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बिना सिम आईडी बेचते शातिर पकड़ा
Updated Sat, 15 Jul 2017 11:22 PM IST
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Absconding Ahmedabad serial blasts (2008) accused Nasir Rangrej arrested
मैनपुरी। कोतवाली पुलिस ने एक फोटो स्टेट की दुकान पर बगैर आईडी लोगों को चालू सिम मुहैया कराने वाले शातिर को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 19 चालू सिम, आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस मिले। पुलिस ने आरोपी को जेल भेजा है।
शुक्रवार शाम को पुलिस क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। तभी उसे सूचना मिली की बस स्टैंड के सामने प्रकाश फोटो स्टूडियो पर एक युवक बगैर आईडी के विभिन्न कंपनियों के सिम लोगों को बेच रहा है। पुलिस टीम ने दुकान के समीप पहुंचकर निगरानी की तो सूचना सही मिली। पुलिसकर्मियों ने सिम बेच रहे युवक प्रदीप कुमार निवासी राजा का बाग गली नंबर 10 को गिरफ्तार कर लिया। दुकान से 19 सिम चालू हालत में बरामद किए। वहीं एक ड्राइविंग लाइसेंस व आधार कार्ड जब्त कर लिया। जब उससे पूछताछ की गई तो वह आईडी के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे सका।
फर्जी आईडी का हो रहा था इस्तेमाल
मोबाइल कंपनियां सिम देने से पहले आधार कार्ड व अन्य प्रमाण-पत्र स्वीकार करती हैं। वेरीफिकेशन के बाद ही सिम को चालू किया जाता है। मगर प्रदीप चालू सिम बेच रहा था। जिससे साफ होता है कि दुकान पर फर्जी कागजात लगाकर सिम को चालू कराने के बाद वहां सिम लेने आने वाले व्यक्ति को दे दिया जाता था। उपभोक्ता को भी चालू सिम मिल रही थी इसलिए वह भी जाने अंजाने अपराध में भागीदार बन रहे थे।
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इस तरह की सिमों से ही होती हैं आपराधिक घटनाएं
बगैर आईडी के सिम प्राप्त कर अपराधी घटनाओं को अंजाम देते हैं। सही कागजात न लगे होने के चलते पुलिस भी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाती। किसी को धमकी देनी हो या कोई आपराधिक घटना को अंजाम देना हो अपराधी को ऐसे स्थानों से आसानी से चालू सिम उपलब्ध होती हैं।
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शुक्रवार शाम को पुलिस क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। तभी उसे सूचना मिली की बस स्टैंड के सामने प्रकाश फोटो स्टूडियो पर एक युवक बगैर आईडी के विभिन्न कंपनियों के सिम लोगों को बेच रहा है। पुलिस टीम ने दुकान के समीप पहुंचकर निगरानी की तो सूचना सही मिली। पुलिसकर्मियों ने सिम बेच रहे युवक प्रदीप कुमार निवासी राजा का बाग गली नंबर 10 को गिरफ्तार कर लिया। दुकान से 19 सिम चालू हालत में बरामद किए। वहीं एक ड्राइविंग लाइसेंस व आधार कार्ड जब्त कर लिया। जब उससे पूछताछ की गई तो वह आईडी के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे सका।
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फर्जी आईडी का हो रहा था इस्तेमाल
मोबाइल कंपनियां सिम देने से पहले आधार कार्ड व अन्य प्रमाण-पत्र स्वीकार करती हैं। वेरीफिकेशन के बाद ही सिम को चालू किया जाता है। मगर प्रदीप चालू सिम बेच रहा था। जिससे साफ होता है कि दुकान पर फर्जी कागजात लगाकर सिम को चालू कराने के बाद वहां सिम लेने आने वाले व्यक्ति को दे दिया जाता था। उपभोक्ता को भी चालू सिम मिल रही थी इसलिए वह भी जाने अंजाने अपराध में भागीदार बन रहे थे।
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इस तरह की सिमों से ही होती हैं आपराधिक घटनाएं
बगैर आईडी के सिम प्राप्त कर अपराधी घटनाओं को अंजाम देते हैं। सही कागजात न लगे होने के चलते पुलिस भी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाती। किसी को धमकी देनी हो या कोई आपराधिक घटना को अंजाम देना हो अपराधी को ऐसे स्थानों से आसानी से चालू सिम उपलब्ध होती हैं।