है। उसे अब बाकी 34 केस में भी राहत मिल सकती है।
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श्वेता सिंह ने 28 अप्रैल को दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा था कि शैलेंद्र ने आलू में निवेश के नाम पर 35 फीसदी सालना ब्याज का लालच देकर उसके पति से नवंबर 2013 में 10 लाख की ठगी की। इसके बाद पैसा मांगने पर 16 अप्रैल को काल स्पूफिंग के जरिए तत्कालीन दो डीजीपी के फोन हैक करके दरोगा संजीत सिंह को धमकी दी।
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इस केस की जांच में खुलासा हुआ था कि उसने जालसाजी के लिए सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के ऑफिस का फोन भी हैक किया। पुलिस की जांच के दौरान इस मामले में कई बड़े अफसरों और नेताओं से शैलेंद्र के संबंध उजागर हुए। इसके बाद पुलिस ने अचानक जांच की दिशा बदल दी।
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चार्जशीट में जालसाजी और एससी-एसटी एक्ट की दो संगीन धाराएं हटा ली गईं थीं। उधर, इस केस के बाद उस पर 34 मुकदमे और दर्ज हुए। पुलिस को उसकी हिस्ट्रीशीट खोलनी पड़ी। शैलेंद्र की पैरवी अधिवक्ता दिनेश अग्रवाल ने की।
स्पेशल जज एससी-एसटी कोर्ट अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने एक एक लाख के जमानती और इतनी ही राशि के निजी मुचलकों पर जमानत के आदेश दिए। जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद उसे तीन शर्तों का पालन करना होगा। गौरतलब है कि शैलेंद्र इस समय एटा जेल में बंद है।

ये हैं शर्तें
- साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।
- गवाहों को धमकाएगा, डराएगा नहीं।
- तारीख पर कोर्ट में पेश होता रहेगा।
रिकवरी नहीं कर पाई पुलिस
शैलेंद्र के खिलाफ दर्ज 35 मुकदमों में करोड़ों की जालसाजी के आरोप हैं, लेकिन पुलिस बरामदगी एक रुपये की भी नहीं कर पाई। शुरू में उसके साथियों को मुल्जिम बनाकर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने की बात कही गई थी। इसमें उसकी संपत्ति जब्त की जा सकती थी, लेकिन बाद में पुलिस अधिकारियों का रवैया नरम पड़ता चला गया।
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